रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- औद्योगिक विकास के नाम पर रायगढ़ जिले का पर्यावरण और ग्रामीण जीवन किस कदर राख के ढेर में दफन किया जा रहा है, इसकी खौफनाक तस्वीर हर्राडीह गांव में देखने को मिली है। यहां फ्लाई ऐश (उद्योगों से निकलने वाली राख) माफियाओं ने न सिर्फ किसानों की निजी और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया है, बल्कि नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए हाई-टेंशन बिजली के टावर तक को राख के पहाड़ से ढंक दिया है।

प्रशासनिक उदासीनता और रसूखदारों के गठजोड़ का आलम यह है कि शिकायतों और राजस्व विभाग के सीमांकन (पंचनामा) के बावजूद आज तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण अपनी ही जमीन पर बेबस हैं और उन्हें दबंगों द्वारा खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं।

हाईटेंशन टावर राख में दफन, बड़े हादसे को आमंत्रण..

गांव में फ्लाई ऐश डंपिंग का सबसे खौफनाक मंजर यह है कि हाई-टेंशन बिजली के तारों वाला एक बड़ा टावर पूरी तरह से राख के पहाड़ में समा चुका है। सुरक्षा मानकों के अनुसार इन टावरों के नीचे एक निश्चित दूरी तक कोई निर्माण या डंपिंग नहीं हो सकती। लेकिन यहां फ्लाई ऐश का पहाड़ तारों को छूने को आतुर है। गांव वालों और रिपोर्टर के मुताबिक, यह इलाका हाथियों का कॉरिडोर भी हो सकता है। बारिश के दिनों में या किसी भी जानवर के इस राख के पहाड़ पर चढ़ने से भयंकर करंट फैलने का खतरा है, जो किसी बड़े जानलेवा हादसे को सीधा आमंत्रण है।

किसानों की फसलें बर्बाद, महुआ हो रहा काला

फ्लाई ऐश के इस जहर ने हर्राडीह के किसानों की कमर तोड़ दी है। स्थानीय ग्रामीण मकरध्वज राठी ने बताया कि उनकी निजी जमीन पर जबरन राख डंप कर दी गई है। जहां पहले उड़द, मूंगफली और तिल की खेती होती थी, वहां अब राख के सिवाय कुछ नहीं उगता। पेड़-पौधे राख के नीचे दबकर मर चुके हैं।

वहीं, गांव की एक बुजुर्ग महिला ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि राख के प्रदूषण से महुआ के फूल काले पड़ रहे हैं। जो महुआ बाजार में 40 रुपये किलो बिकता था, उसे अब व्यापारी काला होने के कारण 20 रुपये में भी लेने को तैयार नहीं हैं।

रायगढ़ इस्पात और ठेकेदार अजय साहू पर गंभीर आरोप..

ग्रामीणों ने इस पूरी गुंडागर्दी के पीछे 'रायगढ़ इस्पात एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड' (कमल अग्रवाल की कंपनी) और स्थानीय ठेकेदार/सरपंच पति अजय साहू का नाम लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अजय साहू अपने राजनीतिक रसूख और दबंगई के बल पर बिना अनुमति के फ्लाई ऐश गिरा रहा है।

एक महिला ग्रामीण ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी 4 एकड़ जमीन पर राख गिराने का विरोध किया, तो अजय साहू और उनके बेटे ने महिलाओं से अभद्रता की। उन्हें धमकी दी गई कि "महिलाओं की नहीं चलती" और उन्हें उनकी हैसियत दिखाने की बात कही गई।

प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन पर खड़ा होता है। मकरध्वज राठी के अनुसार, उन्होंने तहसीलदार और पटवारी को बुलाकर सीमांकन करवाया था। पंचनामा में यह साफ तौर पर लिखा गया है कि 78/2 खसरा नंबर और 28 मीटर सरकारी जमीन (कुल लगभग 200 मीटर के दायरे में) पर अवैध डंपिंग की गई है। इसके बावजूद, अजय साहू या कंपनी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया और न ही राख को वहां से हटाया गया। ग्रामीण बताते हैं कि अनुमति महज़ कुछ एकड़ की थी, लेकिन राख 8 से 9 एकड़ क्षेत्र में फैला दी गई है।

आगे क्या?

हर्राडीह गांव की यह स्थिति स्पष्ट करती है कि उद्योगपति और ठेकेदार प्रशासन के नाक के नीचे कैसे 'सिस्टम' को अपनी जेब में रखकर चल रहे हैं। अब देखना यह है कि हाईटेंशन टावर के दफन होने और खुलेआम गुंडागर्दी के वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है, या फिर किसी बड़े हादसे और ग्रामीणों के पूरी तरह उजड़ जाने का इंतजार करता है।