ऊपर मीठा-नीचे गरम, रेत के खेल में पक रही दलाली की खिचड़ी!

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ऊपर चाशनी, नीचे ज्वाला, रेत के खेल में दलाली का माला, खिचड़ी पकती, बिकता हर साला!

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- जिले में रेत का अवैध धंधा अब कारोबार नहीं, एक खुला खेल बन चुका है। न कानून का डर, न प्रशासन का खौफ। खुले मैदानों, खेतों और नदी किनारों पर रेत के पहाड़ खड़े हैं, मगर जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठे हैं — जैसे सब कुछ ‘ठीक-ठाक’ चल रहा हो।

आम आदमी की नजर में यह अवैध भंडारण है, लेकिन हकीकत में यह ‘सिस्टम की सहमति’ से चल रहा एक सुनियोजित खेल है। खनिज विभाग से लेकर थाना तक, सबकी चुप्पी बता रही है कि “दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है”।

हर रात दर्जनों ट्रैक्टर और हाइवा गाड़ियाँ बिना रोकटोक रेत ढोती हैं। कई इलाकों में तो गांव वालों ने खुद लिखित शिकायत भी दी गई कई बार, लेकिन कार्रवाई का नामोनिशान नहीं। लगता है अफसरों के कानों में रेत पड़ चुकी है — सुनना तो दूर, देखना भी बंद कर दिया है।

जानकारों की मानें तो इस खेल में कुछ रसूखदार नेताओं और अफसरों की मिलीभगत है। रेत के हर ट्रिप में कटता है मोटा कमीशन और बंटता है हिस्सा — नीचे से ऊपर तक। ऐसे में कौन कार्रवाई करेगा और किस पर?

अवैध खनन से नदियाँ सूख रही हैं, जलस्तर गिर रहा है, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ता। रेत माफिया इतने बेखौफ हैं कि पत्रकारों को भी धमकाने लगे हैं — जैसे लोकतंत्र नहीं, गुंडाराज चल रहा हो।

अब सवाल यह नहीं कि रेत का अवैध भंडारण कहां हो रहा है, सवाल यह है कि किसके कहने पर हो रहा है?

अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो यह ‘रेत का खेल’ एक दिन रायगढ़ की छवि को ऐसी धूल में मिला देगा कि पहचानना मुश्किल हो जाएगा।

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