रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षाबंधन आज पूरे देश सहित रायगढ़ जिले में भी अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर रायगढ़ जिला जेल का माहौल आम दिनों से बिल्कुल जुदा नजर आया। चारों तरफ सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों की एक बेहद भावुक तस्वीर देखने को मिली। जेल प्रशासन द्वारा की गई विशेष व्यवस्था के तहत बंदियों को उनके परिजनों से मिलने और रक्षा सूत्र बंधवाने की अनुमति दी गई, जिससे जेल परिसर का वातावरण पूरी तरह से भावनात्मक हो गया।
सलाखों के पीछे छलके खुशी और दर्द के आंसू
सुबह से ही जिला जेल परिसर के बाहर बहनों और भाइयों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। हाथों में पूजा की थाली, रोली, चंदन, दीपक, मिठाई और रेशम की डोरी लिए बहनें अपने बंदी भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने पहुंचीं। वहीं दूसरी ओर, जेल में बंद महिला बंदियों से राखी बंधवाने के लिए उनके भाई भी पहुंचे। जैसे ही भाइयों और बहनों का आमना-सामना हुआ, कई महीनों या सालों से एक-दूसरे से दूर रहे परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और दोनों की आंखें नम हो गईं। बहनों ने नम आंखों और कांपते हाथों से अपने बंदी भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, उनकी आरती उतारी और कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनके सुखद, स्वस्थ जीवन और जल्द रिहाई की कामना की। भाइयों ने भी अपनी बहनों को आशीर्वाद देते हुए अपराध की दुनिया से दूर रहकर एक बेहतर इंसान बनने का मौन संकल्प लिया।
जेल अधीक्षक ने दी शुभकामनाएं, व्यवस्थाओं की हुई सराहना
इस संवेदनशील और पुनीत आयोजन को लेकर जिला जेल प्रबंधन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन करते हुए परिजनों की जांच के उपरांत ही उन्हें क्रमबद्ध तरीके से जेल के भीतर प्रवेश दिया गया, ताकि किसी भी आगंतुक या बंदी को असुविधा का सामना न करना पड़े। इस अवसर पर जेल अधीक्षक गोवर्धन सिंह शोरी ने समस्त जिला वासियों, प्रदेश वासियों और जेल में निरुद्ध सभी बंदियों व उनके परिजनों को रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि त्योहार मानवीय संवेदनाओं को जोड़ने और व्यक्ति को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने का माध्यम होते हैं। जेल प्रशासन का यह प्रयास रहता है कि ऐसे पावन अवसरों पर बंदियों को उनके सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों से जोड़े रखा जाए, ताकि उनमें सुधार की भावना प्रबल हो सके और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हों।
जेल की चारदीवारी के भीतर घटे ये चंद पल हर किसी के दिल को छू लेने वाले रहे। अपनों से मिलने और राखी का त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाने के बाद बंदियों के चेहरों पर सुकून और आशा की नई चमक साफ देखी जा सकती थी।
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