रायगढ़ में चेट्रीचंड्र की धूम: सिंधी समाज जोर-शोर से मना रहा है झूलेलाल जयंती, सिंधी नववर्ष की शहर में शुरू हुई भव्य तैयारियां!
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रायगढ़ में चेट्रीचंड्र की धूम: सिंधी समाज जोर-शोर से मना रहा है झूलेलाल जयंती, सिंधी नववर्ष की शहर में शुरू हुई भव्य तैयारियां! (अपने विज्ञापन लगवाने के लिए संपर्क करें:.7898273316)







रायगढ़@टक्कर न्यूज :- सिंधी हिंदुओं का सबसे पवित्र और हर्षोल्लास भरा पर्व चेट्रीचंड्र (Cheti Chand) नजदीक आते ही रायगढ़ शहर में उत्साह की लहर दौड़ गई है। सिंधी समुदाय के लोग भगवान झूलेलाल की जयंती और सिंधी नववर्ष के स्वागत में जोर-शोर से तैयारियां कर रहे हैं। मंदिरों में साफ-सफाई, सजावट, झांकियां और शोभायात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं, जबकि घर-घर में बहाराना साहिब की सजावट और पूजा की रौनक छा रही है।
चेट्रीचंड्र क्यों मनाया जाता है?
यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा या द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है, जब पहली बार चंद्रमा दिखाई देता है (सिंधी भाषा में ‘चेत’ महीने का ‘चंड्र‘ यानी चंद्र दर्शन)। सिंधी समुदाय के लिए यह दिन हिंदू चंद्र नववर्ष का प्रथम दिन होता है। मुख्य रूप से यह भगवान झूलेलाल (जिन्हें उदेरोलाल, वरुणावतार या साईं झूलेलाल भी कहा जाता है) के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
किंवदंती के अनुसार, प्राचीन काल में सिंध प्रांत में मुस्लिम शासक मिरखशाह ने हिंदुओं पर अत्याचार किए और उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। तब सिंध के लोगों ने वरुण देव (जल के देवता) से प्रार्थना की। वरुण देव ने झूलेलाल के रूप में अवतार लिया और अत्याचारियों का नाश कर सिंधी हिंदू संस्कृति, धर्म और समाज की रक्षा की। इसलिए सिंधी समुदाय उन्हें अपना आराध्य देव और अपना भगवान मानता है। इस दिन समुद्र पूजा, जल पूजा और भगवान झूलेलाल की विशेष आराधना की जाती है, क्योंकि वे जल के देवता के अवतार माने जाते हैं।
रायगढ़ में क्या-क्या होगा?
सिंधी समाज की विभिन्न संस्थाएं और मंदिर समितियां भव्य शोभायात्रा, कीर्तन, भजन संध्या, चेज़ नृत्य, प्रसाद वितरण और आम लंगर का आयोजन कर रही हैं। कई जगहों पर झूलेलाल की प्रतिमा को रथ पर सजाकर शहर में घुमाया जाएगा। घरों में अखंड ज्योति जलाकर 40 दिनों का चालिहो व्रत भी रखा जा रहा है। पूरा शहर भक्ति और उत्साह से गूंज रहा है – “आयो लाल झूलेलाल!”
चेट्रीचंड्र न केवल एक त्योहार है, बल्कि एकता, भक्ति, सत्य और अहिंसा का प्रतीक है। यह पर्व सिंधी समुदाय को नई उम्मीद, समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है।
रायगढ़ वासियों को चेट्रीचंड्र और झूलेलाल जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!
जय झूलेलाल! आयो लाल झूले लाल!🙏



