भटके हिंदू घर वापसी का समय आ गया!







रायगढ़@टक्कर न्यूज :- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कोरबा पहुंचकर छत्तीसगढ़ के नए धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 पर मसीही समाज के विरोध के बीच हिंदू समाज को सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब भटके हुए हिंदुओं की घर वापसी का समय आ गया है और मिशनरियों का धर्मांतरण का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शनिवार को कोरबा के काक्षप क्षेत्र में आयोजित पांच दिवसीय हनुमंत कथा के पहले दिन विशाल श्रद्धालु जमावड़े के बीच शास्त्री जी ने कथा के दौरान धर्मांतरण पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने आसपास सक्रिय मिशनरियों की ओर इशारा करते हुए साफ कहा, “यहां आसपास हालेलुया वाले भी रहते हैं… उनको भी ठहरी मारी जाएगी। अब यह खेल नहीं चलेगा।”
शास्त्री जी ने आगे कहा, “जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी घर वापसी कराई जाएगी। हम कोरबा, रायगढ़, जशपुर और बिलासपुर के हिंदुओं से प्रार्थना करते हैं कि लोगों को घर वापसी करनी है… यही सही मौका है।”
उन्होंने चुटकी भी ली। कोरबा को कोयला उत्पादन का केंद्र बताते हुए कहा, “अगर कोरबा के लोग कोयला देना बंद कर दें तो मध्य प्रदेश में बिजली नहीं जलेगी… वहां अंधेरा छा जाएगा।”
भावुक अंदाज में धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को छत्तीसगढ़ का भांजा बताते हुए कहा,
“यह माता कौशल्या की धरती है। मैं यहां का भांजा हूं… यहां मेरा पूरा अधिकार है।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ सरकार ने नए धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 को पेश किया है। विधेयक में अवैध धर्मांतरण पर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सामान्य मामले में 7 से 10 साल की जेल और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना, जबकि नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़े वर्ग के मामलों में सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल जेल और 10 लाख जुर्माना लगेगा। सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। एक बार सजा काट चुके व्यक्ति द्वारा दोबारा अवैध धर्मांतरण कराने पर आजीवन कारावास का प्रावधान भी रखा गया है।
सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह कानून बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए लाया गया है। पुराना 1968 का कानून अब अपर्याप्त माना गया है।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के तीखे बयान ने कोरबा के हिंदू समाज में जोश भर दिया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने उनके हर वाक्य पर तालियां बजाकर समर्थन जताया। अब देखना यह है कि शास्त्री जी का यह आह्वान छत्तीसगढ़ के दूर-दराज के इलाकों तक कितना असर छोड़ता है और मसीही समाज के विरोध के बीच नया विधेयक कितनी मजबूती से लागू होता है।













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