रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ के मेडिकल इंटर्न्स ने स्टाइपेंड में समानता की मांग को लेकर 30 जुलाई 2026 से प्रदेशव्यापी 'ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट' (काली पट्टी बांधकर विरोध) शुरू कर दिया है। अपनी मांगों के समर्थन में मेडिकल कॉलेज परिसर में एक मौन रैली भी निकाली गई, जिसमें भावी डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। इंटर्न्स की मुख्य मांग यह है कि उन्हें भी अन्य राज्यों की तरह न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह का सम्मानजनक स्टाइपेंड दिया जाए।
अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे कम स्टाइपेंड का दावा!
मीडिया से बातचीत करते हुए एमबीबीएस 2021 बैच की इंटर्न डॉ. छवि सिंगोदिया ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इंटर्न्स को 15,900 रुपये का स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो कि देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।
इंटर्न्स द्वारा जारी किए गए तुलनात्मक आंकड़ों (पोस्टर) के अनुसार, पड़ोसी राज्य ओडिशा में 42,000 रुपये और पश्चिम बंगाल में 43,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इसके अलावा, दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी इंटर्न्स को 30,000 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है। डॉ. छवि ने सवाल उठाया कि जब उनके कार्य और जिम्मेदारियां अन्य राज्यों के इंटर्न्स के समान हैं, तो वेतन में इतनी असमानता क्यों है।
"ड्यूटी और सेवाएं बाधित नहीं, लेकिन विरोध जारी"
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह है कि इंटर्न्स ने मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं को फिलहाल प्रभावित नहीं किया है। "हम ड्यूटी पर हैं, सेवा जारी है, विरोध भी जारी है" के नारे के साथ वे नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. सिंगोदिया ने स्पष्ट किया कि इंटर्नशिप को केवल एक 'ट्रेनिंग पीरियड' मानना गलत है। इंटर्न्स ओपीडी, वार्ड, आईसीयू और आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं में 24 घंटे से भी अधिक समय तक अपनी ड्यूटी देते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री और ओपी चौधरी से की अपील, दिया 7 दिन का अल्टीमेटम..
इंटर्न्स ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और कैबिनेट मंत्री श्री ओपी चौधरी से अपनी मांगों पर जल्द विचार करने की अपील की है। डॉ. छवि ने कहा, "हम रायगढ़ से ही हैं और ओपी चौधरी जी भी रायगढ़ से हैं, इसलिए हम उनसे विशेष निवेदन करते हैं कि वे महंगाई के इस दौर में हमारी जायज मांगों को सुनें"।
इसके साथ ही इंटर्न्स ने प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम भी दिया है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्टाइपेंड बढ़ाकर 30,000 रुपये नहीं किया जाता है, तो छत्तीसगढ़ के सभी इंटर्न्स एकजुट होकर कामबंद हड़ताल (स्ट्राइक) पर जाने के लिए मजबूर होंगे। इंटर्न्स ने चेतावनी दी है कि इस हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं को होने वाले किसी भी नुकसान की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
टिप्पणियाँ (0)
अपनी टिप्पणी लिखें