रायगढ़ जिला जेल में नवरात्रि की दिव्य भक्ति: 43 पुरुष और 15 महिला कैदियों ने रखा कठोर उपवास, मां दुर्गा के चरणों में मांगी क्षमा और नई जिंदगी की दुआ!!
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रायगढ़ जिला जेल में नवरात्रि की दिव्य भक्ति: 43 पुरुष और 15 महिला कैदियों ने रखा कठोर उपवास, मां दुर्गा के चरणों में मांगी क्षमा और नई जिंदगी की दुआ!!







रायगढ़@टक्कर न्यूज :- जहां लोहे की सलाखों के पीछे सजा काट रहे कैदियों की जिंदगी अंधेरे और पछतावे से भरी होती है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला जेल में इन दिनों एक अलग ही आलोक फैला हुआ है। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां की दीवारों के भीतर मां दुर्गा की भक्ति का ऐसा माहौल है कि देखने वाला भाव-विभोर हो जाता है। इस बार 43 पुरुष कैदी और 15 महिला कैदियों ने पूरे नौ दिनों का कठोर उपवास रखा है। वे न केवल फलाहार पर रहकर मां अंबे की आराधना कर रहे हैं, बल्कि अपने किए अपराधों के लिए आंसू बहाकर क्षमा भी मांग रहे हैं।
जेल के बैरक में ही कलश स्थापित किए गए हैं। अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित है। सुबह-शाम भजन-कीर्तन की मधुर धुनें गूंज रही हैं। कैदी हाथ जोड़कर मां के सामने नतमस्तक होकर प्रार्थना कर रहे हैं – “हे मां! हमें गलत रास्ते पर चलने की सजा मिली, अब हमें सही मार्ग दिखा, नई शुरुआत का आशीर्वाद दे।” कई कैदियों की आंखें नम हैं, आवाज कांप रही है। वे बताते हैं कि यह उपवास सिर्फ शरीर का नहीं, मन का भी शुद्धिकरण है। जेल की कठोर जिंदगी में यह नौ दिन उनके लिए आशा की किरण बन गए हैं।
जेल अधीक्षक ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी जेल प्रशासन ने व्रत रखने वाले कैदियों के लिए विशेष व्यवस्था की है। अलग बैरक में पूजा स्थल बनाया गया है। फल, दूध, साबूदाना, आलू, केला जैसी फलाहारी सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। महिला कैदियों के लिए अलग से पूजा की सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। प्रशासन का कहना है कि धर्म और आस्था के प्रति सम्मान जेल नियमों का हिस्सा है, और कैदियों की इस भक्ति से उनके सुधार की प्रक्रिया को बल मिलता है।
एक महिला कैदी ने भावुक होकर कहा, “बहनों-बेटियों की तरह मां दुर्गा को याद करके लगता है जैसे घर की याद आ रही हो। यह उपवास हमें सिखा रहा है कि गलती इंसान से होती है, लेकिन सुधार भी उसी से होता है। मां से बस यही प्रार्थना है कि बाहर निकलकर हम समाज का भला करें।”
पुरुष कैदियों में से एक ने बताया, “जेल में समय बीतना मुश्किल होता है, लेकिन नवरात्रि के इन दिनों में मां की भक्ति ने मन को शांति दी है। हम सब मिलकर जय माता दी के नारे लगाते हैं, और लगता है जैसे सारी पीड़ा कम हो गई हो।”
यह दृश्य सिर्फ एक जेल की खबर नहीं, बल्कि मानव मन की उस गहराई को दर्शाता है जहां पाप के बाद भी पश्चाताप और भक्ति का प्रकाश बाकी रहता है। रायगढ़ जिला जेल के इन 58 कैदियों (43 पुरुष + 15 महिला) ने साबित कर दिया है कि सलाखों के पीछे भी आस्था जिंदा है, उम्मीद जिंदा है, और बदलाव की चाहत जिंदा है।
मां दुर्गा की कृपा से इन कैदियों को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शक्ति मिले, और वे जीवन में नया सवेरा देख सकें – यही सबकी कामना है।



