रायगढ़: बूढ़ी माई मंदिर का तालाब कचड़े का ढेर, सफाई फंड गायब, नशेड़ियों का राज – निगम और पुलिस की चुप्पी पर सवाल!!

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निगम और पुलिस की चुप्पी पर सवाल!!

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर में ऐतिहासिक बूढ़ी माई मंदिर के पीछे स्थित तालाब अब एक बदबूदार कचड़े का अड्डा बन चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हर साल लाखों रुपये की सफाई फंड आते हैं, लेकिन न तो सफाई होती है और न ही फंड का कोई हिसाब-किताब। दिन में मंदिर की घंटियां बजती हैं, लेकिन शाम ढलते ही नशेड़ियों की गाली-गलौज और ड्रग्स का कारोबार शुरू हो जाता है। पुलिस की पेट्रोलिंग सिर्फ दिखावा है, और कोतवाली पुलिस कार्यवाही करने से कतराती है। क्या यह नशेड़ियों का डर है या ऊपरी स्तर का संरक्षण?

मंदिर के आसपास रहने वाले एक स्थानीय निवासी, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बात की, ने बताया, “यह तालाब कभी शहर की शान थी, लेकिन अब कचड़े, प्लास्टिक और गंदगी से भरा पड़ा है, मलमा भी फेक जा रहा है। हर साल लाखों रुपये सफाई के नाम पर आते हैं, लेकिन पैसा कहां जाता है, किसी को पता नहीं। अधिकारी कहते हैं फंड आवंटित हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं दिखता, वापस या कही और।” उन्होंने आगे कहा कि तालाब की दुर्गति से मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, जो आसपास के मोहल्लों को प्रभावित कर सकता है।

सुबह के समय मंदिर में भक्तों की भीड़ लगती है, जहां घंटियों की आवाज से शांति का एहसास होता है। लेकिन शाम होते ही सीन बदल जाता है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के पास कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गांजा, दारू और यहां तक कि बैटरी इंजेक्शन (सिंथेटिक ड्रग्स) खुलेआम बेचे जाते हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “नशेड़ी यहां बैठकर गाली-गलौज करते हैं, और बच्चों-महिलाओं को डर लगता है। पुलिस की गाड़ी आती है, लेकिन सिर्फ घूमकर चली जाती है। क्या उन्हें डर है या कोई सेटिंग है?”

कोतवाली पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि वे कार्यवाही करने से बचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। एक स्थानीय ने सवाल उठाया, “पुलिस खुद वहां जाने से डरती है। अगर नशेड़ियों का डर है, तो क्या शहर की सुरक्षा खतरे में है? या फिर कोई बड़ा खेल चल रहा है, जहां पुलिस का संरक्षण मिला हुआ है?”

थाना प्रभारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फोन पर पक्ष लेने पर कॉल रिसीव नहीं किया गया ना किसी प्रकार का किसी प्रकार से अपना पक्ष रखना गया उनके द्वारा। रायगढ़ नगर निगम की से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मिलकर पक्ष जानना चाहा पर मुलाकात नहीं हुई काफी देर इंतज़ार करना पड़ा। पर्यारवरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तालाब की सफाई न हुई, तो यह शहर के जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।

यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन रहा है। विपक्षी नेता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह सिर्फ एक तालाब की बात नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा और विकास की है। अगर नगर निगम और पुलिस जागे नहीं, तो जनता को सड़क पर उतरना पड़ेगा।”

रायगढ़ के निवासियों की मांग है कि तत्काल तालाब की सफाई हो, ड्रग्स के कारोबार पर रोक लगे और पुलिस की जवाबदेही तय की जाए। क्या प्रशासन इस ‘तगड़े’ मुद्दे पर कार्रवाई करेगा, या यह सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा? जांच जारी है।

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