खुला फर्जी DL का खतरनाक खेल: ओडिशा के लोग फर्जी किराया पेपर से बनवा रहे लाइसेंस, न RTO पूछताछ, न पुलिस वेरिफिकेशन – देश की सुरक्षा पर सवाल!
ओडिशा के लोग फर्जी किराया, परिवहन कार्यालय से ले रहे छःग का लाइसेंस?

रायगढ़@टक्कर न्यूज :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का गंभीर मामला सामने आया है। जिले के सामाजिक कार्यकर्ता विक्रांत ने जिलाधिकारी रायगढ़ को लिखित शिकायत देकर खुलासा किया है कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के सैकड़ों लोग स्थानीय एजेंटों की मदद से फर्जी किराया समझौता और मकान मालिक के घोषणा-पत्र तैयार कर रायगढ़ का पता दिखाकर आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिला परिवहन विभाग द्वारा इन आवेदनों का कोई स्थानीय सत्यापन नहीं किया जा रहा है।
शिकायत में तिवारी ने बताया कि यह धांधली पिछले कई वर्षों से चल रही है। कुछ असामाजिक तत्व और दलालों का संगठित गिरोह स्टांप पेपर पर फर्जी किराया एग्रीमेंट तैयार करवाता है, जिसमें मकान मालिक का घोषणा-पत्र भी संलग्न होता है। ये दस्तावेज जिला परिवहन कार्यालय में जमा करने के कुछ ही दिनों में ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। पुलिस वेरिफिकेशन या स्थानीय पता जाँच जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है।
तिवारी ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बताया बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी करार दिया। उनका कहना है कि फर्जी पता दिखाकर लाइसेंस लेने वाला व्यक्ति अगर भविष्य में कोई अपराध करता है या सड़क दुर्घटना में शामिल होता है तो असली अपराधी का पता लगाना लगभग असंभव हो जाएगा। इससे न सिर्फ कानून-व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि अवैध गतिविधियों में भी ऐसे दस्तावेजों का दुरुपयोग होने की आशंका है।
यदि ऐसा चलता रहा तो कही न कही इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी कोई बड़ा फर्जीवाड़ा जैसे सरकारी योजना का भी हो सकता है दुरुपयोग। इससे स्थानीय निवासियों के हक पर डाका पड़ सकता और सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है। स्टांप पेपर और नोटरी के दुरुपयोग से राजकोषीय हानि अलग से हो रही है।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से निम्नलिखित मांगें की हैं:
1. पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
2. पिछले 2-3 वर्षों में किराया समझौता या घोषणा-पत्र के आधार पर जारी सभी ड्राइविंग लाइसेंस की पुलिस वेरिफिकेशन की जांच कराई जाए।
3. फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंटों, नोटरी, मकान मालिकों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. भविष्य में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए स्थानीय पता सत्यापन को पूरी तरह अनिवार्य किया जाए।
शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक और जिला परिवहन अधिकारी रायगढ़ को भी भेजी गई है।
स्थानीय लोगों में इस खुलासे के बाद भारी रोष है। जुटमिल, कोतवाली, चक्रधरनगर, कोतरा रोड, पुसौर सहित कई क्षेत्रों के नागरिकों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार बाहर से आए लोग किराए का मकान लेकर भी फर्जी दस्तावेज बनवाते हैं और सामान लेकर आते है बोल कर आते ही नहीं हैं।
रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर दूर ओडिशा की सीमा होने के कारण यहाँ आवागमन बहुत आसान है। इसी का फायदा उठाकर यह रैकेट फल-फूल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गंभीर शिकायत पर कब और कैसी कार्रवाई की जाती है। क्या फर्जी लाइसेंस के इस जाल को तोड़ा जाएगा या यह धंधा यूँ ही चलता रहेगा? यह आने वाला समय बताएगा।



