200 से अधिक दानदाताओं ने गोसेवा आयोग को लिखा पत्र, संबलपुरी गोठान आनंदम पशु एवं पक्षी सेवा संस्था को ही सौंपने की अनुशंसा!!

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200 से अधिक दानदाताओं ने गोसेवा आयोग को लिखा पत्र, संबलपुरी गोठान आनंदम पशु एवं पक्षी सेवा संस्था को ही सौंपने की अनुशंसा!!

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- जिले के संबलपुरी गोठान को लेकर शहर के 200 से अधिक गोभक्त दानदाताओं, डॉक्टरों, वकीलों, व्यवसायियों और आम नागरिकों ने छत्तीसगढ़ गोसेवा आयोग, रायपुर को एक सामूहिक पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया है। दानदाताओं ने मांग की है कि संबलपुरी गोठान का संचालन वही संस्था करे जो पिछले कई वर्षों से निःस्वार्थ भाव से सैकड़ों घायल, दुर्घटनाग्रस्त और आश्रयविहीन गोवंश की सेवा कर रही है, यानी आनंदम पशु एवं पक्षी सेवा संस्था।

पत्र में दानदाताओं ने कहा है कि कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई गोठान योजना को भाजपा सरकार ने बंद कर दिया था। इसके बाद रायगढ़ नगर निगम ने जनहित में आनंदम संस्था को गोठान संचालन की अनुमति दी थी, ताकि गोसेवा का कार्य निर्बाध रूप से चलता रहे। संस्था अपनी निजी आर्थिक व्यवस्था और जनसहयोग से गोठान चला रही है।

दानदाताओं ने संस्था की अध्यक्ष श्रीमती पूनम द्विवेदी की भरपूर प्रशंसा की है। पत्र में लिखा है कि श्रीमती पूनम द्विवेदी पूरे रायगढ़ में “बेजुबानों की मां” के नाम से जानी जाती हैं। उनके कार्यों पर कभी कोई आक्षेप या विवाद नहीं रहा। मीडिया में भी उनकी सेवाओं की सर्वत्र सराहना हुई है।

दानदाताओं ने गोसेवा आयोग से आग्रह किया है कि गोधन न्याय योजना फिर से शुरू होने के बाद कुछ “छद्मवेशी” और “नवोदित गोसेवक” संस्थाएं सिर्फ सरकारी अनुदान के लालच में आगे आ रही हैं, जिन्होंने पहले कभी गोठान की ओर झांका तक नहीं। ऐसे लोग अब राजनीति और कूटनीति के जरिए गोठान हथियाने की कोशिश कर रहे हैं।

पत्र में चेतावनी दी गई है कि अगर राजनीतिक दबाव या अनुचित तरीके से संबलपुरी गोठान किसी दूसरी संस्था को दे दिया गया, तो सैकड़ों गोभक्त सड़क पर उतरेंगे। दानदाताओं ने स्पष्ट कहा है कि मासूम गोवंश को उनकी मौजूदा “मां” (श्रीमती पूनम द्विवेदी और आनंदम संस्था) से अलग नहीं किया जा सकता।

पत्र पर प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता के रूप में 20 सहित शहर के कई गणमान्य नागरिकों के हस्ताक्षर हैं।

गोसेवा प्रेमियों ने गोसेवा आयोग से तत्काल संज्ञान लेने और यह आश्वासन देने की मांग की है कि गोठान का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी और सेवा के आधार पर होगा, न कि राजनीतिक दबाव या लालच के आधार पर।

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