चावल उत्सव के बीच घटिया राशन का खेल, सिलाई बोरी में भ्रष्टाचार की गंध!

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रायगढ़@टक्कर न्यूज :- छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर सरकार चावल उत्सव की धूम मचा रही है, वहीं दूसरी ओर रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के सिथरा परिसर से शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में घटिया क्वालिटी का चावल सप्लाई कर हितग्राहियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यह मामला तब सामने आया जब 1 जून, रविवार को धरमजयगढ़ के सिथरा परिसर से कूड़ेकेला उचित मूल्य दुकान के लिए भेजे गए चावल की बोरियों में पाला चावल पाया गया, जो न केवल घटिया क्वालिटी का है, बल्कि कुछ बोरियां हाथ से सिली हुई थीं।जानकारी के मुताबिक, सरकार ने जून, जुलाई और अगस्त—तीन महीनों का राशन एक साथ वितरण करने की घोषणा की है। लेकिन इस नेक पहल के बीच कूड़ेकेला की शासकीय दुकान में पहुंचा यह खराब चावल कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा राशन की गुणवत्ता की जांच में लापरवाही बरती जा रही है? या फिर इसके पीछे कोई बड़ा भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है?

हमारे संवाददाता ने जब इस मामले की पड़ताल की और वेयर हाउस के अधिकारी अखिलेश तिवारी से बात की, तो उनका जवाब था, “गलती से खराब चावल चला गया होगा, हम उसे वापस ले आएंगे।” लेकिन यह जवाब कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया। आखिर यह खराब चावल वेयर हाउस में कब से पड़ा था? यह किस डीलर का है? इसकी क्वालिटी चेक करने की जिम्मेदारी किसकी थी और कब चेक किया गया?

वहीं, धरमजयगढ़ वेयर हाउस के क्वालिटी ऑफिसर सीताराम महिलांगे का कहना है, “मैं हर बोरी की जांच करता हूं और केवल सही क्वालिटी का चावल ही भेजता हूं। अगर कोई बोरी फट जाती है, तो उसे सिलकर भेजा जाता है।” लेकिन उनका यह दावा हकीकत से कोसों दूर नजर आता है, क्योंकि हितग्राहियों तक पहुंच रहा घटिया चावल उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।

यह मामला केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है। अगर वेयर हाउस से इस तरह का चावल अन्य दुकानों में भी पहुंच रहा है, तो यह गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों के साथ घोर अन्याय है। सरकार की मंशा भले ही गरीबों तक मुफ्त राशन पहुंचाने की हो, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार इस नेक मंशा को पलीता लगा रहा है।

अब सवाल यह है कि क्या इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या हितग्राहियों को उनका हक—साफ और गुणवत्तापूर्ण राशन—मिल पाएगा? फिलहाल, इस मामले ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है और वे प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।

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