रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- शहर के बहुचर्चित जिला जेल में एक बंदी की मौत के मामले में पिछले कुछ दिनों से चल रही भ्रामक खबरों और पुलिस पर लग रहे मारपीट के गंभीर आरोपों पर अब रायगढ़ पुलिस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मंगलवार को रायगढ़ कंट्रोल रूम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार तरीके से खुलासा किया। उन्होंने पुलिस हिरासत में मारपीट की खबरों को पूरी तरह से निराधार और असत्य बताते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस ने आरोपी के साथ पूरी संवेदनशीलता और मानवता का परिचय दिया था। इस पूरी प्रेस वार्ता के दौरान एसएसपी ने पुलिस की छवि को धूमिल करने वाले दुष्प्रचार पर विराम लगाते हुए तथ्यों और सबूतों के आधार पर अपनी बात रखी।

यह पूरा मामला थाना कोतरा रोड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नवापारा का है, जहां 14 जून 2026 को शराब से जुड़े एक मामले में संजय बघेल नामक व्यक्ति को पुलिस ने आरोपी बनाया था। गिरफ्तारी के बाद संजय बघेल को जिला जेल दाखिल किया गया था, जहां उसकी मौत हो गई। बंदी की मौत के बाद शहर में यह अफवाह तेजी से फैल गई कि पुलिस ने थाने में संजय के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की थी, जिसके कारण उसकी जान गई। इन अफवाहों ने शहर के माहौल को गरमा दिया था। लेकिन, एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इन सभी बातों का खंडन करते हुए बताया कि थाना स्तर पर आरोपी के साथ किसी भी प्रकार की कोई ज्यादती नहीं की गई है, बल्कि पुलिस कर्मियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया था।

प्रेस वार्ता में पत्रकारों को संबोधित करते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने घटना वाले दिन का पूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि जब संजय बघेल को कोतरा रोड थाने लाया गया था, तब उसकी स्थिति बिल्कुल सामान्य थी। पुलिस कस्टडी के दौरान जब संजय ने प्यास लगने की बात कही, तो ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसे पीने का पानी उपलब्ध कराया। इसके बाद जब उसे भूख लगी, तो उसे भरपेट खाना भी खिलाया गया। एसएसपी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि पुलिस ने उसके साथ मारपीट की होती, तो उसकी शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह सामान्य रूप से खाना खा सके या चल-फिर सके। उन्होंने बताया कि जब संजय को जेल दाखिल करने का समय आया, तो वह किसी के सहारे के बिना, अपने दोनों पैरों पर खुद चलकर थाने से बाहर निकला और पुलिस की गाड़ी में जाकर बैठा। उस वक्त उसके साथ सुरक्षा के लिए मात्र एक आरक्षक मौजूद था। यह तथ्य इस बात को पुख्ता करता है कि थाने के भीतर उसके साथ कोई शारीरिक हिंसा नहीं हुई थी।

गिरफ्तारी और जेल दाखिले की कानूनी प्रक्रियाओं का जिक्र करते हुए एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने सभी वैधानिक नियमों का पूरी सख्ती से पालन किया है। थाने से निकलने के बाद पुलिस सबसे पहले संजय बघेल को लेकर अस्पताल गई, जहां डॉक्टरों की टीम द्वारा उसका विधिवत मुलाहिजा (MLC - मेडिकल लीगल केस) करवाया गया। मेडिकल परीक्षण में भी उसके शरीर पर किसी भी प्रकार के गंभीर चोट या मारपीट के निशान की पुष्टि नहीं हुई थी और डॉक्टर ने उसे पूरी तरह से फिट घोषित किया था। डॉक्टरी परीक्षण के पश्चात ही उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से मिले आदेश के बाद उसे जिला जेल में दाखिल कर दिया गया। एसएसपी का कहना है कि न्यायालय और जेल प्रशासन को सौंपे जाने तक संजय की स्थिति बिल्कुल ठीक थी। हालांकि हमने जांच हेतु दो आरक्षक को लाइन अटैच किया है, जांच प्रक्रिया के लिए ताकि जांच सही से हो।

इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ पुलिस ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के निर्देश दे दिए हैं। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि पूरे मामले की बारीकी से जांच करने की जिम्मेदारी डीएसपी सुशांतो बैनर्जी को सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, मौत के असली कारणों और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी इस जांच अभियान में शामिल किया गया है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ हर एक पहलू की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई जल्द से जल्द आम जनता और मृतक के परिजनों के सामने आ सके। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में पूरी तरह से पारदर्शी हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन बिना साक्ष्य के पुलिस विभाग पर झूठे आरोप लगाना न्यायसंगत नहीं है।