रायगढ़

हत्या जांच में हुआ दूसरा कत्ल? रमेश चौहान की पुलिस थाने में मौत, कांग्रेस ने सरकार को घेरा – उच्च स्तरीय जांच की मांग!!

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रायगढ़/खरसिया :- एक तरफ 3 हजार रुपये के लेन-देन में दोस्त ने ही दोस्त का खून कर डाला, दूसरी तरफ जांच के नाम पर पुलिस थाने में बुलाए गए निर्दोष ग्रामीण की हिरासत के बाद मौत… छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया में अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार हो रही है। परासकोल गांव के 45 वर्षीय रमेश चौहान की रायपुर के डीकेएस अस्पताल में इलाज के दौरान मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। परिवार का रो-रोकर एक ही आरोप—थाने में बर्बर मारपीट, जिससे दिमाग में भारी रक्तस्राव (इंट्रापैरेन्काइमल हेमरेज) हो गया और मौत हो गई।

कैसे शुरू हुई पूरी त्रासदी:

सबसे पहले 1 मार्च की रात परासकोल गांव के खेत में 35 वर्षीय अनिल कुमार चौहान का खून से लथपथ शव मिला। धारदार हथियार से गले, सीने, पेट पर कई वार—साफ था, यह अंधाधुंध हत्या थी। पुलिस ने जांच शुरू की तो 3 हजार रुपये उधार के विवाद में दोस्त राहुल यादव ने ही अनिल की हत्या की बात कबूल ली और गिरफ्तार हो गया। लेकिन जांच के सिलसिले में पुलिस ने कई ग्रामीणों को पूछताछ के लिए बुलाया, जिसमें रमेश चौहान भी शामिल थे, क्योंकि हत्या की रात उन्हें मृतक के साथ देखा गया था।

2 मार्च को दिनभर पूछताछ के बाद रमेश घर लौट आए। अगले दिन 3 मार्च सुबह फिर थाने बुलाए गए। परिवार का कहना है—रमेश पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन कुछ घंटों बाद सरपंच को फोन आया कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है। अस्पताल पहुंचे तो एक तरफ लकवा मार चुका था, बोल नहीं पा रहे थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बेरहमी से पीटा, सिर पर चोट लगी जिससे ब्रेन हेमरेज हो गया।

पुलिस का दावा vs परिवार का गुस्सा

एसडीओपी प्रभात पटेल ने वीडियो बयान में कहा—रमेश आदतन शराबी थे, नशे में थाने आए थे, तबीयत बिगड़ी तो तुरंत अस्पताल भेजा। मारपीट के आरोप बेबुनियाद हैं। लेकिन डेथ सर्टिफिकेट ने पुलिस की थ्योरी को धराशायी कर दिया। रायपुर डीकेएस अस्पताल ने मौत का कारण इंट्रापैरेन्काइमल हेमरेज (दिमाग के अंदरूनी हिस्से में भारी रक्तस्राव) बताया। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसी स्थिति या तो सिर पर गंभीर चोट से या अचानक भयंकर तनाव/डर से ब्लड प्रेशर बढ़ने पर होती है। परिवार चिल्ला रहा है—यह पुलिस टॉर्चर का नतीजा है!

आक्रोश की चरम सीमा: NH-49 पर चक्काजाम

मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण, चौहान समाज और परिजन सड़क पर उतर आए। NH-49 पर चक्काजाम कर दिया। गुस्साए लोगों ने पुलिस पर 7-8 अन्य ग्रामीणों को भी पीटने का आरोप लगाया। विधायक उमेश पटेल मौके पर पहुंचे, एसडीएम प्रवीण तिवारी और एसडीओपी से बात की। परिजनों की मांग—दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई, मुआवजा और रमेश की पत्नी को कलेक्टर दर पर सरकारी नौकरी। एसडीएम ने मजिस्ट्रियल जांच, थाना प्रभारी को लाइन अटैच करने और मुआवजा-नौकरी के आवेदन उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। तब जाकर चक्काजाम हटा।

अब सवाल यह है:

क्या यह हिरासत में मौत का मामला है? क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस की सफाई को बचाएगी या परिवार के आरोपों को पुख्ता करेगी? कांग्रेस ने उच्चस्तरीय जांच की मांग कर दी है। खरसिया का यह मामला अब सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि पुलिस सुधार और मानवाधिकार का बड़ा सवाल बन चुका है। जांच के नतीजे तय करेंगे—खाकी की छवि धूमिल होगी या न्याय की मिसाल बनेगी।

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