नियम विरुद्ध अनुकंपा नियुक्ति लेने वाले विवादास्पद बाबू शंकर यादव के तहसील पेंड्रा में संलग्न होने से आदिवासी जनता परेशान

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राजस्व विभाग में की छवि खराब कर रहे हैं शंकर यादव
एसडीएम एवं तहसील का कार्यालय में लंबे समय तक संलग्न रहे विवादास्पद बाबू शंकर यादव को तहसील कार्यालय पेंड्रामें संलग्न कर दिया गया है जिससे आदिवासी जनता परेशान है।
छोटे-छोटे काम के लिए तहसील कार्यालय पहुंचने वाले ग्रामीणों से दुर्व्यवहार पूर्वक बात करके उन पर दबाव बनाना शंकर यादव की आदत में शुमार है यही कारण है कि वह जहां भी पदस्थ रहते हैं विवादों में आ जाते हैं।


यूं तो शंकर यादव की मूल पर स्थापना डाइट पेंड्रा है। उन्हें अपने पिता की मृत्यु उपरांत बाबू के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त हुई थी जो कि नियम विरुद्ध था। वास्तव में वास्तव में उनके पिता चपरासी के पद पर रहते हुए दिवंगत हुए थे तो उन्हें चपरासी के पद पर ही नियुक्ति मिलनी थी मिलनी थी परंतु अपने फन में माहिर शंकर यादव ने नियम विरुद्ध सीधे बाबू पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली और डाइट पेंड्रा में पदस्थ हुए परंतु उन्हें शिक्षा विभाग की नौकरी रास ही नहीं आती तथा अपनी नौकरी का ज्यादातर समय उन्होंने राजस्व कार्यालय में ही गुजारा। उन्हें राजस्व विभाग की मलाईदार कुर्सी ही रास आती है क्योंकि यहां जो भी आता है हाथ जोड़कर आता है तथा जनता को नींबू की तरह जितना निचोड़ो उतना रस निकलता है। एसडीम कार्यालय पेंड्रा रोड एसडीएम कार्यालय मरवाही तहसील कार्यालय पेंड्रा जैसे जिम्मेदार कार्यालय में मलाईदार शाखा के प्रभारी रहे बाबू की लगातार शिकायतों के बाद उन्हें डाइट पेंड्रा वापस भेज दिया गया था परंतु न जाने कौन सा मोह पास शंकर यादव ने चलाया कि अब एक बार फिर भी वह तहसील कार्यालय पेंड्रा में बड़े बाबू बनकर बैठे हैं यहां तो भोली भाली आदिवासी जनता है कोई कुछ बोलने वाला नहीं है और अब शंकर यादव की कार्य प्रणाली यहां की जनता को हलकान कर रही है जिससे राजस्व विभाग की छवि खराब हो रही है।

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