रायगढ़ RTO फर्जी DL घोटाला: साल बीत गया, कार्रवाई शून्य! मंत्री केदार कश्यप कब तोड़ेंगे चुप्पी?

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RTO में फर्जी DL घोटाला: साल बीता, नया साल आ गया, मंत्री केदार कश्यप कब लेंगे संज्ञान?

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- रायगढ़ जिले के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) जारी करने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन जिला कलेक्टर द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतकर्ताओं की आवाजें दब रही हैं, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में फर्जी लाइसेंस की भूमिका को लेकर सवाल उठते जा रहे हैं। क्या परिवहन मंत्री केदार कश्यप इस घोटाले पर चुप्पी तोड़ेंगे और विभागीय जांच का आदेश देंगे? या फिर यह मामला फाइलों में दफन हो जाएगा?

क्या मामले पर परिवहन मंत्री करेंगे कार्यवाही या यूंही उड़ीसा राज्य को होता रहेगा राजस्व का नुकसान? क्या जनता की जान का ख्याल नहीं?

मामले की शुरुआत पिछले साल हुई, जब एक स्थानीय शिकायतकर्ता ने आरटीओ विभाग में फर्जी डीएल जारी करने के आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। शिकायत में दावा किया गया था कि बिना उचित परीक्षा और दस्तावेजों के लाइसेंस बनाए जा रहे हैं, जो सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। लेकिन महीनों बीतने के बावजूद, कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने सबूतों के साथ ज्ञापन दिया, लेकिन आरटीओ के अधिकारी बेखौफ घूम रहे हैं। कलेक्टर साहब ने वादा किया था, लेकिन अब तो फोन भी नहीं उठाते।”

इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज है। कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष ने आरटीओ पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा था कि फर्जी लाइसेंस का जाल फैला हुआ है और इसमें बड़े अधिकारियों की मिलीभगत है। उन्होंने मांग की थी कि तत्काल जांच कमिटी गठित की जाए। अध्यक्ष ने बयान में कहा, “यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ है। फर्जी ड्राइवर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। सरकार क्या इंतजार कर रही है – किसी बड़ी त्रासदी का?”

परिवहन मंत्री केदार कश्यप से इस मामले पर बार-बार सवाल किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। क्या मंत्री जी संज्ञान लेंगे और आरटीओ की सफाई अभियान चलाएंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी लाइसेंस की वजह से छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं की दर में इजाफा हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल राज्य में 5,000 से ज्यादा दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें से कई में ड्राइवरों के लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठे।

सूत्रों का कहना है कि आरटीओ में दलालों का बोलबाला है, जो पैसे लेकर बिना टेस्ट के लाइसेंस जारी करवा देते हैं। अगर जांच हुई तो कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं। जनता अब सवाल कर रही है – क्या सड़क सुरक्षा सिर्फ नारे तक सीमित रहेगी? या सरकार फर्जीवाड़े पर लगाम लगाएगी? मामले की गंभीरता को देखते हुए, उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार की जड़ों को और मजबूत करेगा।

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