रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। पारा 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी कर रहा है कि 'गर्मी से बचें और ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।' लेकिन, सिस्टम की विडंबना देखिए कि खुद स्वास्थ्य विभाग के रायगढ़ स्थित '100 बिस्तर मातृ एवं शिशु अस्पताल' में पिछले दो दिनों से पीने के पानी का भारी अकाल पड़ा हुआ है। भीषण गर्मी के बीच नवजात शिशु, प्रसूताएं और उनके परिजन पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज हैं और मजबूरन बाहर से पानी खरीद कर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

ग्राउंड जीरो पर बदइंतजामी की पोल

'छत्तीसगढ़ नाउ' के रिपोर्टर अनुज मिश्रा ने जब अस्पताल का जायजा लिया, तो वहां की तस्वीर विचलित करने वाली थी। अस्पताल के वॉटर कूलर पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। पुरुष और महिला शौचालयों (वॉशरूम) के नलों में पानी की एक बूंद नहीं है, जिससे वहां भयंकर गंदगी और संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। मरीजों के परिजनों ने बताया कि पानी की सप्लाई पिछले कई घंटों (कुछ के अनुसार 2 दिन) से पूरी तरह ठप है। मजबूरन लोग चिलचिलाती धूप में अस्पताल के बाहर जाकर आस-पास के इलाकों से पानी मांग कर या खरीद कर ला रहे हैं।

अधिकारियों की 'लीपापोती' और जमीनी हकीकत

जब इस गंभीर जल संकट पर अस्पताल के सर्जन डॉ. दिनेश पटेल से बात की गई, तो उनका रवैया लीपापोती वाला नजर आया। उन्होंने दावा किया कि "कल सुबह से मोटर खराब थी, लेकिन अब उसे सुधार लिया गया है और नगर निगम से पानी का टैंकर मंगवाकर व्यवस्था सामान्य कर दी गई है।"

लेकिन कैमरे पर दावों की हकीकत कुछ और ही नजर आई। अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर अस्पताल के पीछे एक 3000 लीटर का लोहे का टैंकर खड़ा कर दिया है।

दोपहर 12:41 बजे लोहे के टैंकर में उबलता पानी

प्रशासन की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम का जो लोहे का टैंकर भेजा गया है, वह खुले आसमान के नीचे चिलचिलाती धूप में खड़ा है। दोपहर के लगभग 12:41 बजे, जब आसमान से आग बरस रही है, उस लोहे के टैंकर का पानी उबलने की स्थिति में आ जाता है। मरीजों और उनके परिजनों को प्यास बुझाने के लिए यही खौलता हुआ गर्म पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मोटर खराब, प्यासे मरीज: अस्पताल के पंप हाउस की मोटर खराब होने के कारण यह पूरा संकट खड़ा हुआ, जिसे सुधारने में प्रशासन ने घंटों लगा दिए।

शौचालय इस्तेमाल के लायक नहीं: पानी न होने से अस्पताल के टॉयलेट का इस्तेमाल असंभव हो गया है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

केवल एक टैंकर का सहारा: 100 बिस्तर के इस बड़े अस्पताल में, जहां रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है, वहां सिर्फ एक कामचलाऊ टैंकर के भरोसे व्यवस्था छोड़ दी गई है।

बड़ा सवाल: जिस मातृ एवं शिशु अस्पताल में नवजातों और महिलाओं को सबसे ज्यादा देखभाल और स्वच्छता की जरूरत होती है, वहां 45 डिग्री के तापमान में पानी जैसी मूलभूत सुविधा का न होना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग जो दूसरों को एडवाइजरी बांटता है, वह अपने ही घर में पानी का इंतजाम क्यों नहीं कर पा रहा है?