रायगढ़/लैलूंगा@TAKKAR न्यूज :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का लैलूंगा क्षेत्र इन दिनों सरकारी जमीनों की खुली लूट और प्रशासनिक अराजकता का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन, छोटे झाड़ के जंगल और वन भूमि पर भू-माफियाओं का बेखौफ कब्जा बदस्तूर जारी है। व्यवस्था की विडंबना देखिए कि गांव के प्रथम नागरिक यानी सरपंच और सचिव ने इस पूरे मामले में अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है। इस नंगे नाच पर स्थानीय विधायक की रहस्यमयी चुप्पी इस पूरे मामले को और भी गंभीर तथा संदिग्ध बना रही है। आम जनता अब यह सवाल पूछने को मजबूर है कि आखिर लैलूंगा में यह अवैध कब्जे का काला कारोबार किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है?
न्याय की उम्मीद में जब स्थानीय लोगों की नजरें राजस्व न्यायालय लैलूंगा की ओर जाती हैं, तो वहां भी व्यवस्था का खोखलापन ही नजर आता है। न्यायालय में सालों से लंबित मामलों में न्याय के नाम पर सिर्फ 'तारीख पर तारीख' का खेल चल रहा है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो कई गंभीर मामलों में बेदखली के स्पष्ट आदेश भी पारित हो चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर एक ईंट भी नहीं खिसकाई गई। आदेशों का कागजों तक सीमित रह जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि इन सफेदपोश कब्जाधारियों को एक बेहद मजबूत राजनैतिक ढाल मिली हुई है, जिसके आगे प्रशासनिक अमले ने भी घुटने टेक दिए हैं।
भ्रष्टाचार और तानाशाही का सबसे वीभत्स और हैरान करने वाला चेहरा तब सामने आया, जब एक जागरूक ग्रामीण ने इन अवैध कब्जों को लेकर आवाज उठाई और सरपंच की पोल खोलकर रख दी। अपनी नाकामी और मिलीभगत उजागर होते देख सरपंच बौखला गया और बदले की भावना से एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकारें 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत गरीबों को छत देने का ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं इस बेलगाम सरपंच ने शिकायतकर्ता की आवाज दबाने के लिए उसके 'पीएम आवास' के खिलाफ ही बेदखली का आदेश जारी कर दिया। हद तो तब हो गई जब तानाशाही दिखाते हुए उस आदेश को हितग्राही के मकान पर बाकायदा चस्पा भी कर दिया गया।
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक गांव का विवाद नहीं है, बल्कि सिस्टम के मुंह पर एक करारा तमाचा है। सरपंच का यह कृत्य सीधे तौर पर यह सवाल खड़े करता है कि क्या पंचायत के नुमाइंदों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है? क्या लैलूंगा में सरपंच का रसूख देश के कानून और सरकारी योजनाओं से बड़ा हो गया है? यह समय है जब जिला प्रशासन के आला अधिकारियों और राज्य सरकार को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। अगर जल्द ही इन भू-माफियाओं और उनके आकाओं पर बुलडोजर नहीं चला, तो लैलूंगा की बची-खुची जमीनें भी रसूखदारों की भेंट चढ़ जाएंगी।
टिप्पणियाँ (0)
अपनी टिप्पणी लिखें