RTO में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का संगठित रैकेट बेनकाब, बिना ट्रायल, फर्जी पते से ओडिशा के लोग बनवा रहे परमानेंट DL!!
कांग्रेस ने अधिकारी निलंबन व उच्चस्तरीय जांच की मांग की!!

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का एक बड़ा संगठित रैकेट बेनकाब हुआ है। पड़ोसी राज्य ओडिशा के सैकड़ों लोग यहां दलालों के जरिए फर्जी स्थानीय पते दिखाकर, बिना ड्राइविंग टेस्ट दिए आसानी से परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर रहे हैं। यह गंभीर खुलासा “टक्कर न्यूज” की विशेष पड़ताल में हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि न तो पुलिस वेरिफिकेशन हो रहा है और न ही पते का कोई स्थानीय सत्यापन।
रायगढ़ RTO के बाहर का नजारा किसी मेले जैसा है। सुबह से ही ओडिशा रजिस्ट्रेशन (OD) नंबर की दर्जनों मोटरसाइकिलें और कारें खड़ी रहती हैं। लंबी-लंबी कतारों में खड़े अधिकांश लोग ओडिशा के सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, बरगढ़ और बृजराजनगर इलाके के हैं। हाथों में आवेदन-पत्र और कागजात लिए ये लोग कैमरे के सामने बेखौफ कबूल करते हैं कि ओडिशा में ट्रायल बहुत सख्त है, बार-बार फेल हो जाते हैं, इसलिए दलालों के माध्यम से रायगढ़ में फर्जी पता लगाकर लाइसेंस बनवा रहे हैं।
बृजराजनगर (ओडिशा) निवासी किरण कुमार प्रधान ने फोन पर खुलकर कहा, “मैं रायगढ़ में कभी रहा ही नहीं। लाइसेंस में बैंक कॉलोनी, रायगढ़ का जो पता दिया है, वहां न मैं रहता हूं, न मेरा कोई परिचित रहता है बैंक कॉलोनी में। बस दलाल ने कहा था कि पता को मै अर्जेंट कर लूंगा, लाइसेंस बन जाएगा।” इसी तरह कई अन्य आवेदकों ने भी फर्जी पते की बात स्वीकारी। ज्यादातर फर्जी लाइसेंसों में रायगढ़ शहर की बैंक कॉलोनी, इंडस्ट्रियल एरिया, वार्ड नं.28, जमगांव, बूंदबूंद कॉलोनी जैसे इलाकों के मनगढ़ंत पते भरे जा रहे हैं।
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी माना सिंह ने भी इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “हमारे यहां अचानक ट्रायल में फेल होने वालों की संख्या बढ़ गई है। हमें रायगढ़ की प्रिंटमीडिया में चली खबर की जानकारी मिली थी कि लोग रायगढ़ जाकर डीएल बनवा रहे हैं। हमने उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया है, जल्द ही संयुक्त जांच और सख्त कार्रवाई होगी।”
दूसरी ओर, रायगढ़ के सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अमित कश्यप खबर चलते ही कार्यालय से नौ दो ग्यारह हो गए। उनसे बार-बार संपर्क करने पर भी फोन नहीं उठाया जा रहा। उनकी यह चुप्पी और अनुपस्थिति मिलीभगत की गहरी आशंका पैदा कर रही है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष नागेंद्र नेगी ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए कहा, “यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, सड़कों पर मौत बांटने का खतरनाक खेल है। अयोग्य चालकों को लाइसेंस थमाना दुर्घटनाओं को सीधा न्योता है। संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित कर पूरे रैकेट की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।”
स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन भी रोष में हैं। उनका कहना है कि फर्जी लाइसेंस से सड़क सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं के लिए ऐसे अयोग्य चालक जिम्मेदार होंगे। लोग दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों व दलालों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब गेंद छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग और रायगढ़ जिला प्रशासन के पाले में है। जनता बेसब्री से इंतजार कर रही है कि इस संगठित रैकेट के खिलाफ कितनी सख्त, त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की जाती है। सवाल यह भी है कि आखिर कब तक सड़क सुरक्षा को दांव पर लगाकर भ्रष्टाचार का यह खेल चलता रहेगा? बरहाल अब देखना यह है क्या उचिस्तारिय जांच होती है? क्या दोषी अधिकारियों पर क्या 420 का मामला दर्ज होगा की नहीं? बरहाल आगे की अपडेट के लिए बने रहे टक्कर न्यूज के साथ!!(सो.हिंदी दैनिक खबर सार अखबार)



