रायगढ़/लैलूंगा@टक्कर न्यूज :- जिले के लैलूंगा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंजारा में सत्ता और रसूख के नशे में चूर भू-माफियाओं ने प्रशासन को ही ठेंगे पर रख दिया है। आलम यह है कि सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को रोकने के लिए जारी तहसीलदार का ‘स्थगन आदेश’ भू-माफियाओं के लिए महज रद्दी का टुकड़ा बनकर रह गया है। वहीं, इस पूरे मामले में लैलूंगा एसडीएम के बेतुके और गैर-जिम्मेदाराना बयान ने इस बात की ओर गंभीर इशारा कर दिया है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।







‘स्टे ऑर्डर’ के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा अवैध निर्माण:
ग्राम पंचायत कुंजारा में पटवारी भवन के पास स्थित बेशकीमती शासकीय भूमि पर सरेआम अवैध पक्का कॉम्प्लेक्स ताना जा रहा है। मामले की शिकायत मिलने पर लैलूंगा तहसीलदार ने 15 अप्रैल 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए स्थगन आदेश जारी किया था। आदेश में दिलकुमार भगत सहित पांचों अनावेदकों को निर्माण तत्काल रोकने का निर्देश था, साथ ही चेतावनी दी गई थी कि आदेश की अवहेलना पर निर्माण ढहा दिया जाएगा और खर्च वसूला जाएगा। इस आदेश की प्रति थाना प्रभारी और पटवारी को भी दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजस्व और पुलिस अमले की नाक के नीचे आज भी बेखौफ होकर काम जारी है।
भ्रष्टाचार की खुली लूट: मशीनों से काम, फर्जी मस्टर रोल से भुगतान:
अवैध कब्जे के साथ-साथ गांव में सरकारी योजनाओं में भी भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। 20 अप्रैल 2026 को आयोजित ‘जन समस्या निवारण शिविर’ में कुंजारा निवासी जनेश्वर महतो ने कलेक्टर के नाम लिखित शिकायत सौंपकर पंचायत के काले कारनामों की पोल खोली।
शिकायत के अनुसार, गांव में बन रहे ‘अमृत सरोवर’ तालाब और डबरी/चेक डैम निर्माण में 95% काम मशीनों (जेसीबी/पोकलेन) से कराया गया है। इसके बावजूद, पंचायत प्रतिनिधियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल भरकर लाखों रुपयों का सरकारी गबन किया जा रहा है।
खौफ का साया: विरोध करने पर हत्या की धमकी:
गांव में भू-माफियाओं और भ्रष्टाचारियों का ऐसा खौफ है कि कोई भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अवैध निर्माण का विरोध करने पर दिलकुमार भगत, अनुज चौधरी, प्रमोद विश्वाल, नरेश प्रधान और नेतराम साहू द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से कुछ रसूखदारों पर पूर्व में एक वन अधिकारी और एक ग्रामीण की हत्या जैसे संगीन आरोप लग चुके हैं, जिसके कारण पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
SDM का ‘गैर-जिम्मेदाराना’ रवैया और सुलगते सवाल:
जब इस गंभीर मसले पर लैलूंगा एसडीएम भारत कौशिक से उनका पक्ष जाना गया, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। एसडीएम ने कहा- “पहले मामले की जांच होगी, फिर काम रुकवाया जाएगा।” उनके इस बयान ने सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल:
• सरकारी जमीन पर कब्जा और जांच का बहाना: जब जमीन स्पष्ट रूप से शासकीय है और अवैध कब्जा सामने है, तो काम तुरंत रुकवाने के बजाय ‘जांच के बाद रुकवाने’ का तर्क किसे बचाने के लिए है?
• मूकदर्शक बना अमला: क्या अधिकारियों को कुर्सी पर इसलिए बैठाया गया है कि वे अपनी आंखों के सामने हो रहे अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार का तमाशा देखते रहें?
• पटवारी और आरआई की भूमिका: जब शुरुआत में नींव खोदी जा रही थी, तब स्थानीय राजस्व अमला (पटवारी, आरआई) किस गहरी नींद में सोया हुआ था?
• किसका है संरक्षण: आखिर इस अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार के पीछे किस सफेदपोश नेता का दबाव है, जो प्रशासन कार्रवाई करने से कांप रहा है?
ग्रामीणों की मांग: उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई!!
लैलूंगा प्रशासन की इस लचर कार्यप्रणाली से त्रस्त ग्रामीणों ने अब कलेक्टर से मामले की उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने, अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त करने और फर्जी मस्टर रोल के जरिए निकाले गए सरकारी पैसों की शत-प्रतिशत रिकवरी की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है और माफियाओं पर बुलडोजर चलता है या नहीं।












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