रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- बरसात की आहट के साथ ही रायगढ़ शहर में रेत माफियाओं का खेल एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। मॉनसून से पहले शहर के अलग-अलग इलाकों में बिना किसी अनुमति के अवैध बालू का बड़े पैमाने पर डंप कर लिया गया है। एक तरफ जिले का खनिज विभाग माफियाओं पर नकेल कसने और कार्रवाई करने का बड़ा-बड़ा ढोल पीटता है, तो वहीं दूसरी तरफ उन्हीं की नाक के नीचे शहर में अवैध रेत के पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं। विभाग की यह रहस्यमयी खामोशी उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा रही है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खोखले दावे..
हैरानी की बात यह है कि शहर के जिन क्षेत्रों में यह अवैध बालू डंप की जा रही है, वे खनिज विभाग के दफ्तर से महज चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। विभाग के अधिकारी अक्सर कागजों और बयानों में बड़ी कार्रवाइयों के दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। शहर के बीचों-बीच बिना किसी प्रशासनिक डर या अनुमति के रेत का यह अवैध भंडारण खुलेआम हो रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या खनिज विभाग का तंत्र इतना कमजोर हो चुका है कि वह अपने कार्यालय से कुछ कि.मी. की दूरी में हो रहे इस खेल को नहीं रोक पा रहा, या फिर इस चुप्पी के पीछे कोई गहरी सांठगांठ है?
जब शहर में ही लाचार है विभाग, तो घाटों पर कैसे होगी कार्रवाई?
अवैध बालू का यह खेल केवल डंपिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि रेत घाटों पर हो रहे अवैध खनन से भी जुड़ा है। शहर के भीतर खुलेआम हो रहे इस खेल ने एक बड़े और गंभीर यक्ष प्रश्न को जन्म दिया है ~ जो खनिज विभाग शहर में, अपनी आंखों के सामने डंप की गई रेत पर कार्रवाई करने में हांफने लगता है, वह शहर से दूर रेत घाटों पर हो रहे अवैध खनन को कैसे रोकेगा?
जब विभाग के अधिकारी शहर अंडर अवैध डंप पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, तो घाटों पर माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलने की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है।
प्रशासन की मंशा पर उठते सवाल..?
बरसात के सीजन में रेत की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं, इसी मुनाफे को भुनाने के लिए माफिया पहले से ही अवैध डंपिंग कर रहे हैं। लगातार अवैध खनन और अब शहर में भंडारण, यह साफ दर्शाता है कि रेत माफियाओं को कानून या विभाग का कोई खौफ नहीं रह गया है।
अब देखना यह होगा कि क्या इस गंभीर मुद्दे पर जिला प्रशासन नींद से जागेगा और खनिज विभाग अपनी कागजी कार्रवाइयों से बाहर निकलकर इन अवैध डंपों और घाटों पर कोई ठोस, जमीनी कार्रवाई करेगा, या फिर हर साल की तरह इस बार भी बारिश के मौसम में माफियाओं की ही चांदी होगी।
इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारी को भी फोन पर उनका पक्ष जानना को लेकर उनसे संपर्क किया गया, बरहाल उन्होंने ना फोन उठाया ना उसका जवाब दिया गया इसे अनुमानित लग सकते है अधिकारी आखिर कितने जिम्मेदार है कार्यवाही के प्रति।
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