रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- 'नदियां नाले हो गए, हरे-भरे जंगल काले हो गए...' यह सिर्फ एक कविता की पंक्तियां नहीं, बल्कि उस भयानक सच्चाई का आईना है, जिसे आज विकास के नाम पर छिपाने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर आज-कल एक नाम तेजी से चर्चा में है— 'विवेक सिंह'। एक आम नागरिक और समाजसेवी के तौर पर विवेक सिंह अपने वीडियो के जरिए जनहित और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों को जिस बेबाकी से उठा रही हैं, उसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है।

वायरल वीडियो में क्या बोलीं विवेक सिंह?

अपने हालिया वायरल वीडियो में विवेक सिंह ने जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध कटते जंगलों पर तीखा प्रहार किया है। वीडियो में वे सिस्टम और विकास के खोखले दावों पर सीधे सवाल उठाते हुए कहती हैं:

"यह तेज धूप, बहती गर्म हवा और बढ़ता तापमान आखिर किसके वश में है? छा रहा पैसे का खुमार और स्वप्न भारत को विश्व गुरु बनाने का... बहती नदियां नाले हो गए, हरे-भरे जंगल काले हो गए। वो कहते हैं कि पैसों से सब कुछ खरीदा जा सकता है... और खरीदा जा सकता है पंखा, कूलर और एयर कंडीशनर। लेकिन वो ताजी हवा जो बहती थी मेरे गांव में... वो खरीद पाना कठिन है।"

विवेक सिंह का यह वीडियो सीधे तौर पर उन लोगों को आईना दिखा रहा है जो विकास के नाम पर पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इस दर्द का एहसास सिर्फ उसी को है जिसने अपना जल, जंगल और जमीन खोया है। वीडियो में उन्होंने पेट्रोल-डीजल की महंगाई, बेरोजगारी और पानी की किल्लत जैसे ज्वलंत मुद्दों को भी पर्यावरण विनाश से जोड़ते हुए अपनी बात रखी है।

जहां आजकल सोशल मीडिया पर लोग केवल व्यूज के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं, वहीं विवेक सिंह की यह पहल सराहनीय है। उनके वीडियो में केवल शिकायतें नहीं होतीं, बल्कि वे तथ्यों और एक गहरी संवेदना के साथ बात रखती हैं। कमेंट सेक्शन में लोग उनके साहस और स्पष्टवादिता की जमकर तारीफ कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि आज के समय में ऐसी ही आवाजों की जरूरत है, जो बिना डरे सच बोलने की हिम्मत रखती हों।

विवेक सिंह की यह लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि जनता अब पर्यावरण और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है। उनका यह वीडियो यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या एक पेड़ लगाने के दिखावे से हम अपने पुरखों की धरोहर को वापस ला सकते हैं? विकास की इस अंधी दौड़ में अगर हमने प्रकृति की चीख नहीं सुनी, तो आने वाले कल में यह 'चिलचिलाती धूप' और 'सूखी धरती' ही हमारा भविष्य होगी।