रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- विकास के नाम पर सरकारी खजाने में कैसे सेंध लगाई जाती है, इसका एक खौफनाक और जीता-जागता उदाहरण रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बेलरिया में देखने को मिला है। 50 हेक्टेयर कृषि भूमि की प्यास बुझाने और ग्रामीणों की जल समस्या दूर करने का सुनहरा ख्वाब दिखाकर बनाया जा रहा 5 करोड़ 20 लाख रुपये का चेक डैम, पहली बारिश की बूंदें झेलने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

नियम-कायदों को ताक पर रखकर ठेकेदार विनय गोयल द्वारा किए जा रहे इस गुणवत्ताहीन निर्माण ने न सिर्फ डैम के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है, बल्कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के बीच पनप रहे नापाक गठजोड़ की पोल भी खोल कर रख दी है।

ग्राउंड जीरो का खौफनाक सच: सीमेंट की बोरियों से रोका जा रहा डैम का पानी..

टक्कर न्यूज की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन में ठेकेदार विनय गोयल की 'इंजीनियरिंग' के जो सुबूत मिले हैं, वह किसी भी सभ्य व्यवस्था को शर्मसार करने के लिए काफी हैं। 5 करोड़ से अधिक की लागत वाले इस डैम की दीवारों और गेट से अभी से भारी रिसाव (लीकेज) शुरू हो गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस जानलेवा लीकेज को रोकने के लिए ठेकेदार ने किसी तकनीकी सुधार का सहारा नहीं लिया, बल्कि गेट और दरारों के बीच सीमेंट की खाली बोरियां ठूंस दी हैं।

हालात इतने बदतर हैं कि पुलिया के स्टॉपर अपनी जगह से लटक कर टेढ़े हो चुके हैं। कंक्रीट के बीच से लोहे की छड़ें (सरिया) बाहर की तरफ झांक रही हैं, जो किसी भी वक्त एक बड़े और जानलेवा हादसे का सबब बन सकती हैं। साइट पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगाया गया है और न ही काम की निगरानी के लिए कोई इंजीनियर मौजूद है। करोड़ों का यह स्ट्रक्चर पूरी तरह से मिस्त्रियों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

ईई की बेशर्मी: 'वीप होल' बताकर भ्रष्टाचार पर डाल रहे पर्दा..

एक तरफ जहां ठेकेदार का भ्रष्टाचार चीख-चीख कर गवाही दे रहा है, वहीं जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) होमेश नायक पूरी बेशर्मी से ठेकेदार के बचाव में उतर आए हैं। जनदर्शन में हुई शिकायत के बाद जब उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने डैम की दरारों और पानी रिसने की जगह को 'एक्सपेंशन जॉइंट' और 'वीप होल' (पानी निकलने का तकनीकी रास्ता) का नाम देकर पल्ला झाड़ लिया। अधिकारी का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि यह बताता है कि कमीशन के खेल में ऊपर से नीचे तक आंखें मूंद ली गई हैं।

ठेकेदार विनय गोयल की 'चुप्पी' में छिपे राज..

इस खुले भ्रष्टाचार पर जब ठेकेदार विनय गोयल से फोन पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। अपनी गलती पर पर्दा डालते हुए उन्होंने बस इतना कहा कि "आकर पूरे मामले का जवाब दूंगा।" इसके बाद से उन्होंने फोन उठाना ही बंद कर दिया है। ठेकेदार का यह रवैया साफ दर्शाता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। पूर्व सरपंच के आरोपों को ठेकेदार की यह चुप्पी और भी बल दे रही है।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की साख पर सीधा सवाल..

बेलरिया के पूर्व सरपंच रेशम लाल साहू और आक्रोशित ग्रामीणों ने अब सीधा निशाना सिस्टम और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर साधा है। प्रदेश के वित्त मंत्री और रायगढ़ के कद्दावर विधायक ओ.पी. चौधरी की छवि भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' वाले नेता की रही है। लेकिन ग्रामीणों का तीखा सवाल है कि: मंत्री जी की नाक के नीचे उनके ही गृह जिले में ठेकेदार इतनी बड़ी मनमानी कैसे कर रहे हैं? ओ.पी. चौधरी के सुशासन राज में यदि ऐसा खुला भ्रष्टाचार हो रहा है, तो इस पर क्या कार्रवाई होगी?

खतरे की घंटी: मानसून में आ सकती है जलप्रलय..

यदि तत्काल प्रभाव से इस घटिया निर्माण पर रोक लगाकर उच्च स्तरीय तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो आगामी मानसून में इस डैम का ताश के पत्तों की तरह ढहना तय है। यह सिर्फ 5 करोड़ के राजस्व की बर्बादी नहीं होगी, बल्कि डैम टूटने से आसपास के गांवों में भारी जलप्रलय आ सकती है, जिसमें जान-माल का भयानक नुकसान होगा।

अब गेंद रायगढ़ जिला प्रशासन और मंत्री ओ.पी. चौधरी के पाले में है। देखना यह है कि क्या ठेकेदार विनय गोयल और ईई पर कोई निष्पक्ष और दंडात्मक कार्रवाई होगी, या फिर 'वीप होल' की आड़ में इस भारी भ्रष्टाचार को भी हमेशा के लिए फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?