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मंत्रालय और अपर कलेक्टर के नाम का इस्तेमाल, क्या सिंडिकेट के तार और ऊंचे हैं?

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खाकी की थ्योरी में उलझा ‘जॉब सिंडिकेट’: एक ही चेहरा, कहीं फरियादी तो कहीं आरोपी; क्या पुलिस को अंधेरे में रख रहा है कुंजबिहारी? 

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर चल रही ठगी की एक बड़ी साजिश सामने आई है। दो अलग-अलग थानों में दर्ज FIR से साफ हो गया है कि एक ही गिरोह ने कम से कम 27 लाख 44 हजार रुपये की ठगी की है। लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि पुसौर थाने में पीड़ित बताने वाला कुंजबिहारी पटेल, सारंगढ़ थाने में आरोपी बन चुका है। वह खुद विवेक कुमार के साथ पीड़िता करूणा पटेल के घर जाकर 3 लाख रुपये नकद लेकर “नौकरी हो जाएगी” की गारंटी देता है।

पुलिस की विवेचना पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं – पुसौर पुलिस ने कुंजबिहारी को पीड़ित मानकर केवल सीतेश और विवेक पर FIR क्यों दर्ज की? क्या सारंगढ़ पुलिस ने असली सच्चाई पकड़ ली है? या पूरा रैकेट किसी बड़े अधिकारी के नाम का सहारा लेकर चल रहा था? तीनों आरोपी अभी भी फरार हैं और दोनों थाने चुप्पी साधे हुए हैं।

पुसौर थाना (जिला रायगढ़) – FIR में दर्ज ठगी!!

ग्राम घुघवा निवासी कुंजबिहारी पटेल ने 22 जनवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई। आरोप:

– गोपालपुर चंद्रपुर के दुर्गा पाणिग्राही के पुत्र सीतेश पाणिग्राही और विवेक कुमार ने मंत्रालय में अपर कलेक्टर रिश्तेदार होने का झांसा देकर ठगी की।

– कुंजबिहारी से 8,27,000 रुपये (जमीन बेचकर 4,58,300 + बाद में 3,69,000)

– मुन्ना प्रसाद डनसेना से 3,77,000 रुपये

– देवकुमार पटेल से 8,00,000 रुपये

कुल: 20,04,000 रुपये

सीतेश ने अपना भाई का जॉइनिंग लेटर दिखाया। बाद में तीनों पीड़ितों को दुर्ग ले जाकर विवेक कुमार ने चेक दिए, जो बाउंस हो गए। थाना पुसौर ने धारा 420, 34 भादवि के तहत अपराध कायम कर विवेचना शुरू की।

सारंगढ़ कोतवाली (जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़) – दूसरी FIR!!

ग्राम लालाधुर्वा निवासी करूणा पटेल (29 वर्ष, बीएड छात्रा) ने लिखित शिकायत में बताया कि विवेक कुमार शर्मा (भिलाई, शांति नगर) ने आनंद देवांगन के जरिए परिचय कराया और मंडी इंस्पेक्टर की नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। कुल 7,40,000 रुपये ठगे गए।

भुगतान का विवरण: 

– 18.05.2021 को 1,15,000 रुपये (गहने गिरवी रखकर) ICICI खाते में

– 05.06.2021 को 2 लाख रुपये चेक से

– फोन-पे से 1 लाख रुपये (चार किस्तों में)

– 14 जुलाई 2022 को विवेक कुमार कुंजबिहारी पटेल के साथ करूणा के घर पहुंचा, परिवार को गारंटी दी और नकद 3 लाख रुपये ले लिया। गवाह मौजूद।

करूणा के पास ऑडियो रिकॉर्डिंग, चेक की छायाप्रति और फोन-पे स्क्रीनशॉट सुरक्षित हैं। थाने ने धारा 420, 34 भादवि में FIR दर्ज कर मजिस्ट्रेट को सूचना भेज दी। आरोपी: विवेक कुमार शर्मा + आनंद देवांगन।

दोनों FIR में कॉमन लिंक और गंभीर सवाल!!

– विवेक कुमार दोनों मामलों में मुख्य आरोपी।

– कुंजबिहारी पटेल पुसौर में पीड़ित, सारंगढ़ में सह-अरोपी।

– कुल ठगी: 27,44,000 रुपये

– तीन गांवों के युवा-युवतियां बर्बाद।

क्या कुंजबिहारी पहले ठगा गया और बाद में गैंग में शामिल हो गया? या वह शुरू से ही साजिश का हिस्सा था? पुसौर पुलिस ने क्यों इस महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज किया? क्या दोनों थानों के बीच समन्वय की पूरी कमी है?

पुलिस की निष्क्रियता चिंताजनक!!

दोनों FIR दर्ज होने के बावजूद सीतेश पाणिग्राही, विवेक कुमार शर्मा और आनंद देवांगन आज भी फरार हैं। न गिरफ्तारी, न छापेमारी, न बैंक खातों पर रोक। पीड़ित थानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य।

पीड़ितों की स्थिति!!

करूणा पटेल कहती हैं, “मैंने गहने गिरवी रखे, परिवार ने 3 लाख दिए। अब टालमटोल हो रहा है।”

कुंजबिहारी पटेल का दावा है कि वह भी ठगा गया, लेकिन अब उल्टा आरोपी बनाया जा रहा है।

यह मामला केवल दो FIR का नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी के नाम पर चल रही एक बड़ी ठगी सिंडिकेट का है। मंत्रालय और कलेक्टर के नाम का दुरुपयोग हो रहा है। अगर पुलिस तुरंत कार्रवाई नहीं करती तो यह सिलसिला और फैलेगा।

अब प्रशासन को जवाब देना होगा

– पुसौर विवेचना गलत दिशा में तो नहीं जा रही?

– सारंगढ़ पुलिस ने कुंजबिहारी को आरोपी क्यों नहीं बनाया?

– क्या एसपी स्तर पर संयुक्त जांच की जाएगी?

अखबार की अपील!!

जिनके साथ भी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी हुई हो, वे तुरंत लिखित शिकायत दर्ज कराएं। ऑडियो, चेक, बैंक डिटेल सुरक्षित रखें। पीड़ित एकजुट हों, तभी गैंग का पर्दाफाश होगा।

युवाओं का भविष्य दांव पर है। पुलिस और प्रशासन जागे, वरना यह ठगी का खेल जारी रहेगा।

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