रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इन दिनों एक आम आदमी के आक्रोश से भरा वीडियो दावानल की तरह फैल रहा है। यह महज एक वीडियो नहीं है, बल्कि देश की उस खामोश आवाज़ का प्रकटीकरण है जो बढ़ती महंगाई, प्रशासनिक विफलता और नेताओं की चुप्पी तले घुट रही है। इस वायरल वीडियो में एक हताश और आक्रोशित नागरिक ने सत्ता के गलियारों में बैठे देश के शीर्ष नेताओं को सीधे तौर पर ललकारा है और उन तमाम ज्वलंत मुद्दों पर जवाब मांगा है, जिन पर पूरा सरकारी तंत्र रहस्यमयी तरीके से मूकदर्शक बना हुआ है। इस युवक की तिलमिलाहट और उसके द्वारा दागे गए सवालों ने न केवल इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है, बल्कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद की मौजूदा परिभाषाओं पर भी एक गहरा और चुभता हुआ प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

इस क्षुब्ध नागरिक ने अपनी भड़ास निकालते हुए एक-एक करके सत्ता के शीर्ष पर बैठे हर उस राजनेता को कटघरे में खड़ा किया है, जिनकी जवाबदेही देश के नागरिकों के प्रति बनती है। वीडियो की शुरुआत में ही वह नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के पेपर लीक मामले में सरकार की विफलता पर कड़ा प्रहार करता है और तंज कसते हुए कहता है कि क्या यह पेपर उसने लीक किया था? वह सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस महाघोटाले पर जवाब मांगता है। इसके बाद उसका गुस्सा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर मुड़ता है, जिनसे वह राम मंदिर निर्माण के दौरान सामने आए कथित चंदा चोरी के आरोपों पर चुप्पी तोड़ने की मांग करता है। इस नागरिक की पीड़ा यहीं नहीं रुकती, वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीएम केयर्स फंड के पारदर्शी हिसाब-किताब की भी पुरजोर मांग करता है, जिस पर आज तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

आंतरिक सुरक्षा और हादसों पर बात करते हुए यह आम आदमी देश के रक्षा मंत्री और गृह मंत्री को भी आड़े हाथों लेता है। वह पूछता है कि आखिर मणिपुर की जलती हुई स्थिति और पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले, जिसमें 26 मासूमों की जान चली गई, उस पर यह 'देशभक्त' सरकार जवाब क्यों नहीं देती? इसके साथ ही, वह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से लगातार हो रहे ट्रेन हादसों और रेलवे की चरमराती व्यवस्था का हिसाब मांगता है। इस वीडियो का सबसे मारक हिस्सा वह है जहां यह युवक देश की अर्थव्यवस्था और पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों की पोल खोलता है। वह पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार का हवाला देता है। वह तर्क देता है कि जब कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं और पड़ोसी देश पाकिस्तान तक में पेट्रोल की कीमतों में भारी कटौती की जा रही है, तब भारत में जनता को क्यों लूटा जा रहा है? वह बेबाकी से आरोप लगाता है कि सरकार रूस से सस्ता और मिलावटी (ब्लेंडेड) तेल खरीद रही है, लेकिन देश की जनता को वह उसी पुरानी और महंगी कीमत पर बेचा जा रहा है ताकि उनके चंद रईस दोस्तों की जेबें भरी जा सकें, जबकि आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई लुटाकर बच्चों की कुर्बानियां देने को मजबूर है।

वीडियो के अंतिम चरण में यह युवक जो बात कहता है, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए एक खतरे की घंटी है। वह व्यंग्यात्मक लहजे में खुद को 'एंटी-नेशनल', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और 'अर्बन नक्सल' बताता है और कहता है कि इस देश में जो भी सवाल पूछता है, उसे यही तमगे दे दिए जाते हैं। वह असली 'देशभक्तों' से पूछता है कि आखिर वे इन बुनियादी और जीवन-मरण के मुद्दों पर खामोश क्यों हैं? वह जनता से अपील करता है कि वे कभी सवाल न करें, क्योंकि सवाल करने वालों की इस देश में कोई जगह नहीं है। वीडियो का अंत एक कोचिंग इंस्टिट्यूट के दर्दनाक हादसे के जिक्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो क्लिप के साथ होता है जिसमें वह कहते नज़र आ रहे हैं कि "मन को बड़ा संतोष होता है।" एक तरफ आम आदमी की खून के आंसू रुलाने वाली पीड़ा है और दूसरी तरफ व्यवस्था का यह 'संतोष', यह विरोधाभास आज पूरे देश को झकझोर रहा है और यही कारण है कि यह वीडियो हर मोबाइल की स्क्रीन से होकर लोगों के दिलों में एक नई बहस को जन्म दे रहा है।