नक्सलवाद की तर्ज पर अब तस्करों का ‘हृदय परिवर्तन’: मुख्यधारा में लौटने की कसमें खा रहा ‘रब्बुल खान’!!

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ऑपरेशन शंखनाद का खौफ: एसएसपी के डर से सरेंडर मोड पर आए तस्कर, तस्करी छोड़ अब करेंगे खेती-किसानी

रायगढ़@TAKKAR न्यूज: रायगढ़ पुलिस के “ऑपरेशन शंखनाद” ने जिले में गौ-तस्करी के नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब लैलूंगा इलाके का कुख्यात गौवंश तस्कर रब्बुल खान खुद पुलिस के सामने आ खड़ा हुआ। दिलचस्प बात यह है कि रब्बुल खान की भाषा किसी आत्मसमर्पित नक्सली जैसी है। वह अब तस्करी के “काले कारोबार” को छोड़ समाज की “मुख्यधारा” में शामिल होकर खेती-किसानी करने की बात कह रहा है।

पुलिस की घेराबंदी या आत्मग्लानि?

रायगढ़ पुलिस की विज्ञप्ति के अनुसार, रब्बुल खान को लैलूंगा पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है। पुलिस का कहना है कि यह उनकी लगातार पतासाजी और घेराबंदी का परिणाम है कि तस्कर के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में आरोपी रब्बुल खान खुद को सरेंडर करने की स्थिति में बता रहा है। वह कहता है— “मैं पहले मवेशी की खरीदी-बिक्री करता था, लेकिन एसएसपी शशि मोहन सिंह की विचारधारा से प्रभावित होकर अब यह काम छोड़ रहा हूँ। मैं मुख्यधारा से जुड़कर खेती करना चाहता हूँ।”

क्या है इस ‘मुख्यधारा’ वाली मानसिकता का राज?

आमतौर पर ‘मुख्यधारा में वापसी’ जैसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल नक्सलवाद छोड़कर समाज में लौटने वाले लोग करते हैं। एक गौ-तस्कर द्वारा इन शब्दों का उपयोग करना यह दर्शाता है कि:

• कानून का डंडा: तस्करों को अब समझ आ गया है कि “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत उनके बचने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।

• मनोवैज्ञानिक दबाव: एसएसपी के सख्त तेवर और पुलिस की जीरो-टोलरेंस नीति ने अपराधियों के मन में ऐसा खौफ पैदा किया है कि वे गिरफ्तारी को ‘हृदय परिवर्तन’ का नाम दे रहे हैं।

• सामाजिक बहिष्कार का डर: पुलिस की सख्ती के कारण अब इस गिरोह के मददगारों ने भी हाथ खींच लिए हैं, जिससे ये तस्कर अलग-थलग पड़ गए हैं।

पुलिस का सख्त संदेश: सरेंडर या सलाखें!!

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने साफ कर दिया है कि जिले में गौ-तस्करी के लिए कोई जगह नहीं है। “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत पुलिस अब केवल गिरफ्तारी नहीं कर रही, बल्कि तस्करों के पूरे इकोसिस्टम को तबाह कर रही है। रब्बुल खान के साथी देवानंद यादव की गिरफ्तारी के बाद से ही रब्बुल फरार चल रहा था, लेकिन पुलिस की दबिश ने उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

“अपराधियों के पास अब सिर्फ दो ही विकल्प हैं— या तो वे अपराध का रास्ता पूरी तरह छोड़कर कानून के सामने आएं, वरना पुलिस की गिरफ्त और जेल की सलाखें उनका इंतजार कर रही हैं।” — शशि मोहन सिंह, एसएसपी, रायगढ़

आरोपी ने भविष्य में खेती-किसानी कर जीवन बिताने की शपथ ली है।

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