ग्राम सचिव पर जनहितकारी योजनाओं में धांधली का गंभीर आरोप, ग्रामवासियों ने कलेक्टर के दरवाजे पर लगाई चिल्लाहट!!







रायगढ़@टक्कर न्यूज :- रायगढ़ जिले के खरसिया तहसील के अंतर्गत स्थित छोटे से ग्राम बरभौना में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का पैसा गबन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत बरभौना के सचिव श्री रामप्रसाद डनसेना पर फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपये हड़पने, पंचों को दरकिनार करने और गांव की बुनियादी सुविधाओं को पूरी तरह ठप करने का आरोप लगाया गया है। गुस्साए ग्रामवासियों ने उपसरपंच गुलाब शठिया के नेतृत्व में सामूहिक शिकायत पत्र जिला कलेक्टर महोदय को सौंपा है और सचिव को तुरंत हटाने की मांग की है। यह घटना ग्रामीण छत्तीसगढ़ में पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।
शिकायत पत्र में ग्रामवासियों ने विस्तार से आरोपों की श्रृंखला गिनाई है। सबसे गंभीर आरोप पंचायत भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरभौना और आंगनबाड़ी केंद्र भवन की मरम्मत से जुड़ा है। शासन द्वारा इन भवनों की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन सचिव ने केवल बाहरी दीवारों पर रंगरोगन कराकर पूरा पैसा गबन कर लिया। पंचायत भवन के अंदर न कोई निर्माण कार्य हुआ, न कुर्सी-टेबल खरीदे गए, न पंखे लगाए गए और न ही अन्य कोई सुविधा उपलब्ध कराई गई। केवल फर्जी बिल तैयार कर राशि आहरित कर ली गई। यह धांधली गांव के विकास कार्यों को सीधे तौर पर चोट पहुंचा रही है।
ग्राम सभा की अनदेखी भी आरोपों की लंबी फेहरिस्त में शामिल है। सचिव नियमित रूप से ग्राम सभा का आयोजन नहीं करते। पंचों की सहमति लिए बिना मनमानी फैसले लेते हैं और जब पंच जनहित के किसी कार्य के लिए जोर देते हैं तो “अभी पैसा नहीं है” कहकर टाल देते हैं। इससे पंचायत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। पंचों की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे गांव की आवाज दबाई जा रही है।
गांव की जल संकट की स्थिति और भी चिंताजनक है। पंचायत क्षेत्र के तालाब में जल भराव नहीं हो पा रहा, जिसके कारण ग्रामीणों को निस्तार (दैनिक उपयोग) के लिए पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है। मवेशियों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा। ग्राम सचिव इस समस्या को दूर करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे। इसी तरह प्राथमिक और माध्यमिक शाला का आहाता (बाउंड्री वॉल) पूरी तरह टूट चुका है। बच्चों की सुरक्षा और स्कूल परिसर की गरिमा प्रभावित हो रही है, लेकिन सचिव शासन को प्रस्ताव भेजने में लगातार आनाकानी कर रहे हैं।
सचिव की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। वे अपने कार्यालय में नियमित रूप से नहीं बैठते। इससे जन्म प्रमाण पत्र, विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन और राशन कार्ड जैसे अत्यावश्यक दस्तावेजों के निर्माण में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गरीब परिवारों की योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा। इसके अलावा गांव क्षेत्र में बोर-बोरिंग की रखरखाव की पूरी तरह उपेक्षा की जा रही है, जिससे पेयजल संकट और गहरा हो रहा है।
बरभौना ग्राम पंचायत खरसिया ब्लॉक में आती है और यहां की आबादी लगभग 844 है (2011 जनगणना के अनुसार)। छोटे से इस गांव में शासन की योजनाओं का सही क्रियान्वयन होना चाहिए था, लेकिन सचिव की कथित मनमानी ने पूरे गांव को आक्रोशित कर दिया है। शिकायत पत्र पर उपसरपंच गुलाब शठिया, पंच भूपेंद्र राठिया, केरामी, नबिल किशोर, निरुपा, राजकुमारी, इंदोबाई, कुलकुमारी और समस्त ग्रामवासियों के हस्ताक्षर हैं। पत्र की तारीख 6 अप्रैल 2026 है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं विकास की राह में बड़ी बाधा बन रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार जनहितकारी योजनाओं जैसे पेंशन, राशन, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और जल संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि पंचायत स्तर पर ही धांधली हो तो आम आदमी तक लाभ नहीं पहुंच पाता। ग्रामवासी अब कलेक्टर से त्वरित जांच, दोषी सचिव पर सख्त कार्रवाई और उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं।
यह मामला जिला प्रशासन के लिए चुनौती है। यदि शिकायत की सच्चाई साबित हुई तो न केवल सचिव पर एक्शन होगा, बल्कि अन्य पंचायतों में भी भ्रष्टाचार की जांच की मांग जोर पकड़ सकती है। ग्रामीण छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। बरभौना के ग्रामवासियों की यह लड़ाई सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में अच्छे शासन की मिसाल बन सकती है।
जिला प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना होगा। फिलहाल पूरे बरभौना गांव में आक्रोश की लहर है और लोग न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।













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