पेय जल की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण
शिकायत के ऊपर शिकायत करने के बाद भी विभागीय अधिकारी मौन आखिर क्यों?

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रिपोर्टर – अजय प्रधान

जीपीएम – जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत पीपरडोल में ग्रामीणों को प्रधान मंत्री नल जल योजना से पीने का पानी तो नहीं मिल पा रहा । लेकिन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों को ग्राम पंचायत पिपरडोल की तरह न जाने कितने आदिवासी बाहुल्य गाँव होंगे जहां अनुमान से ज्यादा भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का लाभ अवश्य मिलता होगा । तभी तो विभाग में शिकायत करने के बावजूद भी  अधिकारी कोई ठोस कदम उठाने से पहले ही लड़खाने लगते हैं। ठेकेदार को कार्य पूर्ण के पहले ही 90% राशि विभाग द्वारा प्रदान कर दिया जाता है जिसमें विभाग का भी तो कुछ हिस्सेदारी मिलना लाजमी ही होगा।
अन्यथा कार्य पूर्ण किए बिना व उच्च अधिकारियों और विभागीय इंजीनियर द्वारा बिना  निरीक्षण व सफल परीक्षण के ही विभाग द्वारा ठेकेदारों को 90% भुक्तान करना शायद ही संभव हो पाता ।
ग्रामीणों की समस्या से उच्च अधिकारियों को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि कुछ दिन पहले ही ठेकेदार के मुंशी ने विभाग की पूरी पोल खोल दी थी।

दरअसल मामला पीपरडोल बांधा टोला का है। जहां पर पूरे मोहल्ले वाले लोगों को पीने के पानी की समस्या कई महीने से हो रही है। सिर्फ नाम के लिए ही सौर पैनल स्ट्रक्चर बना है  । जहां का मेन सप्लाई पाइप लाइन इतना पतला है कि टैंक में पानी भर ही नहीं पाता। साथ ही ठेकेदार महोदय विगत कई हफ्तों से पाइप लाइन गढ्ढा तो हर जगह ईमानदारी से करा देते हैं। लेकिन उसे समतल कराना भूल ही जाते हैं
मोहल्ले वालों के आक्रोश की वजह पेय जल ही नहीं बल्कि सप्लाई लाइन गड्ढे में बुजुर्ग  बच्चों और जानवरों के आए दिन गिरने से है।

“””विभागीय अधिकारी को  शिकायत से कोई मतलब नहीं रहता क्योंकि उन्हें भली -भांति ज्ञात है; ग्रामीण आदिवासीयों का प्रतिनिधित्व न तो कोई मजबूत जन प्रतिनिधि करता न उच्च स्तर के अधिकारी ।

देखने वाली बात होगी विभागीय अधिकारी इसे संज्ञान में कब तक ले रही है।

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