रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जिले के औद्योगिक गलियारों में इन दिनों एक नाम और उसके कारनामे गंभीर चर्चा और तीखे आक्रोश का विषय बने हुए हैं। ओम श्री रूपेश कंपनी के संचालक और खुद को स्वयंभू समाजसेवी कहलाने का शौक रखने वाले उद्योगपति शंकर लाल अग्रवाल अब अपने ही प्लांट में बरती गई आपराधिक लापरवाही के जाल में बुरी तरह घिर चुके हैं। उनके कारखाने में हुए हालिया हृदयविदारक हादसे ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है, बल्कि मजदूरों की जान को चंद सिक्कों से तोलने वाली पूंजीपति मानसिकता को भी बेनकाब कर दिया है। इस अमानवीय घटना के बाद शंकर लाल अग्रवाल की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं और वे लगातार चौतरफा आलोचनाओं के केंद्र में आ गए हैं।
ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिराईपानी में स्थित ओम श्री रूपेश कंपनी में सुरक्षा मापदंडों को ताक पर रखकर मुनाफे की अंधी दौड़ लगाई जा रही थी। इसी घोर लापरवाही का परिणाम था कि प्लांट में एक खौफनाक हादसा घटित हुआ, जिसमें एक गर्भवती महिला मजदूर रंभा प्रधान को अपनी और अपने अजन्मे बच्चे की जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा कई अन्य बेगुनाह मजदूर गंभीर रूप से घायल होकर दर्द से कराह रहे हैं। इस दुखद और अमानवीय घटना के बाद अब शंकर लाल अग्रवाल के खिलाफ विरोध के स्वर बेहद मुखर हो गए हैं। उनकी पुरानी संस्था यानी कांग्रेस पार्टी के ही जिला सचिव कौशिक भौमिक ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सीधे जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है और पीड़ितों के लिए न्याय की हुंकार भरी है।
कांग्रेस के जिला सचिव कौशिक भौमिक ने भारी दल-बल के साथ रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक कड़ा ज्ञापन सौंपा है। प्रशासन को सौंपे गए इस ज्ञापन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि ओम श्री रूपेश प्लांट के मालिक द्वारा अपने कारखाने में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इसी अनदेखी और संवेदनहीनता के कारण यह जानलेवा दुर्घटना घटी। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि इस पूरी घटना की एक निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर हत्या के समान मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी रसूखदार उद्योगपति मजदूरों की जिंदगी से खेलने का दुस्साहस न कर सके।
इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रशासन के समक्ष कुछ बेहद ठोस मांगें रखी गई हैं। कांग्रेस नेता ने मांग की है कि गर्भवती मृतका रंभा प्रधान के असहाय परिजनों को शंकर लाल अग्रवाल की ओर से तत्काल 50 लाख रुपये का भारी-भरकम मुआवजा दिलाया जाए। इसके अलावा इस खौफनाक हादसे में घायल हुए अन्य सभी मजदूरों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और उनके संपूर्ण इलाज का जिम्मा भी ओम श्री रूपेश प्लांट के मालिक द्वारा उठाया जाए। ज्ञापन सौंपते समय कौशिक भौमिक के साथ अजहर हुसैन, विमल यादव, देव साहू, पारस यादव, अर्जुन चौहान, प्रदर्श कोरी, सत्यम देहरी और प्रकाश आनंद समेत भारी संख्या में आक्रोशित युवा साथी मौजूद रहे।
इन सभी ने एक स्वर में प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि रसूख और धनबल के प्रभाव में आकर इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई या पीड़ितों को उनका हक नहीं मिला, तो रायगढ़ की सड़कों पर एक उग्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा। यह घटना न केवल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि तथाकथित समाजसेवा का चोला ओढ़कर कोई भी व्यक्ति मजदूरों के खून पसीने और उनकी लाशों पर अपने मुनाफे का महल खड़ा नहीं कर सकता। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रायगढ़ का जिला प्रशासन इस रसूखदार उद्योगपति के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाता है और पीड़ित गरीब परिवारों को न्याय कब तक नसीब होता है।
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