आदिवासी बच्चों का मुंह का निवाला लूटा: रायगढ़ आश्रम में 7 लाख+ का शिष्यवृत्ति घोटाला, संस्था अध्यक्ष-पत्राचार्य फर्जी बिल से जेबें भरीं का आरोप!!
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आदिवासी बालक आश्रम सलखिया में सात लाख से ज्यादा की छात्रवृत्ति गबन का सनसनीखेज खुलासा!!
रायगढ़@टक्कर न्यूज :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड में स्थित बालक आश्रम सलखिया में आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति राशि में बड़े पैमाने पर गबन का मामला सामने आया है।
आकस्मिक निरीक्षण में पाई गई अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सत्र 2023-2024 और 2024-2025 में करीब 7 लाख 21 हजार 471 रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। जांच में फर्जी वाउचर, सामग्री की खरीदी दिखाकर वितरण न करना और मेस संचालन में धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आश्रम का संचालन आर्य विद्या सभा सलखिया के अध्यक्ष जोगी राम भोय और प्राचार्य दिलीप कुमार सोनी द्वारा किया जा रहा था, जबकि शासकीय नियमों के विपरीत मेस और सामग्री खरीदी का पूरा नियंत्रण उनके पास था। पूर्व अधीक्षक आनन्द राम भगत और वर्तमान अधीक्षक लक्ष्मीनारायण साहू के बयानों से स्पष्ट हुआ कि छात्रवृत्ति की राशि आहरण तो अधीक्षक से कराया जाता था, लेकिन फर्जी रिकॉर्ड बनवाकर राशि का उपयोग संस्था अध्यक्ष और प्राचार्य करते थे।
मुख्य अनियमितताएं जो जांच में पाई गईं:
– टी-शर्ट, ट्रैक सूट, बैग, जैकेट जैसी सामग्री की लाखों रुपये की खरीदी दिखाई गई, लेकिन छात्रों को वितरण नहीं किया गया। जांच के दौरान ही कुछ सामग्री जबरन भंडार से निकालकर बांटी गई।
– बचत राशि का वितरण बच्चों को नहीं किया गया, जबकि वाउचर में दिखाया गया।
– मसाला, तेल, हल्दी, मिर्च और दाल की खरीदी में कई गुना ज्यादा मात्रा दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए।
– लकड़ी खरीदी में भी भारी अनियमितता – दो साल में 2.95 लाख रुपये की खरीदी दिखाई गई, जबकि वास्तविक खपत इससे बहुत कम थी।
– छात्रों से सेवा शुल्क के नाम पर 5000-6000 रुपये वसूले जाने के आरोप, जिसकी रसीदें भी मिलीं।
जांच टीम में तहसीलदार शिवम पाण्डे और मंडल संयोजक धर्मेन्द्र बैस शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि शासन के मेनू, कर्मचारी नियुक्ति और व्यय के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। आश्रम में केवल एक रसोईया मिला, जबकि नियम के अनुसार पांच होने चाहिए।
शिकायतकर्ता पंकज भोय ने जांच अधिकारियों से संतुष्टि जताते हुए गहन जांच और रिपोर्ट की प्रति मांगी है। उन्होंने गुणवत्ता रहित भोजन और सामग्री वितरण न होने की भी शिकायत की।
आदिवासी विकास विभाग की यह रिपोर्ट अब उच्च अधिकारियों को सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें एफआईआर और निलंबन शामिल हैं। आदिवासी छात्रों के हक में हो रहे इस घोटाले ने इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि दोषी संस्था अध्यक्ष और प्राचार्य पर तुरंत कानूनी शिकंजा कसा जाए।
यह मामला आदिवासी छात्रावासों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलता है, जहां गरीब बच्चों का हक मारकर निजी लाभ लिया जा रहा है।



