रायगढ़

मासूमों की जान से खिलवाड़: रायगढ़ में अवैध स्कूली वाहनों का खुला राज, परिवहन विभाग की सुस्ती अब अपराध के समान!

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मासूमों की जान से खिलवाड़: रायगढ़ में अवैध स्कूली वाहनों का खुला राज, परिवहन विभाग की सुस्ती अब अपराध के समान!

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- हर सुबह जब मासूम बच्चे स्कूल जाने के लिए घर से निकलते हैं, तो उनके माता-पिता का दिल धड़कता है – क्या आज उनका बच्चा सुरक्षित घर लौटेगा? यह कोई अतिरंजना नहीं, बल्कि रायगढ़ जिले की कड़वी हकीकत है। सड़कों पर मौत के सौदागर धड़ल्ले से घूम रहे हैं – बिना पीली पट्टी वाली बसें, बिना कमर्शियल पंजीयन के वैन, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के जर्जर वाहन, बिना बीमा के खतरनाक साधन। और सबसे बड़ी विडंबना? परिवहन विभाग, जिसका मूल दायित्व यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, पूरी तरह से मौन और निष्क्रिय बना हुआ है।

यह समस्या नई नहीं है। महीनों से स्थानीय मीडिया, अभिभावक और सामाजिक संगठन चेतावनी दे रहे हैं। रिपोर्ट्स छप चुकी हैं, तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं, शिकायतें कई बार हो चुकी हैं – लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस है। बल्कि स्थिति और बिगड़ती जा रही है। अवैध वाहन संचालकों के हौसले बुलंद हो गए हैं क्योंकि उन्हें पता है – कोई कार्रवाई नहीं होगी।

परिवहन विभाग अब क्या जवाब देगा?

  • अवैध स्कूली वाहनों की पूरी लिस्ट विभाग के पास मौजूद है – फिर विशेष चेकिंग अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा?
  • पिछले एक साल में कितने वाहन जब्त किए गए? कितने चालकों का लाइसेंस निरस्त हुआ? कितने संचालकों पर जुर्माना लगा? जवाब: शून्य या नाममात्र।
  • कुछ स्कूल प्रबंधन और प्राइवेट संचालक खुले तौर पर इन अवैध वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं – क्या शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग ने कभी संयुक्त निरीक्षण किया?
  • क्या यह सामूहिक मिलीभगत का मामला नहीं, जब सभी विभाग आँखें मूंदे बैठे हैं और सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं?

यह महज लापरवाही नहीं है। यह जवाबदेही से पलायन है। यह बच्चों की सुरक्षा के साथ विश्वासघात है। अगर कोई बड़ा हादसा होता है – और इतनी लापरवाही के बीच यह हादसा होना तय है – तो जिम्मेदारी सिर्फ चालक या संचालक की नहीं होगी।
परिवहन विभाग के अफसरों की सुस्ती, निरीक्षकों की नाकामी, और पूरे सिस्टम की विफलता भी इतिहास के काले पन्नों में दर्ज होगी।

हमारी स्पष्ट और तत्काल मांगें:

  1. तत्काल संयुक्त अभियान चलाया जाए – परिवहन, पुलिस, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की टीम सड़कों पर उतरे।
  2. सभी अवैध स्कूली वाहनों (बिना पीली पट्टी, बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन, बिना फिटनेस, बिना बीमा) की तुरंत जब्ती और उन्हें क्रशर तक पहुंचाया जाए।
  3. नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाए और उनकी मान्यता पर विचार किया जाए।
  4. लापरवाह परिवहन अधिकारियों पर विभागीय जांच शुरू की जाए और दोषियों को निलंबित किया जाए।
  5. अभिभावकों के लिए हेल्पलाइन और शिकायत तंत्र को मजबूत किया जाए।

अभिभावकों से अपील है – अब चुप्पी तोड़िए। स्कूलों से लिखित जवाब मांगिए। प्रशासन में शिकायत दर्ज कराइए। सोशल मीडिया पर आवाज बुलंद कीजिए। बच्चों की सुरक्षा कोई राजनीतिक या आर्थिक समझौता नहीं है। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

परिवहन विभाग, समय आ गया है जागने का:

अगर अब भी आँखें मूंदे रहे, तो याद रखिए – अगली बार जब कोई मासूम बच्चा सड़क पर लहूलुहान होगा, तो उसकी लहू की एक-एक बूंद पर आपकी चुप्पी की मुहर लगेगी।

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