स्वरोजगार की उम्मीदें बनीं खंडहर, करोड़ों का सरकारी पैसा पानी में.. आईटीआई के बाहर दुकानें अब ‘भूतिया मार्केट’ बन गईं!!
अपने आस पास की छोटी बड़ी खबर व विज्ञापन के लिए संपर्क करें: 7898273316

रायगढ़ नगर निगम की लापरवाही: स्वरोजगार की योजनाएं बनीं खंडहर, करोड़ों का सरकारी धन बर्बाद!







रायगढ़@टक्कर न्यूज :- शहर में नगर निगम द्वारा स्वरोजगार को बढ़ावा देने और निगम की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजनाएं आज खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। आईटीआई परिसर के बाहर निर्मित दो दर्जन से अधिक दुकानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जबकि चक्रधर नगर स्थित मरीन ड्राइव पर बनी 15 दुकानें भी संचालन के अभाव में जर्जर हो रही हैं। यह न केवल सरकारी संपत्ति का भारी नुकसान है, बल्कि स्वरोजगार के सपनों को कुचलने और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।
आईटीआई परिसर की दुकानें: खालीपन से खंडहर तक का सफर!!
नगर निगम ने आईटीआई जैसे शैक्षणिक संस्थान के ठीक बाहर दुकानें बनाकर युवाओं को स्वरोजगार का अवसर देने और निगम को नियमित राजस्व देने की योजना बनाई थी। निर्माण पूरा होने के बाद औपचारिक रूप से आबंटन भी किया गया, लेकिन व्यावसायिक गतिविधियों की कमी और ग्राहकों का न आना प्रमुख कारण रहा।
दुकानदारों ने यहां व्यवसाय शुरू करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। नतीजा? शुरुआत से ही ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। देखरेख के अभाव में असामाजिक तत्वों ने इनका निशाना बनाया—लोहे के शटर, दरवाजे और अन्य सामग्री चोरी हो गई। आज इन दुकानों की हालत देखकर किसी का भी दिल दहल जाए: टूटे-फूटे शटर, दीवारों में गहरी दरारें, चारों ओर झाड़ियां और गंदगी का ढेर।

स्थानीय व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोपी ठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“आईटीआई क्षेत्र में ग्राहक ही नहीं आते, इसलिए दुकान चलाना संभव नहीं है। निगम ने पैसा लगाया लेकिन योजना सही नहीं बनाई। सही जगह का चयन नहीं किया। इसलिए करोड़ों की दुकानें कंडम हालत में हैं।”
मरीन ड्राइव की दुकानें: हैंडओवर के बाद भी बंद!!
दूसरा मामला चक्रधर नगर स्थित मरीन ड्राइव का है, जहां 15 दुकानों का निर्माण पूरा होने के बाद हैंडओवर तो किया गया, लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका। अब नगर निगम ने इनका अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यहां भी लापरवाही साफ नजर आ रही है, जिससे शहर की सुंदरता धूमिल हो रही है।
निगम कमिश्नर का बयान और सुझाव:
नगर निगम कमिश्नर बृजेश क्षत्रिय ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,”दुकानों के पुनः आबंटन और अनुबंध निरस्ती की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।”
जानकारों का मानना है कि निगम को तत्काल कदम उठाने चाहिए—दुकानों का दोबारा आबंटन करें, स्थान के अनुसार नई उपयोग योजना बनाएं, जर्जर भवनों की मरम्मत कराएं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करें। अन्यथा, यह लापरवाही और भी बड़े नुकसान का कारण बनेगी।
यह मामला सिर्फ टूटी दुकानों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता, गलत योजना और करोड़ों के सरकारी फंड के बर्बाद होने का है। रायगढ़वासियों को उम्मीद है कि निगम अब जागेगा और इन खंडहरों को फिर से रोजगार का केंद्र बना देगा।



