रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जब ढलती उम्र में आंखों के आगे धुंध छाने लगे और इलाज के लिए शहर का रास्ता बहुत दूर नजर आए, तब अगर कोई चौखट पर आकर रोशनी का जरिया बन जाए तो वह सिर्फ एक स्वास्थ्य शिविर नहीं रह जाता, एक नई जिंदगी की शुरुआत बन जाता है। रायगढ़ के ग्रामीण अंचलों में कुछ ऐसा ही मानवीय और भावुक कर देने वाला मंजर देखने को मिला। अदाणी पावर लिमिटेड (छोटे भंडार) की सामाजिक सरोकार शाखा अदाणी फाउंडेशन ने अपने 'विज़न केयर' अभियान के जरिए 41 गांवों के 4,000 ग्रामीणों की जिंदगी से नजर की धुंध को साफ कर दिया है। 'स्पष्ट दृष्टि, बेहतर भविष्य' के संकल्प के साथ संचालित इस सघन अभियान ने उन वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है, जो वर्षों से कमजोर नजर को अपनी नियति मान चुके थे।

डेढ़ महीने तक गांवों की गलियों में गूंजती रही सेवा की गूंज

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) रायगढ़ के दिशा-निर्देशों के तहत यह सघन अभियान 15 जुलाई से शुरू होकर 27 अगस्त तक पूरे 43 दिनों तक अनवरत चला। अभियान की शुरुआत ग्राम बरपाली की पावन माटी से हुई, जिसके बाद बड़े भंडार, छोटे भंडार, सरवानी, बुनगा, टपरदा, सूपा, कोटमरा, जतरी, काशीचुवा, कलमा, चंदली, रैबार, चिखली, उच्चभित्ति, उसरौत और गोर्रा जैसे सुदूर ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य दल पहुंचा। विज़न केयर संस्था की तकनीकी टीम ने अत्याधुनिक मशीनों के जरिए गांव के पंचायत भवनों और सामुदायिक केंद्रों को अस्थाई अस्पताल में बदल दिया, जहां हर एक ग्रामीण की आंखों की गहराई से जांच की गई।

1,939 चेहरों पर चश्मों के जरिए लौटी दुनिया की चमक

गांवों में अक्सर महिलाएं अपनी बीमारियों और कमजोर होती नजर को परिवार की जिम्मेदारियों के नीचे दबा देती हैं। इस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती यही रही कि शिविरों में पहुंचे 4,000 लोगों में 1,795 महिलाएं थीं, जबकि 2,205 पुरुष लाभार्थियों ने भी अपनी जांच करवाई। गहन चिकित्सकीय परीक्षण के बाद 1,939 जरूरतमंद ग्रामीणों को निशुल्क नजर के चश्मे बांटे गए। इनमें से 500 ग्रामीणों को उनके नंबर के अनुसार तैयार चश्मे तुरंत सौंप दिए गए हैं, जबकि 195 विशेष पावर वाले चश्मों को तेजी से तैयार करवाया जा रहा है, जिनका वितरण इसी माह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।

अंधेरे की ओर बढ़ते 985 कदमों को मिला सही रास्ता

शिविरों के दौरान ग्रामीण इलाकों की वह कड़वी सच्चाई भी उजागर हुई, जहां जानकारी के अभाव में लोग मोतियाबिंद को उम्र का तकाजा मानकर चुपचाप सहते रहते हैं। जांच के दौरान डॉक्टरों की टीम ने 985 ग्रामीणों में मोतियाबिंद, रिफ्रैक्टिव एरर और पर्दे से जुड़े गंभीर दृष्टि दोषों की पहचान की। यदि समय रहते इनकी जांच न होती, तो कई लोग हमेशा के लिए अपनी दृष्टि खो सकते थे। फाउंडेशन ने केवल जांच करके पल्ला नहीं झाड़ा, बल्कि इन सभी 985 मरीजों को उचित मार्गदर्शन देकर शासकीय जिला चिकित्सालय रायगढ़ और मेडिकल कॉलेज रायगढ़ रेफर कराया है, ताकि उनका सही समय पर मुकम्मल इलाज और ऑपरेशन हो सके।

बदलती रणनीति से दोगुना हुआ ग्रामीणों का फायदा

अदाणी फाउंडेशन का यह प्रयास कोई एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि उसके वार्षिक स्वास्थ्य कैलेंडर का एक सुदृढ़ स्तंभ है। पिछले वर्ष जहां इस कार्यक्रम ने 2,000 ग्रामीणों और 2,000 स्कूली बच्चों तक पहुंचकर अपनी नींव रखी थी, वहीं इस दूसरे वर्ष फाउंडेशन ने पूरी तरह से उन वयस्क ग्रामीणों और बुजुर्गों पर अपना ध्यान केंद्रित किया, जो आर्थिक तंगी या आवागमन के साधनों के अभाव में रायगढ़ शहर के अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते थे। इसी सटीक रणनीति का नतीजा रहा कि सीधे तौर पर 4,000 ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।

जब 76 साल के बुजुर्ग ने कहा- 'यह सिर्फ चश्मा नहीं, जीने की आस है'

इस पुनीत कार्य की सफलता के पीछे स्थानीय जनमानस और जनप्रतिनिधियों का अटूट विश्वास रहा। बरपाली सरपंच संजय मैत्री, बड़े भंडार सरपंच ओम प्रकाश गुप्ता और बुनगा सरपंच वेद प्रकाश साहू समेत स्थानीय मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को चौपाल तक पहुंचाया। शिविर की सार्थकता ग्राम बरपाली के 76 वर्षीय बुजुर्ग किसान हरिराम भारती के उन शब्दों में झलकती है, जिन्होंने भावुक होकर कहा कि आंखों की घटती रोशनी ने खेत में काम करना और घर में अपनों को पहचानना तक मुश्किल कर दिया था, लेकिन इस शिविर में जांच और मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्हें भरोसा हो गया है कि वे फिर से अपनी दुनिया को साफ देख पाएंगे। हरिराम जैसे हजारों ग्रामीणों के लिए अदाणी फाउंडेशन की यह पहल महज एक स्वास्थ्य परीक्षण नहीं, बल्कि जीवन को नए सिरे से जीने का एक मजबूत भरोसा साबित हुई है।