रायगढ़@TAKKAR न्यूज़ :- जब धनबल का नशा इंसान के सिर पर चढ़कर बोलता है, तो वह समाज, नैतिकता और कानून सबको अपने जूतों की नोक पर समझने लगता है। रायगढ़ जिले में विकास का चोला ओढ़कर विनाश का एक ऐसा ही वीभत्स नंगा नाच 'ओम रूपेश' प्लांट के मालिक और रसूखदार उद्योगपति शंकर लाल अग्रवाल द्वारा खेला जा रहा है। यह कहानी किसी छिटपुट कब्जे की नहीं, बल्कि एक उद्योगपति की उस बेलगाम और खौफनाक 'भू-माफियागिरी' की है, जिसने एक पूरे गाँव की सांसें और उनकी पुरखौती धरोहर को ही अपनी ईंटों की दीवार में चुनवा दिया है। इस बात का चीख-चीख कर गवाह दे रही है कि कैसे लाखा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम चिराई पानी में उद्योगपति शंकर लाल अग्रवाल ने अपनी औद्योगिक हवस को बुझाने के लिए गाँव के 50 साल पुराने 'कोलीमाली' तालाब की सरेआम हत्या कर दी है। जो तालाब कभी गाँव के मवेशियों की प्यास बुझाता था और निस्तारी का मुख्य केंद्र था, आज उस तालाब की छाती पर शंकर लाल अग्रवाल के अहंकार की एक विशाल गगनचुंबी बाउंड्री वॉल सीना ताने खड़ी है।

इस रसूखदार उद्योगपति की दबंगई और दुस्साहस का आलम यह है कि इसने सिर्फ ग्रामीणों की भावनाओं को ही नहीं रौंदा, बल्कि सरकारी खजाने को भी अपनी जागीर समझ लिया है। यह वही कोलीमाली तालाब है जिसे बचाने और संवारने के लिए शासन ने मनरेगा योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर इसके गहरीकरण का काम करवाया था। लेकिन शंकर लाल अग्रवाल के ओम रूपेश प्लांट ने सरकार की इस पूरी योजना को ही हाईजैक कर लिया। धरातल पर आज वह तालाब अपने मूल स्वरूप में मौजूद ही नहीं है। पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस प्राकृतिक जल स्रोत के लगभग दो से ढाई एकड़ हिस्से को इस उद्योगपति ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है। अपने इस अवैध साम्राज्य को रातों-रात खड़ा करने के लिए शंकर लाल अग्रवाल ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए तालाब में प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित भारी-भरकम जेसीबी मशीनें उतार दीं। तालाब के प्राकृतिक पानी की निकासी को बेरहमी से रोक दिया गया, 10 से 20 फीट गहरे जानलेवा गड्ढे खोद दिए गए और किनारों को मिट्टी से पाटकर अपनी हदों को बेशर्मी से आगे बढ़ा लिया गया।

शंकर लाल अग्रवाल का यह कृत्य केवल एक अतिक्रमण नहीं है, बल्कि यह कानून के राज को दी गई एक सीधी और नंगी चुनौती है। कोटवारी जमीन के नाम पर प्रशासन से दूसरी जगह जमीन लेकर, बीच में पड़ने वाले सदियों पुराने शासकीय रास्ते (धरसा) और मेड़ पर भी अपना अवैध पक्का कब्जा जमा लेना यह साबित करता है कि यह उद्योगपति खुद को हर नियम-कायदे से ऊपर मानता है। जिस तरह से ओम रूपेश प्लांट के भीतर से मजदूरों और मशीनों का इस्तेमाल कर इस तालाब का सीना चीरा गया है, वह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शंकर लाल अग्रवाल को न तो ग्रामीणों की प्यास से कोई मतलब है और न ही प्रकृति के विनाश से। उनका एकमात्र लक्ष्य येन-केन-प्रकारेण अपनी औद्योगिक जमीन का विस्तार करना है, चाहे इसके लिए एक पूरे गाँव के अस्तित्व को ही क्यों न मिटाना पड़े। यह वह औद्योगिक आतंकवाद है, जो अपने मुनाफे के लिए सदियों पुरानी ग्रामीण संस्कृति को कंक्रीट के जंगलों में दफन कर रहा है।

लेकिन अब उद्योगपति शंकर लाल अग्रवाल के पाप का घड़ा पूरी तरह से भर चुका है। सालों तक अपने ही अधिकारों का सरेआम कत्ल होते देख चुके चिराई पानी के ग्रामीणों के भीतर अब लाचारी की जगह एक धधकते ज्वालामुखी ने ले ली है। ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है और वे इस रसूखदार की ईंट से ईंट बजाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने अत्यंत कड़े और दो-टूक शब्दों में इस भू-माफिया को खुली चेतावनी दे दी है कि यदि उनके पुरखौती कोलीमाली तालाब से यह अवैध बाउंड्री वॉल तत्काल प्रभाव से नहीं ढहाई गई और तालाब को उसका मूल स्वरूप वापस नहीं लौटाया गया, तो ओम रूपेश प्लांट को इसका भयंकर अंजाम भुगतना होगा। गाँव वाले अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। वे एक भीषण उग्र आंदोलन का बिगुल फूकेंगे, सड़कों पर चक्का जाम करेंगे और शंकर लाल अग्रवाल की कंपनी के मुख्य द्वार पर ऐसी तालाबंदी करेंगे कि उनके अहंकार के इस महल की नींव हिल जाएगी। टक्कर न्यूज़ इस महा-खुलासे के जरिए इस उद्योगपति के काले कारनामों को जनता के सामने ला रहा है, ताकि रायगढ़ को पता चले कि विकास के सफेदपोश नकाब के पीछे किस कदर एक खौफनाक भू-माफिया काम कर रहा है। अब देखना यह है कि शंकर लाल अग्रवाल अपने इस गिरेबान में झांककर अपनी गलती सुधारते हैं, या फिर ग्रामीणों के उग्र जन-आक्रोश की आग में उनके इस अवैध साम्राज्य की दीवारें जलकर खाक हो जाती हैं!