सलाखों के बीच भी उजाला फैला! रायगढ़ जेल में 66 कैदियों ने लिखी साक्षरता की नई इबारत, बुजुर्गों ने भी दिखाया जोश!!
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जन-जन साक्षर अभियान के तहत उल्लास नवभारत महापरीक्षा में जेल सुपरिटेंडेंट बोले- “शिक्षा से बदलाव की कोई उम्र नहीं, कोई दीवार नहीं”







रायगढ़@टक्कर न्यूज :- सलाखों के पीछे बंद कैदियों ने आज साबित कर दिया कि शिक्षा की रोशनी किसी जेल की चारदीवारी से नहीं रुकती। जिला जेल रायगढ़ में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की “जन-जन साक्षर” महापरीक्षा के तहत 66 बंदियों ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान की परीक्षा में हिस्सा लिया।
इनमें 47 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल थीं, जबकि 7 बुजुर्ग (60 वर्ष से अधिक उम्र) कैदियों ने भी कलम उठाकर समाज को संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। कुल 66 कैदियों ने इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनकर अपनी जिंदगी में नई शुरुआत की कोशिश की।
जेल सुपरिटेंडेंट गोवर्धन सिंह खोरी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि कैदियों के अंदर छिपी संभावनाओं को जगाने का मौका है। शिक्षा से वे समाज में बेहतर इंसान बनकर लौट सकते हैं।” वही सहायक जेल अधीक्षक शोभा रानी ने महिला कैदियों के बीच जाकर उनका हौसला बढ़ाया।
शिक्षा विभाग के डीपीओ डी.के. वर्मा और निरीक्षण प्रमुख वीर सिंह ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण रायगढ़ के तहत यह परीक्षा पूरे जिले में उत्साह के साथ हो रही है, लेकिन जेल में कैदियों का उत्साह देखकर सभी प्रभावित हुए।
छत्तीसगढ़ में चल रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मकसद 15 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को बुनियादी पढ़ाई-लिखाई और गिनती का ज्ञान देना है। रायगढ़ जेल का यह छोटा-सा लेकिन बड़ा कदम साबित करता है कि अंधेरे कोने में भी उम्मीद की किरण बाकी रहती है।
शिक्षा = दूसरा मौका – यह मैसेज आज रायगढ़ जेल से पूरा छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया।



