रायगढ़

धरमजयगढ़: जंगलों को छलनी कर रहा कोयला माफिया, कार्रवाई पर प्रशासन ने साधी ‘रहस्यमयी’ चुप्पी!!

अपने आस पास की छोटी बड़ी खबर व विज्ञापन के लिए संपर्क करें: 7898273316

Spread the love

बोरों और संगरा के जंगलों में मशीनों से अवैध उत्खनन, पोकलेन जब्त होने के बाद भी अधिकारी क्यों हैं मौन?

धरमजयगढ़@टक्कर न्यूज :- धरमजयगढ़ क्षेत्र में इन दिनों कोयला माफिया के हौसले बुलंद हैं। बोरों और संगरा के घने जंगलों के बीच भारी मशीनों (पोकलेन) के जरिए बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि मशीनें पकड़ी भी जा रही हैं, लेकिन प्रशासन न तो इसकी पुष्टि कर रहा है और न ही कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहा है। अधिकारियों की यह ‘गोपनीयता’ अब मिलीभगत के संदेह को हवा दे रही है।

जंगलों में दिन-रात गूंज रही मशीनों की दहाड़
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बोरों के जंगलों में पिछले लंबे समय से अवैध खुदाई जारी है। दिन-रात मशीनों की आवाज और कोयले से लदे भारी वाहनों की आवाजाही ने पर्यावरण और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है। यही स्थिति संगरा इलाके की भी है, जहां वन भूमि को खोदकर माफिया ने प्राकृतिक संपदा की लूट मचा रखी है।

कार्रवाई या खानापूर्ति?

उठ रहे कई सवाल
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक पोकलेन मशीन को जब्त किया गया है। लेकिन कार्रवाई राजस्व विभाग ने की है या वन विभाग ने, इसे पूरी तरह गुप्त रखा गया है। वाहन जब्ती के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी एसडीएम या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने मीडिया को कोई जानकारी साझा नहीं की है। जब एसडीएम प्रवीण भगत से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।

“प्रशासन की चुप्पी से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं माफिया को संरक्षण प्राप्त है। अगर कार्रवाई पारदर्शी है, तो प्रेस विज्ञप्ति जारी करने में परहेज क्यों?” — आक्रोशित ग्रामीण

पत्रकारों से दूरी: सूचना के अधिकार और लोकतंत्र पर प्रहार

धरमजयगढ़ में यह पहली बार नहीं है जब पत्रकारों को सूचना के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। धान खरीदी में हुई गड़बड़ी हो या हाल ही में एक राइस मिल को सील करने की कार्रवाई—प्रशासन ने किसी भी मामले में आधिकारिक डेटा जारी नहीं किया।

•बिना पुष्टि की खबरें: प्रेस विज्ञप्ति के अभाव में पत्रकारों को सूत्रों के हवाले से खबरें चलानी पड़ती हैं, जिस पर बाद में प्रशासन ही आपत्ति जताता है।

जवाबदेही का अभाव: अधिकारियों द्वारा फोन न उठाना और संदेशों का जवाब न देना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने जैसा है।

इन सवालों के जवाब कब देगा प्रशासन?

जब्त पोकलेन मशीन का मालिक कौन है और उस पर क्या धाराएं लगाई गई हैं?

वन भूमि पर अवैध उत्खनन रोकने में स्थानीय अमला क्यों विफल रहा?

जनहित के मामलों में प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से परहेज क्यों किया जा रहा है?

प्रशासन की यह खामोशी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो ग्रामीणों का आक्रोश उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button