रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- रायगढ़ शहर के जुटमिल थाना क्षेत्र में एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक गरीब व्यवसायी के जीवनयापन के एकमात्र साधन, उसके ठेले (गुमटी) को एक ठेकेदार के ट्रैक्टर चालक द्वारा न केवल बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया, बल्कि दुर्घटना की आड़ में ठेले का ताला तोड़कर हजारों रुपये का सामान भी चोरी कर लिया गया। पीड़ित ने इस घटना को अत्यंत संदेहास्पद बताते हुए पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य के लिए ठेले को वहां से हटाना ही था, तो इसके लिए कोई वैध प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई और बिना सूचना दिए किसी गरीब की रोजी-रोटी को इस तरह कैसे रौंद दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, जुटमिल क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाले एक स्थानीय व्यवसायी, जो ठेला लगाकर अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण करता है, ने प्रतिदिन की तरह अपना ठेला एक कॉलोनी के समीप स्थित ग्राउंड में सुरक्षित खड़ा किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब वह अपने किसी व्यक्तिगत एवं घरेलू कार्य के सिलसिले में घर से बाहर निकला और अपने ठेले के पास पहुंचा, तो वहां का नजारा देखकर वह स्तब्ध रह गया। पास ही चल रहे एक कार्य में लगे ठेकेदार के ट्रैक्टर चालक ने घोर लापरवाही और कथित आपराधिक मंशा के साथ उसके ठेले को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस टक्कर से आजीविका का वह साधन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। शुरुआती नजर में यह लापरवाही से हुई दुर्घटना का मामला प्रतीत हो रहा था, लेकिन जब पीड़ित ने करीब जाकर मुआयना किया तो हकीकत कुछ और ही निकली।
पीड़ित ने थाने में दी गई अपनी शिकायत में पुलिस को बताया है कि जब उसने क्षतिग्रस्त ठेले का बारीकी से निरीक्षण किया, तो पाया कि ठेले में लगे ताले टूटे हुए थे। इसके साथ ही ठेले के भीतर रखा करीब 5,000 (पांच हजार) रुपये मूल्य का सामान पूरी तरह से गायब था। घटनास्थल की मौजूदा स्थिति और टूटे हुए तालों को देखकर यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि इस कृत्य को महज एक दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया है, जबकि इसके पीछे मुख्य उद्देश्य ठेले का ताला तोड़कर उसमें रखे सामान की चोरी करना था। घटनास्थल पर मौजूद ट्रैक्टर के चक्कों के गहरे निशान भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि ट्रैक्टर को ठेले के बेहद करीब लाया गया था। पीड़ित का सीधा सवाल है कि यदि उस स्थान से गुमटी को हटाना आवश्यक था, तो उसे पहले मौखिक रूप से क्यों नहीं कहा गया? किसी भी नियम के तहत उसे कोई पूर्व सूचना या नोटिस भी जारी नहीं किया गया। बिना कुछ बताए सीधे ट्रैक्टर से ठेले को नुकसान पहुंचाना और फिर वहां से सामान का गायब हो जाना पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस मनमानी की हद तो तब हो गई जब इस मामले में जवाबदेही की बात आई। जब इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो वहां मौजूद इंजीनियर ने पूरी तरह से अपना पल्ला झाड़ लिया। इंजीनियर का दो टूक कहना है कि यह पीडब्ल्यूडी (PWD) का काम है, इसलिए अब जो भी है वह ठेकेदार जाने और पीडब्ल्यूडी जाने। अधिकारियों और ठेकेदार के इस अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से पीड़ित व्यवसायी को भारी आर्थिक और मानसिक क्षति का सामना करना पड़ा है। इस अन्याय के खिलाफ पीड़ित ने जुटमिल थाने पहुंचकर पुलिस को लिखित सूचना सौंप दी है। अपनी शिकायत में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से प्रार्थना की है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित ठेकेदार और उस ट्रैक्टर चालक के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाए। इसके अलावा, मामले की सूक्ष्मता से जांच कर चोरी हुए सामान की बरामदगी करने और दोषियों को सजा दिलाकर न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
इस मामले में ठेकेदार पंकज अग्रवाल से उनका पक्ष लिया गया, उन्होंने अपने पक्ष में कहा मै जांच करवाता हु, उसके बाद वे फोन उठाना बंद कर दिए। इस मामले पर स्थानीय थाना के स्टाफ ने भी उनसे संपर्क किया पर वे थाने के स्टाफ का भी फोन नहीं उठा रहे, जिससे ऐसा प्रतीत होता है घटना नहीं सोची समझी साजिश है। हालांकि अब देखना यह है इस मामले में पुलिस किन धाराओं के तहत अपराध दर्ज करती है।
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