रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जिले के ग्राम पंचायत राजपुर में शासकीय विकास योजनाओं की राशि की बंदरबांट और भारी भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला खुलकर सामने आया है। विकास के नाम पर शासन से मिलने वाले करोड़ों रुपयों के सरकारी फंड पर पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा डाका डालने का गंभीर आरोप लगा है। यह सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब जनपद पंचायत क्षेत्र क्रमांक 07 के जनपद सदस्य सदानंद निषाद ने इस पूरे फर्जीवाड़े के पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों और खुली शिकायतों के साथ सीधे जिला कलेक्टर जनदर्शन में दस्तक दी। जनपद सदस्य ने ग्राम पंचायत सचिव पर पदस्थापना के पहले दिन से ही शासकीय राशि का खुलेआम दुरुपयोग करने और पद का नाजायज फायदा उठाकर फर्जी बिल-वाउचरों के जरिए शासन को लाखों की चपत लगाने का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

कागजों में चमचमाती इमारत, धरातल पर सिर्फ अधूरा ढांचा: बिना छत ढलाई निकाल लिए पूरे पैसे

शिकायत पत्र में जो सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है, वह सरस्वती शिशु मंदिर के समीप स्वीकृत सामुदायिक भवन के निर्माण से जुड़ा है। आरोप है कि मौके पर निर्माणाधीन सामुदायिक भवन की छत की ढलाई तक पूरी नहीं हुई है, दीवारें और ढांचा अधूरा पड़ा हुआ है, लेकिन जिम्मेदार सचिव और सरपंच की मिलीभगत से कागजों में इस कार्य को सौ फीसदी पूर्ण दर्शा दिया गया। इतना ही नहीं, बिना वास्तविक कार्य पूरा कराए बाकायदा 'कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र' जारी कर दिया गया और सरकारी खजाने से पूरी स्वीकृत राशि का आहरण कर आपस में बंदरबांट कर ली गई। धरातल पर अधूरे पड़े इस भवन की हकीकत यह बयां करने के लिए काफी है कि पंचायत में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।

पगडंडी निर्माण से लेकर स्ट्रीट लाइट तक में फर्जी बिलों की भरमार और मनमानी

जनपद सदस्य सदानंद निषाद ने अपने तीखे शिकायती पत्र में सचिव परीक्षित भोय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए बताया कि पंचायत में जितने भी निर्माण कार्य कराए गए हैं, उनमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। कई पगडंडी निर्माण कार्यों के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाकर राशि निकाल ली गई, जबकि मौके पर कोई काम ही नहीं हुआ। इसी प्रकार गांव की गलियों में स्ट्रीट लाइट लगाने और अन्य बुनियादी सुविधाओं के नाम पर भी बिना वैध बिल-वाउचर और बिना कार्य विवरण के अनाप-शनाप व मनमाने तरीके से भुगतान कर सरकारी राशि का गबन किया गया। आरोप यह भी है कि प्रभारी मंत्री के नाम और प्रभाव की आड़ लेकर भी फर्जी तरीके से राशि आहरण का खेल खेला गया है।

ग्रामीणों के सामने आय-व्यय के ऑडिट और तत्काल बर्खास्तगी की मांग पर अड़े जनप्रतिनिधि

शिकायतकर्ता जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासियों का कहना है कि सचिव परीक्षित भोय के कार्यकाल के दौरान हुए समस्त निर्माण कार्यों, आय-व्यय तथा बिल-वाउचरों की खुली जांच गांव के आम नागरिकों के समक्ष कराई जानी चाहिए ताकि जनता की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोग का सच सबके सामने आ सके। ग्रामीणों और जनपद सदस्य ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि ऐसे दागी सचिव को तत्काल प्रभाव से राजपुर पंचायत से हटाया जाए और उनके खिलाफ दंडात्मक कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि सरकारी राशि को डकारने वाले इन जिम्मेदार अधिकारियों पर कब तक सख्त शिकंजा कसा जाता है।