रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- शिक्षा के मंदिर जब प्रशासनिक लापरवाही और तानाशाही के यातना गृह में तब्दील हो जाएं, तो छात्रों के आक्रोश का ज्वालामुखी फटना तय है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित एकमात्र शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में इन दिनों अव्यवस्था और बदहाली का ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राएं शुद्ध पानी और सुरक्षित माहौल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, लेकिन उनके हिस्से में केवल काई वाला दूषित पानी, करंट मारती खिड़कियां और जहरीले सांपों का खौफ ही आया है। जुल्म की इंतेहा तो तब हो गई, जब इन बेबस छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बैनर तले अपने हकों के लिए आवाज उठाने की कोशिश की, तो कॉलेज प्रबंधन ने लोकतंत्र का सरेआम गला घोंटते हुए उन्हें हॉस्टल में ही बंधक बना लिया। यह कोई मामूली घटना नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को कुचलने का एक बेहद क्रूर और आपराधिक प्रयास है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
नरक से बदतर हॉस्टल: सांपों का डेरा और करंट का साया..
कॉलेज के हॉस्टल की दुर्दशा किसी भी संवेदनशील इंसान के रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। एबीवीपी के जिला संयोजक शिवम मिश्रा ने इस बदहाली की भयानक परतें खोलते हुए बताया कि हॉस्टल की इमारत इस कदर जर्जर हो चुकी है कि दीवारें ढह रही हैं और बारिश के दिनों में कमरों में लगातार पानी टपकता रहता है। साफ-सफाई का आलम यह है कि पिछले चार सालों से यहां ढंग से झाड़ू तक नहीं लगी है, जिसके कारण हॉस्टल परिसर में बड़ी-बड़ी और जंगली घास उग आई है। इस जंगल में तब्दील हो चुके परिसर में आए दिन जहरीले सांप निकलते रहते हैं, जिससे छात्रों की जान हर पल सांसत में फंसी रहती है।
सबसे बड़ा और जानलेवा संकट पीने के पानी का है। हॉस्टल में मौजूद टंकियों के पानी में इतनी मोटी काई जम चुकी है कि वह पानी पीने तो दूर, छूने लायक भी नहीं बचा है। प्रथम सेमेस्टर के छात्र आनंद कुमार ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि पानी बेहद दूषित है और परिसर में फैली गंदगी के कारण मच्छरों का इतना भारी आतंक है कि रात को सोना मुहाल हो गया है। मजबूरन इन छात्रों को एक किलोमीटर दूर से पीने का पानी अपनी पीठ पर ढोकर लाना पड़ रहा है। जब छात्रों ने मच्छरों से बचने के लिए प्रबंधन से मच्छरदानी की गुहार लगाई, तो उन्हें कीटनाशक रसायनों का इस्तेमाल करने की खोखली और अमानवीय नसीहत दे दी गई। इतना ही नहीं, दरवाजों और खिड़कियों में बारिश के कारण बिजली का करंट दौड़ रहा है, जो किसी भी दिन एक बड़े और जानलेवा हादसे को न्योता दे सकता है।
तानाशाही की पराकाष्ठा: आवाज दबाने के लिए छात्रों को किया कैद..
इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज और खौफनाक पहलू वह है, जब कॉलेज प्रशासन ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए तानाशाही का खुला खेल खेला। जब एबीवीपी और हॉस्टल के आक्रोशित छात्रों ने अपनी जायज मांगों को लेकर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की, तो प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। जैसे ही उन्हें यह पता चला कि छात्र भारी संख्या में धरना देने वाले हैं, हॉस्टल के केयरटेकर और प्रबंधन के लोगों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत मुख्य गेट और छात्रों के कमरों का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।
छात्रों को उनके ही कमरों में बंधक बना दिया गया ताकि वे किसी भी कीमत पर बाहर निकलकर इस उग्र प्रदर्शन का हिस्सा न बन सकें। हद तो तब हो गई जब एक निडर छात्र ने इस तानाशाही कृत्य का वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो प्रबंधन के लोगों ने दबंगई दिखाते हुए उसका मोबाइल तक छीनने की हिंसक कोशिश की। यह कृत्य स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शिक्षा के इस पवित्र मंदिर में छात्रों के मौलिक अधिकारों की सरेआम हत्या की जा रही है और उनकी जायज आवाज को खौफ के साए में दबाया जा रहा है।
नशेड़ियों का अड्डा बना परिसर, सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे..
