मांड नदी रो रही है, रेत माफिया हंस रहे हैं! डेराडीह में खुलेआम लूट, प्रशासन की आंखें बंद, राज्य को अरबों का चूना!
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मांड नदी रो रही है, रेत माफिया हंस रहे हैं! डेराडीह में खुलेआम लूट, प्रशासन की आंखें बंद, राज्य को अरबों का चूना!
खरसिया/टक्कर न्यूज@मंगलेश डनसेना :- छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा मांड नदी अब मौत के मुंह में खड़ी है! खरसिया तहसील के ग्राम पंचायत नंदगांव के आश्रित गांव डेराडीह में रेत माफियाओं ने नदी का गर्भ चीर-चीरकर खोखला कर दिया है। दिन-रात सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा कभी मशीनें लगातार रेत लूट रही हैं – बिना किसी रोक-टोक के! यह रेत सिर्फ आसपास के गांवों में नहीं, बल्कि सक्ती जिले तक पहुंच रही है, जबकि राज्य का खजाना खाली हो रहा है और आने वाली पीढ़ियां बाढ़-भूस्खलन की मार झेलने को मजबूर होंगी!

माफियाओं का खुला राज: 100+ ट्रैक्टर रोज, कोई डर नहीं!
डेराडीह रेत घाट अब माफियाओं का किला बन चुका है। सुबह से रात तक ट्रैक्टरों की कतारें, मशीन का शोर, और रेत की लूट – सब कुछ खुलेआम! हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि खरसिया ब्लॉक में ही रोजाना 100 से ज्यादा ट्रैक्टर रेत निकाल रहे हैं। नदी का पर्यावरण तबाह, मछलियां लुप्त, किनारे के खेत बर्बाद, और बाढ़ का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है।
‘छापेमारी’ का नाटक: 10 ट्रैक्टर पकड़े, पहुंचे तो सिर्फ 6!
माइनिंग विभाग ने हाल ही में डेराडीह में छापा मारा – दावा किया कि 9-10 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गईं। लेकिन विश्वसनीय सूत्रों का खुलासा चौंकाने वाला है: जब्त वाहन जोबी चौकी पहुंचे तो जादू हो गया – संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई! बाकी कहां गायब? कौन ले गया? यह साफ है – यह महज लीपापोती और साख बचाने का ढोंग था! माफियाओं को कोई खास नुकसान नहीं, बल्कि हौसला और मिला।

राज्य को लाखों का नुकसान, परिवारों का भविष्य दांव पर!
– पर्यावरणीय आपदा: नदी सूख रही है, भूजल स्तर गिर रहा है, बाढ़ का खतरा बढ़ा।
– आर्थिक चूना: राज्य को हजारों – लाखों की रॉयल्टी की चोरी हर साल!
– स्थानीय तबाही: खेती बर्बाद, मछली पालन खत्म, किनारे के गांवों में भूस्खलन का डर।
– कानून का मजाक: माफिया खुले आम राज कर रहे, ईमानदार अधिकारी-ग्रामीण डरे हुए!
नई रेत नीति 2025 के बावजूद क्यों जारी है काला कारोबार?
सरकार ने छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम-2025 लागू किया, ऑनलाइन नीलामी का ढोल पीटा, लेकिन जमीन पर हालात वही पुराने! डेराडीह जैसी जगहों पर अवैध खनन जारी। क्या विभाग में मिलीभगत? क्या माफियाओं को ऊपर से संरक्षण? ग्रामीण चीख-चीखकर पूछ रहे हैं – कब तक चलेगा यह काला खेल?
जनता की मांग अब और सख्त:
– उच्च स्तरीय SIT जांच हो!
– दोषी माफिया और संरक्षक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई!
– मांड नदी को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी रोक!
अगर अब भी आंखें मूंदी रहीं तो मांड नदी सिर्फ रेत का गड्ढा बन जाएगी – और आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी: कहां गया हमारा पानी, हमारी नदी?
(प्रशासन जागो… वरना माफिया राज चलेगा, और छत्तीसगढ़ रोता रहेगा!)



