रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- भोली-भाली आदिवासी जनता को कर्ज के दलदल में फंसाकर उनकी बेशकीमती पैतृक जमीनों को हड़पने वाला भू-माफियाओं और सूदखोरों का सिंडिकेट एक बार फिर बेनकाब हुआ है। रायगढ़ जिले के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र में एक अनपढ़ आदिवासी महिला की लाचारी और अज्ञानता का फायदा उठाकर उसकी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। पीड़िता ने चक्रधर नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए सूदखोरों व उनके सहयोगियों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। पुलिस को दिए शिकायती पत्र के अनुसार, महज डेढ़ लाख रुपये के कर्ज के एवज में महिला की ऋण पुस्तिका अमानत के तौर पर रख ली गई और फिर सादे स्टांप पेपर पर फर्जी बिक्रीनामा तैयार करवाकर राजस्व रिकॉर्ड व रजिस्ट्री पोर्टल में हेरफेर कर दिया गया।

मजबूरी का उठाया फायदा, ब्याज के नाम पर थमाया फंदा

मामले की पृष्ठभूमि नवापाली गांव निवासी श्रीमती सरस्वती सिदार पति मोहन सिंह सिदार (गोंड़ जाति) से जुड़ी है। पीड़िता को करीब डेढ़ वर्ष पहले अपने कुछ निजी पारिवारिक कार्यों के लिए रुपयों की सख्त दरकार थी। पैसों की तंगी से जूझ रही महिला ने अपने परिचित नरोत्तम चौहान (निवासी डूमरमुड़ा) के जरिए हलधर चौधरी से संपर्क साधा। हलधर चौधरी ने पीड़िता की लाचारी का भरपूर फायदा उठाया और उसे दो प्रतिशत मासिक ब्याज की दर पर 1,50,000 रुपये (डेढ़ लाख रुपये) की उधारी रकम थमा दी। शर्त के मुताबिक, महिला से उसकी मूल ऋण पुस्तिका बतौर गारंटी अपने पास रख ली गई। पीड़िता हर महीने नियमित रूप से 2 प्रतिशत ब्याज अदा करती रही और इस उम्मीद में जीती रही कि मूलधन चुकाते ही उसकी जमीन के कागजात वापस मिल जाएंगे।

राजस्व अभिलेख में दर्ज नाम देखने पहुंची तो उड़े होश

पीड़िता की पैतृक भूमि ग्राम बोईरडीही, पटवारी हल्का नंबर 08 में स्थित थी, जो पहले उसके चाचा जगत सिदार के साथ संयुक्त खाते में दर्ज थी। हाल ही में पुसौर तहसीलदार के समक्ष विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर जब खाते का बंटवारा कराया गया, तब यह भूमि पूर्ण रूप से प्रार्थिया के हिस्से में आ गई। बंटवारे के बाद जब वह राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवाकर नकल लेने तहसील कार्यालय पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। राजस्व रिकॉर्ड में यह दर्ज हो चुका था कि उक्त जमीन का फर्जी तरीके से बिक्रीनामा तैयार कर उसे रजिस्ट्री पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। महिला को तब आभास हुआ कि उसके साथ कितना बड़ा सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा चुका है।

फर्जी आईडी और कोरे स्टांप का खेल, रजिस्ट्री पोर्टल में सेंध

शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया गया है कि हलधर चौधरी और उसके गिरोह ने महिला के अनपढ़ होने का नाजायज लाभ उठाया। अमानत के तौर पर रखी गई ऋण पुस्तिका का दुरुपयोग करते हुए कथित तौर पर कोरे स्टांप पेपर पर फर्जी हस्ताक्षर या अंगूठा लगवाकर झूठा बिक्रीनामा गढ़ा गया। इतना ही नहीं, अनावेदकों ने अपने साथियों के साथ मिलकर कथित फर्जी दस्तावेज और फर्जी आईडी तैयार की और महिला की सहमति के बिना ही सरकारी रजिस्ट्री पोर्टल पर जमीन की बिक्री की प्रक्रिया अपलोड कर दी। जबकि हकीकत यह थी कि जिस वक्त यह कथित लेन-देन दर्शाया गया, उस समय जमीन चाचा के साथ साझा खाते में दर्ज थी और उसका व्यक्तिगत विक्रय कानूनी रूप से संभव ही नहीं था।

उधारी लौटाने गई तो मिली गालियां और जातिसूचक धमकियां

पीड़िता का कहना है कि वह आज भी हलधर चौधरी की पूरी उधारी रकम चुकता कर अपनी ऋण पुस्तिका वापस लेने को तैयार है। जब वह अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से जुटाई गई राशि लेकर अनावेदक के पास पहुंची और अपने दस्तावेज वापस मांगे, तो आरोपियों के तेवर बदल गए। आरोप है कि हलधर चौधरी और उसके साथियों ने न केवल पैसे लेने से इनकार कर दिया, बल्कि पीड़िता को उसके मुंह पर जातिसूचक गालियां दीं, अपमानित किया और जान से मारने तथा जमीन हमेशा के लिए छीन लेने की धमकियां देकर भगा दिया। इस खुलेआम बदसलूकी और दबंगई से डरी-सहमी पीड़िता अब न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है।

संगठित गिरोह के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग

पीड़िता श्रीमती सरस्वती सिदार ने पुलिस प्रशासन को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि हलधर चौधरी, नरोत्तम चौहान, गिरधारी पटेल और राजेश देवांगन जैसे लोग मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे हैं। ये लोग कमजोर और अनपढ़ आदिवासियों को अपने जाल में फंसाकर उनकी जमीनें छीनने का संगठित गोरखधंधा चला रहे हैं। पीड़िता ने चक्रधर नगर थाना प्रभारी से मामले की तहकीकात कर फर्जी दस्तावेजों की जांच कराने, रजिस्ट्री पोर्टल से फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कराने और सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा व एससी-एसटी एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस भू-माफिया सिंडिकेट पर कब शिकंजा कसता है।