मांड नदी में मजदूर की मौत के बाद ‘सिस्टम’ का खेल: एफआईआर में जॉन डियर, तो असलियत में महिंद्रा ट्रैक्टर; क्या किसी रसूखदार को बचाने की हो रही थी कोशिश?

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एक मौत, दो ट्रैक्टर और गहराता रहस्य: धरमजयगढ़ पुलिस की जांच पर खड़े हुए गंभीर सवाल!!

रायगढ़/धरमजयगढ़@TAKKAR न्यूज :- धरमजयगढ़ क्षेत्र के मांड नदी में हुई एक मजदूर की मौत ने खाकी और खनन माफिया के गठजोड़ पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। 29 अप्रैल को मांड नदी के खम्हार रोड किनारे एक दर्दनाक हादसे में मजदूर सहेसराम मांझी की मौत हो गई। शुरुआती जांच और पुलिसिया दस्तावेजों में इसे महज एक ‘हादसा’ बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे जांच की परतें खुल रही हैं, मामला किसी बड़ी साजिश या जांच में भारी लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।

एफआईआर की कहानी: जॉन डियर और ‘गायब’ ड्राइवर

थाना धरमजयगढ़ में दर्ज मर्ग क्रमांक 45/2026 (धारा 194 BNSS) के अनुसार, घटना स्थल पर ‘जॉन डियर’ ट्रैक्टर बताया गया है। पुलिसिया रिपोर्ट कहती है कि हाइड्रोलिक पाइप फटने से ट्रॉली गिरी और सहेसराम की मौत हो गई। लेकिन इस पूरी एफआईआर में सबसे चौंकाने वाला तथ्य ‘चालक’ का जिक्र न होना है।

सवाल यह है कि:

• आखिर उस वक्त ट्रैक्टर कौन चला रहा था?

• यदि चालक मौके से भाग गया था, तो एफआईआर में उसे ‘अज्ञात’ क्यों नहीं दर्शाया गया?

• क्या पुलिस ने बिना मौके की तस्दीक किए और बिना चश्मदीदों से सही पूछताछ किए ही एफआईआर दर्ज कर ली?

सोशल मीडिया के वीडियो ने पलटा पासा:

पुलिस की कागजी कार्रवाई उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में स्पष्ट रूप से ‘महिंद्रा ट्रैक्टर’ नजर आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह ट्रैक्टर जमरगी (डी) में पदस्थ एक शिक्षक फुलजेन्श मिंज का है, जो अवैध रूप से मांड नदी से रेत का उत्खनन करवा रहा था।

हैरानी की बात यह है कि घटना के दो दिनों तक पुलिस ‘जॉन डियर’ ट्रैक्टर को जब्त कर अपनी पीठ थपथपाती रही, लेकिन जैसे ही वीडियो सामने आया और दबाव बढ़ा, अचानक ‘महिंद्रा ट्रैक्टर’ की जब्ती और शिक्षक से पूछताछ शुरू कर दी गई।

क्या जांच में हुई ‘सेटिंग’ या पुलिस को गुमराह किया गया?

इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस किसी दबाव में थी या फिर बीमा क्लेम के खेल के लिए ट्रैक्टर को बदलने की कोशिश की जा रही थी? यदि वीडियो सामने नहीं आता, तो क्या पुलिस जॉन डियर ट्रैक्टर को ही आरोपी बनाकर असली दोषियों को क्लीन चिट दे देती?

एक मजदूर की मौत के मामले को जिस तरह उलझाया गया है, वह कहीं न कहीं यह बताता है कि या तो शिकायतकर्ता ने पुलिस को पूरी तरह गुमराह किया या फिर पुलिस ने जानबूझकर जांच में ढील बरती।

सिस्टम की विफलता: कौन है जिम्मेदार?

एक सरकारी शिक्षक का अवैध उत्खनन में लिप्त होना और फिर हादसे के बाद सबूत मिटाने की कोशिश करना, समाज और प्रशासन के लिए शर्मनाक है। खनिज विभाग की चुप्पी और पुलिस की शुरुआती गलत कार्रवाई ने सहेसराम मांझी के परिजनों को मिलने वाले न्याय पर पहले ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब क्षेत्र की जनता पूछ रही है:

1. बिना जांच के गलत ट्रैक्टर के नाम पर एफआईआर कैसे दर्ज हुई?
2. क्या दोषियों को रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है?
3. क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा?

बरहाल, मांड नदी में अवैध उत्खनन से लेकर जांच में लापरवाही तक, यह पूरा मामला अब धरमजयगढ़ पुलिस के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।

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