सुरक्षा के मोर्चे पर भी यह शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पूरी तरह से फेल साबित हुआ है। हॉस्टल का ग्राउंड बाहरी और असामाजिक तत्वों के लिए खुली छूट वाला नशे का अड्डा बन गया है। बाहरी लोग बेखौफ होकर परिसर में दाखिल होते हैं और खुलेआम शराब तथा गांजे का सेवन करते हैं। छात्रों का गंभीर आरोप है कि जब उन्होंने इस गुंडागर्दी का विरोध किया, तो बाहरी लोगों ने हॉस्टल में घुसकर एक छात्र की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस बेहद गंभीर और आपराधिक घटना पर वहां के वार्डन का रवैया जले पर नमक छिड़कने जैसा था। वार्डन ने छात्रों को सुरक्षा का भरोसा देने के बजाय यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका आपसी मामला है और अगर वे बाहर जाएंगे तो उन्हें मार खानी ही पड़ेगी। यह जवाब सुनकर साफ लगता है कि कॉलेज प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है।
जो यहीं से पढ़े, वही बने अनजान: प्रभारी प्राचार्य की खोखली लीपापोती..
इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि इस कॉलेज के जो नियमित प्राचार्य हैं, वे खुद इसी पॉलिटेक्निक कॉलेज से पढ़ाई कर पास आउट हुए हैं। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस माटी ने उन्हें तराशा, आज उसी की यह दुर्दशा है और वे इससे पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं। वर्तमान में वे छुट्टी पर हैं, इसलिए कॉलेज का प्रभार अतिरिक्त रूप से प्रभारी प्राचार्य बी.के. गुप्ता संभाल रहे हैं। धरने के दौरान जब छात्रों ने बी.के. गुप्ता को घेरा, तो उनके पास अपनी नाकामी छिपाने के लिए केवल रटे-रटाए बहाने थे।
प्रभारी प्राचार्य बी.के. गुप्ता ने मीडिया के सामने सफाई देते हुए कहा कि कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भारी कमी है और इतने बड़े कैंपस में तीन सुरक्षा गार्ड स्वीकृत हैं, जिसके चलते एक शिफ्ट में केवल एक ही सुरक्षा गार्ड मौजूद रह पाता है। उन्होंने बिल्डिंग के 50 साल से अधिक पुराना होने का हवाला देते हुए कहा कि मरम्मत का काम एक झटके में नहीं, बल्कि किश्तों में ही हो पाता है। छात्रों को बंधक बनाने के संगीन आरोप पर उन्होंने बड़ी ही आसानी से कह दिया कि केयरटेकर को हिदायत दे दी गई है कि दरवाजे समय पर खुलें और भविष्य में ऐसी कोई अवांछित हरकत न हो। यह बेरुखी और लीपापोती का रवैया छात्रों के घावों को और गहरा करने का काम कर रहा है।
सफेद शर्ट वाले नायब तहसीलदार की एंट्री और 7 दिन का खुला अल्टीमेटम..
जब छात्रों का गुस्सा बेकाबू हो गया और एबीवीपी ने कॉलेज परिसर में डेरा डालकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया, तब जाकर कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासनिक अमला हरकत में आया। बेकाबू होते हालात को काबू में करने के लिए सफेद शर्ट पहने नायब तहसीलदार सौरभ स्वर्णकार दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार ने कमान संभालते हुए कॉलेज अथॉरिटी और आंदोलनकारी छात्रों के बीच लंबी मध्यस्थता कराई, जिसके बाद प्रशासन को मजबूरन बैकफुट पर आना पड़ा।
इस कड़ी मध्यस्थता के बाद, प्रभारी प्राचार्य बी.के. गुप्ता द्वारा 1 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक लिखित आश्वासन जारी किया गया। इस समझौते में यह स्पष्ट रूप से तय किया गया है कि 2 अगस्त 2026 से एक विशेष टीम छात्रावासों की आंतरिक सफाई और शौचालयों को साफ करने का जिम्मा उठाएगी। पीने के पानी के गंभीर संकट को दूर करने के लिए 3 अगस्त 2026 को जेम (GeM) पोर्टल से वाटर फिल्टर की खरीदी के लिए आर्डर किया जाएगा, जो लगभग एक सप्ताह के भीतर स्थापित कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, खिड़कियों में करंट की जानलेवा समस्या को दूर करने के लिए संस्था के इलेक्ट्रीशियन को तत्काल काम पर लगाया गया है और बाहरी झाड़ियों की कटाई व मच्छरों की रोकथाम के लिए नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
इस आश्वासन के बाद एबीवीपी के नगर सह मंत्री अक्षत केसरवानी ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में खुली चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन को केवल 7 दिन की मोहलत दी गई है। अगर इस तय सीमा के भीतर तमाम अनियमिताएं दूर नहीं हुईं, पीने के पानी का फिल्टर नहीं लगा और हॉस्टल की दशा नहीं सुधारी गई, तो इसके बाद जो उग्र आंदोलन होगा, उसे संभालना किसी भी अधिकारी के बस की बात नहीं होगी। अब पूरा रायगढ़ शहर टकटकी लगाए देख रहा है कि क्या कॉलेज प्रशासन इस बार अपनी गहरी नींद से जागेगा, या फिर यह लिखित कागज भी महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। छात्रों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलता, यह महा-बवाल थमने वाला नहीं है।
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