हाईस्कूल, हायरसेकंड्री स्कूल परीक्षा परिणाम प्रतिकूल आने पर बच्चे निराश न हों।

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जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह-ओ-शाम।

ये परिणाम जीवन का अंतिम परिणाम नहीं जिसमें असफल, अनुत्तीर्ण या कम अंक आने पर अत्यधिक निराश हुआ जाए। जिंदगी इससे बड़ी-बड़ी परिक्षाएँ लेती हैं, जीवन में इससे भी बड़ी-बड़ी परिक्षाओं का सामना करना पड़ता है अत: अभी से निराशा अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। क्या होता है यदि परीक्षा में वांक्षित सफलता ना मिली, कुछ कम अंक आ गए या असफल हो गए।

यह जिंदगी की मंजिल नहीं, मंजिल तक पहुँचने के एक-एक पड़ाव जरूर हैं लेकिन संपूर्ण मंजिल नहीं। यदि दिशाएँ अनुकूल नहीं तो जीवन में कभी भी रास्ते बदले जा सकते हैं, विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। लेकिन उसके लिए जीवन का होना जरूरी है। कभी भी और किसी भी हालत में कोई भी गलत कदम ना उठाएँ बल्कि धैर्य रखें। खराब समय हमेशा नहीं रहता बल्कि परिस्थितियाँ बदलती रहतीं हैं। बदलती परिस्थितियों का भी धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए।

परीक्षा में प्राप्त अंको के मकड़जाल में विशेष ना उलझें इसके स्थान पर सतत् आगे बढ़ने के लिए मेहनत करते रहें। यदि आप अनुत्तीर्ण हुए हों तो ये ध्यान रखें कि यह आपके व्यक्तित्व आँकने का संपूर्ण पैमाना नहीं बल्कि स्मरण शक्ति की परीक्षा है जहाँ आप श्रेष्ठ प्रदर्शन ना कर पाए। इसमें फैल होना मतलब जिंदगी से फैल होना नहीं।

वैसे भी दसवीं-बारहवीं कक्षा के रिजल्ट के ‘प्रतिशत माँग’ के आधार पर बहुत कम सेवाओं की वैकेंसी निकलतीं हैं अत: यह सोचना कि इसमें प्रतिकूल परिणाम आने से जीवन बर्बाद हो गया, यह सोच ही फिजूल है।  दसवीं का अंक केवल बारहवी के विषय चयन का काल्पनिक आधार उपलब्ध कराता है। आपका अंक यदि कम भी है तो भी अपने परिजनों व शिक्षकों से बात करके विश्वास में लेकर अपने पसन्द का विषय चुन सकते हैं।

यदि आप बारहवी के विद्यार्थी है तो भी आपको घबराने की आवश्यकता नही है। बारहवीं के प्रावीण्य सूची के आधार पर सेवाएँ भी कम निकलती है यदि आपके अंक कम हैं तो भी निराशा की बात नहीं क्योंकि अधिकांश सेवाओं के लिये बारहवी उत्तीर्ण ही माँगा जाता है।

बाकि कुछ उच्च शिक्षा की पढ़ाई व कुछ नौकरियों में ही अनिवार्य मेरिट अंक की माँग की जाती है। यदि आप हाईएस्ट अंक नही ला पाएँ तब भी इन नौकरियों व इन पढ़ाई के लिये पात्र हैं ही,  अत: ऐसी स्थिति में डरने वाली बात भी नहीं। अनुत्तीर्ण हैं या कम प्रतिशत आएँ हैं दोनों ही स्थितियों में कभी भी निराश ना होवें बल्कि आगे बढ़कर मेहनत करने को ही प्राथमिकता में लें। जीवन में सदैव विकल्प खुले रखें। लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ें। अब तो ओपन परीक्षा का विकल्प भी है अत: हताश या निराश ना होवें।

  वे लोग जो फैल हो गए हैं उन्हें भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम साहब की “फैल” के संबंध में कही गई ये बातें याद रखनी चाहिए। महान व्यक्तित्व के स्वामी मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब कहते थे फैल मतलब ‘फर्स्ट अटेम्ट इन लर्निंग’ ‘सीखने के प्रथम प्रयास’। यदि एक बार में सफलता नहीं मिली तो क्या हुआ फिर से प्रयास करें, इसमें भविष्य बर्बाद होने वाली कोई बात नहीं। फिर से मेहनत जारी रखेें, नए सिरे से प्रयास करें। अभी तो जीवन में कई मौके आएंगे उन पर ध्यान देनी चाहिए और जिंदगी की उड़ान जारी रखनी चाहिए।

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