रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जिले में औद्योगिक प्रदूषण और पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सपनई के आश्रित ग्राम बलभद्रपुर में एमएसपी उद्योग द्वारा निर्धारित अनुमति से कई गुना अधिक अवैध फ्लाईऐश पाटकर पूरा पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पर्यावरण संरक्षण मंडल को बार-बार लिखित शिकायतें सौंपे जाने के बावजूद विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। पर्यावरण विभाग के इस लचर और संदिग्ध रवैये के खिलाफ अब स्थानीय ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रायगढ़ को बाकायदा लिखित सूचना सौंपते हुए 26 अगस्त को पर्यावरण संरक्षण मंडल कार्यालय के समक्ष जंगी एक दिवसीय धरना प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन की दो-टूक चेतावनी दी गई है।
अनुमति 1.60 लाख टन की, पाट दी 10 लाख टन से अधिक राखड़
एसडीएम को सौंपे गए शिकायती पत्र में उजागर किया गया है कि उद्योग प्रबंधन को ग्राम बलभद्रपुर स्थित संबंधित भूमि पर मात्र 1 लाख 60 हजार टन फ्लाईऐश भरने की विधिवत अनुमति दी गई थी। इस वैधानिक अनुमति की आड़ में उद्योग द्वारा नियम-कायदों को ताक पर रखकर लगातार अवैध डंपिंग की जाती रही। देखते ही देखते मौके पर फ्लाईऐश का एक विशालकाय पर्वत खड़ा कर दिया गया, जिसमें अनुमानित रूप से 10 लाख टन से भी अधिक खतरनाक राखड़ बेखौफ तरीके से डंप की जा चुकी है। यह सीधा-सीधा शासकीय नियमों का घोर उल्लंघन और पर्यावरण के साथ आपराधिक खिलवाड़ है।
हवा, मिट्टी और जंगल जहरीले; ग्रामीणों में बीमारियां और वन्यजीवों पर संकट
बलभद्रपुर क्षेत्र में अवैध रूप से खड़े किए गए इस राखड़ के पहाड़ से उठने वाली जहरीली धूल ने पूरे इलाके का जनजीवन नरक बना दिया है। आसपास की उपजाऊ कृषि भूमि की मिट्टी बंजर हो रही है, हवा में लगातार उड़ते राख के बारीक कणों से वायुमंडल दूषित हो चुका है और समीपस्थ वन क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो रहा है। राखड़ के इस अनियंत्रित फैलाव का सीधा असर स्थानीय रहवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जहां लोग सांस, फेफड़े और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके साथ ही इलाके के वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास पर गहरा संकट खड़ा हो गया है और वे तेजी से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रहे हैं।
पर्यावरण विभाग पर उद्योग को खुला संरक्षण देने का संगीन आरोप
शिकायतकर्ता ने पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए उद्योग प्रबंधन को खुला संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया है। मामले को लेकर क्षेत्रीय कार्यालय में विगत 13 अप्रैल 2026 और फिर 12 मई 2026 को सिलसिलेवार साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने मौके का मुआयना करने या उद्योग के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठाई। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी साफ तौर पर दर्शाती है कि आम जनता की सेहत और प्राकृतिक संपदा को ताक पर रखकर उद्योग के अवैध कृत्यों पर पर्दा डाला जा रहा है।
मौके पर निष्पक्ष जांच और 1500 रुपये प्रति टन पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की मांग
प्रशासन को सौंपे गए मांग पत्र में स्पष्ट मांग रखी गई है कि ग्राम बलभद्रपुर में एमएसपी उद्योग द्वारा बनाए गए अवैध फ्लाईऐश डंपिंग स्थल की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि 1 लाख 60 हजार टन की तय सीमा से अतिरिक्त डंप की गई वास्तविक मात्रा का सटीक खुलासा हो सके। इसके अलावा निर्धारित नियमों के तहत जितनी भी अवैध फ्लाईऐश पाई जाती है, उस पर प्रति टन 1500 रुपये की दर से भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) वसूल कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह पूरी जांच प्रक्रिया शिकायतकर्ताओं की प्रत्यक्ष उपस्थिति में संपन्न कराने की मांग की गई है।
26 अगस्त को पर्यावरण विभाग पर टंगेगा उद्योग का सांकेतिक बोर्ड, बड़े आंदोलन की तैयारी
विभागीय मिलीभगत और निष्क्रियता के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने अनोखा विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। आगामी 26 अगस्त को पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर न केवल जोरदार एक दिवसीय धरना दिया जाएगा, बल्कि विभाग की निष्पक्षता पर तंज कसते हुए कार्यालय पर एमएसपी उद्योग का सांकेतिक बोर्ड भी लगाया जाएगा। प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेताया गया है कि यदि इस सांकेतिक प्रदर्शन के बाद भी जिम्मेदार विभाग नींद से नहीं जागा और उद्योग के खिलाफ ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर उग्र व चरणबद्ध जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।
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