रायगढ़: ग्रीन पार्क और ग्रीन वैली कॉलोनी में आदिवासियों की जमीन पर डाका; खसरा नं. बना विवाद की जड़!!

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रायगढ़: ग्रीन पार्क और ग्रीन वैली कॉलोनी में आदिवासियों की जमीन पर डाका; खसरा नं. बना विवाद की जड़!!

रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित पॉश कॉलोनी ‘ग्रीन पार्क’ और ‘ग्रीन वैली’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। मामला रसूखदार कॉलोनाइजरों द्वारा आधा दर्जन आदिवासियों की पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे और उनके पुश्तैनी रास्तों को रोकने का है। ताज़ा विवाद विशेष रूप से खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की आदिवासी भूमि को लेकर गहरा गया है, जिसे रसूख के दम पर दबाने की कोशिश की जा रही है।

खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की आदिवासी भूमि क्या है पूरा विवाद?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की भूमि राजस्व अभिलेखों में आदिवासियों के नाम दर्ज है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके ठीक उलट है। कॉलोनी संचालकों ने इस भूमि की घेराबंदी कर न केवल निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, बल्कि आदिवासियों के आवागमन के एकमात्र मार्ग को भी बाउंड्री वॉल खड़ी कर पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।

रसूख की बाउंड्री वॉल, बेबस आदिवासी:

आदिवासी परिवारों का आरोप है कि कॉलोनाइजर ने अपनी सीमा का विस्तार करते हुए खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की आदिवासी भूमि और उससे लगी अन्य जमीनों को अवैध रूप से अपने कब्जे में ले लिया है।

• रास्ता बंद: आदिवासियों को अपने ही खेतों और घरों तक जाने के लिए अब मीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

• प्रशासनिक चुप्पी: पीड़ितों ने बताया कि कई बार राजस्व विभाग में शिकायत के बाद भी सीमांकन की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

• दबाव का खेल: आरोप है कि कॉलोनाइजर आदिवासियों को नाममात्र की कीमत पर जमीन बेचने या परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।

“खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की आदिवासी भूमि हमारी पहचान और आजीविका का साधन है। रसूखदारों ने इसे चारों ओर से घेर लिया है और अब हमें हमारी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है। क्या कानून सिर्फ अमीरों के लिए है?” — पीड़ित परिवार का एक सदस्य

प्रशासन की भूमिका पर सवाल?

मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील और व्यस्त इलाके में सरेआम खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की आदिवासी भूमि पर हो रहे इस “बेजा कब्जे” ने नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कॉलोनी का ले-आउट पास करते समय इन निजी जमीनों और रास्तों की अनदेखी की गई?

रायगढ़ के इन तथाकथित “ग्रीन” प्रोजेक्ट्स की चमक के पीछे आदिवासियों के हक को कुचला जा रहा है। यदि प्रशासन ने जल्द ही खसरा क्रमांक. 199/1,199/2,199/3, 200, 210/4, सहित अन्य 6 खसरे की आदिवासी भूमि का निष्पक्ष सीमांकन नहीं कराया, तो यह आक्रोश किसी बड़ी कानून-व्यवस्था की स्थिति को जन्म दे सकता है।

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