गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/TAKKAR न्यूज@दीपक गुप्ता :- जिले में निजी फाइनेंस कंपनी से मोटरसाइकिल फाइनेंस कराने वाले कई ग्राहकों ने कंपनी के कर्मचारियों पर निर्धारित किस्त राशि के अलावा अतिरिक्त रकम वसूलने और जमा की गई किस्तों को खाते में जमा नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि अतिरिक्त राशि लेने के बावजूद उन्हें अब तक वाहनों की आरसी और एनओसी सहित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ितों के मुताबिक, श्रीराम फाइनेंस के माध्यम से उन्होंने पेंड्रा के अमरपुर रोड स्थित कृष्णा मोटर्स से मोटरसाइकिल खरीदा था जिसका फाइनेंस श्री राम फाइनेंस के द्वारा किया गया था कर्मचारियों के द्वारा किस्त की राशि के अधिक 20 से 40 हजार रुपये तक ले लिए गए। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी द्वारा रकम लेने के बाद भी कई मामलों में वाहन की किस्त समय पर जमा नहीं की गई। दस्तावेज नहीं मिलने के कारण वाहन मालिक लगातार कंपनी के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने सेमरा स्थित श्रीराम फाइनेंस कार्यालय पहुंचकर मामले की शिकायत की और शिकायत पुस्तिका में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन इसके बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली। पीड़ित बिसाहू महादेव का कहना है कि उन्होंने हर माह समय पर किस्त जमा की, इसके बावजूद उनसे 20 हजार रुपये अतिरिक्त लिए गए। इसके बाद भी उन्हें आरसी और एनओसी नहीं मिली।
इसी तरह आनंद सिंह ने आरोप लगाया कि श्रीराम फाइनेंस में कार्यरत बताए जा रहे रूपेश यादव ने उनसे 20 हजार रुपये अतिरिक्त लिए, लेकिन आज तक आरसी और एनओसी उपलब्ध नहीं कराई गई। अजय सिंह ने भी 20 हजार रुपये अतिरिक्त लेने का आरोप लगाते हुए दस्तावेजों के लिए भटकने की बात कही है।।।
वही गिरारी निवासी शिव कुमार चौधरी ने आरोप लगाया फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी रूपेश यादव ने बाइक का रिफाइनेंस कराने और खाता क्लोज करने के नाम पर उनसे 35 हजार रुपये लिए गए। उनका दावा है कि उन्होंने यह राशि संबंधित कर्मचारी के पुरानी बस्ती वाले घर जाकर उसकी पत्नी को दी थी। बाद में राशि जमा नहीं होने की जानकारी मिलने पर संपर्क करने की कोशिश की गई। पीड़ित का आरोप है कि राशि वापस मांगने पर उन्हें महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले में फंसाने की धमकी दी गई।।।
पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर अतिरिक्त राशि वापस कराने, लंबित किस्तों का हिसाब स्पष्ट करने तथा आरसी-एनओसी उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, कंपनी और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।।।
हालांकि मामले के सामने आने के बाद कंपनी के द्वारा कर्मचारी को हटा दिया है पर पीड़ित आज भी अपने पैसो और दस्तावेजों के लिए कंपनी का चक्कर काटने को मजबूर है।।।
ये बंटी और बबली की जोड़ी के एक दो नही दर्जनों फर्जीवाड़े के मामले है।।पर आज भी पीड़ित अपने गाढ़ी कमाई के गवाए पैसो के लिए फाइनेंस कंपनी के चक्कर काटने को मजबूर है।।।
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