सारंगढ़छत्तीसगढ़

‘मंत्रालय में सेटिंग और कलेक्टर फूफा’ का झांसा: दोस्त ने ही बिछाया ठगी का चक्रव्यूह; गहने गिरवी रखकर ‘मंडी इंस्पेक्टर’ बनने का सपना देखा, 7.40 लाख गंवा बैठी B.Ed छात्रा!!

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नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से लूट का एक और खौफनाक सच। पुलिस ने मास्टरमाइंड और उसके साथियों के खिलाफ धारा 420 और 34 के तहत किया मामला दर्ज!!

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- सरकारी नौकरी की चाहत और एक दोस्त पर किया गया अंधा विश्वास.. इन दोनों ने मिलकर एक होनहार छात्रा के भविष्य पर ऐसा ग्रहण लगाया कि अब वह थाने के चक्कर काटने को मजबूर है। यह कहानी सिर्फ एक ठगी की नहीं है, बल्कि उस सिंडिकेट की है जो बेरोजगारों की मजबूरी और उनके सपनों का सौदा करता है।

सारंगढ़ जिले के ग्राम लालाधुर्वा की रहने वाली B.Ed छात्रा करुणा पटेल (पिता स्व. साहेबराम पटेल) को मंडी इंस्पेक्टर बनाने का ऐसा सब्जबाग दिखाया गया कि उसने अपने गहने तक गिरवी रख दिए। ‘मंत्रालय में पदस्थ’ फर्जी अधिकारी और ‘कलेक्टर फूफा’ का रसूख दिखाकर शातिर ठगों ने छात्रा से किश्तों में 7 लाख 40 हजार रुपये ऐंठ लिए। जब आंखों से पट्टी हटी, तो हाथ में न नौकरी थी और न ही पैसे। अब सारंगढ़ कोतवाली पुलिस ने इस गंभीर मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दोस्ती की आड़ में बिछाया गया जाल:

ठगी की इस पटकथा की शुरुआत होती है वर्ष 2021 में। करुणा के साथ पढ़ने वाले चंद्रपुर निवासी आनंद देवांगन ने उसे अपने ‘पहचान के भैया’ विवेक कुमार शर्मा (निवासी शांतिनगर, भिलाई) से मिलवाया। आनंद ने एक दोस्त होने का फायदा उठाया और करुणा के दिमाग में यह बात डाली कि विवेक मंत्रालय में बड़े पद पर है और उसके फूफा ‘आशीष शर्मा’ एक जिले के कलेक्टर हैं। रायपुर रोड, सारंगढ़ के एक कैफे में हुई उस मीटिंग में विवेक ने बड़े ही आत्मविश्वास से कहा, “मैं किसी भी विभाग में तुम्हारा चयन करवा दूंगा.. मंडी इंस्पेक्टर का पद तुम्हारे लिए पक्का है, बस 7.40 लाख रुपये लगेंगे।” जब करुणा ने इतनी बड़ी रकम देने से मना किया, तो उसके दोस्त आनंद ने भावनात्मक कार्ड खेला। उसने कहा- “मैं तेरा दोस्त हूँ, तुझे झूठे में थोड़ी फंसाऊंगा। मुझ पर भरोसा कर।” और यहीं से करुणा इस दलदल में धंसती चली गई।

गहने रखे गिरवी, किश्तों में लुटती रही गाढ़ी कमाई:

नौकरी की उम्मीद में करुणा ने 18 मई 2021 को अपने गहने गिरवी रखे और पहली किश्त के रूप में 1,15,000 रुपये विवेक शर्मा के ICICI बैंक खाते में डाल दिए। ठगों की भूख यहीं शांत नहीं हुई। इसके बाद:

• 05 जून 2021: 2 लाख रुपये चेक के माध्यम से (वीरेंद्र सिंह ठाकुर के खाते से) विवेक के खाते में भेजे गए।

• 12 जुलाई 2021: 25 हजार रुपये फिर विवेक के खाते में ट्रांसफर हुए।

21 अक्टूबर 2021: वीरेंद्र ठाकुर के ‘फोन-पे’ नंबर पर 25-25 हजार करके तीन बार में 75 हजार रुपये भेजे गए।

जब भी करुणा नौकरी की प्रोसेस पूछती, विवेक और आनंद उसे “काम बस हो ही रहा है” का झुनझुना पकड़ा देते।

घर आकर ‘गारंटी’ का नाटक और 3 लाख की नकद वसूली:

ठगों के हौसले इतने बुलंद थे कि 14 जुलाई 2022 को विवेक शर्मा अपने एक अन्य साथी कुंजबिहारी पटेल (निवासी घुघुवा) के साथ सीधे करुणा के घर लालाधुर्वा पहुंच गया। उन्होंने परिवार वालों को भरोसे में लेते हुए एक नई कहानी रची- “तुम्हारा लिस्ट में नाम आ गया है, बस 3 लाख रुपये और लगेंगे, नौकरी पक्की।”

कुंजबिहारी पटेल ने परिवार को पूरी गारंटी दी। बेटी का नाम लिस्ट में आने की बात सुनकर परिवार वालों ने जैसे-तैसे आकस्मिक स्थिति में 3 लाख रुपये नकद की व्यवस्था की और गवाहों (दुष्यंत पाणिग्राही और गौतम यादव) के सामने यह रकम ठगों के हाथों में सौंप दी।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में कैद है फरेब, अब खाकी करेगी हिसाब:

समय बीतता गया। न अपॉइंटमेंट लेटर आया और न ही मंडी इंस्पेक्टर की कुर्सी मिली। पैसे वापस मांगने पर विवेक शर्मा टालमटोल करने लगा। आखिरकार ठगी का अहसास होने पर करुणा ने हार नहीं मानी। उसने बैंक स्टेटमेंट, फोन-पे के स्क्रीनशॉट और सबसे अहम— ‘विवेक शर्मा और आनंद के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग (पेनड्राइव)’ को सबूत के तौर पर सारंगढ़ थाना कोतवाली में पेश कर दिया है।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 420 (धोखाधड़ी) और 34 (समान आशय) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। अब देखना यह है कि ‘मंत्रालय के फर्जी बाबू’ और ‘कलेक्टर के फर्जी भतीजे’ के हाथों में हथकड़ियां कब तक लगती हैं।

नोट: यह घटना उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो ‘शॉर्टकट’ या ‘पैसे देकर सेटिंग’ के जरिए सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। दलाल हमेशा आपके करीबियों (दोस्तों/रिश्तेदारों) का ही इस्तेमाल मोहरे के रूप में करते हैं।

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