रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- रायगढ़ शहर में केलो नदी के किनारे चल रहे मरीन ड्राइव निर्माण के दौरान जनभावनाओं और आस्था को दरकिनार करने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा से ठीक पहले, बाबा कुटी घाट पर वर्षों से स्थापित पारंपरिक छठ वेदी (सिरसोप्ता/पचरी) को भारी-भरकम पोकलेन मशीन चलाकर पूरी तरह से तोड़ दिया गया। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि इतने बड़े धार्मिक स्थल पर मशीन चलाने से पहले न तो बस्ती के लोगों को कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही किसी भी स्तर पर बातचीत करने की जहमत उठाई गई। अचानक हुए इस विध्वंस के बाद जब घाट पर धूल का गुबार और मलबे का ढेर दिखा, तो मोहल्लेवासी बदहवास होकर नदी किनारे पहुंचे और निर्माण कार्य के तौर-तरीकों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

बिना किसी सूचना के अचानक पहुंची भारी मशीन, महिलाओं का छलका दर्द

घटना के वक्त घाट के समीप मौजूद स्थानीय महिला उर्मिला ठाकुर ने बताया कि वे लोग अपने घरों में सामान्य दिनचर्या में थे, तभी अचानक घाट से भारी मशीन चलने और निर्माण टूटने की गड़गड़ाहट सुनाई दी। जब वे भागते हुए मौके पर पहुंचीं, तो देखा कि छठ माता का पूजा स्थल तोड़ा जा चुका था। उर्मिला ठाकुर ने दो टूक कहा कि इस कार्रवाई के बारे में न तो उन्हें पहले से कुछ बताया गया और न ही किसी ने कोई सूचना दी। जब ढांचा टूट गया, तब जाकर लोग घरों से दौड़कर पहुंचे। उनका साफ कहना था कि छठ महापर्व सिर पर है और ऐसे मौके पर बिना किसी वैकल्पिक इंतजाम या चर्चा के आस्था के प्रतीक को अचानक उखाड़ फेंकना सीधे तौर पर श्रद्धालुओं की भावनाओं पर चोट है।

जनप्रतिनिधियों के दावों पर बरसे सनी चौहान, बोले- 'सबके साथ खड़े होने की बात सिर्फ कागजी'

घाट क्षेत्र के ही निवासी सनी चौहान ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े किए। सनी चौहान ने बताया कि वे बाबा कुटी घाट के ही रहने वाले हैं और इस घाट पर हर साल पूरे विधि-विधान से छठ पूजा का आयोजन होता आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि घाट पर अक्सर बुजुर्ग और स्थानीय लोग बैठे रहते हैं, लेकिन ठेकेदार के अमले ने किसी से भी यह पूछना गवारा नहीं समझा कि यहां क्या ढांचा है और पूजा को लेकर क्या व्यवस्था की जानी चाहिए, बल्कि सीधे मशीन लाकर पूजा स्थल को उखाड़ दिया गया।

जब उनसे इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि चुनाव और मंचों से यह दावा तो खूब किया जाता है कि वे हर कदम पर आम जनता के साथ खड़े हैं, लेकिन जब जमीन पर गरीबों और आम नागरिकों के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं, तो कोई भी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि पहले जब गरीबों के आशियाने टूटे तब भी किसी ने ध्यान नहीं दिया, और अब जब आस्था के प्रतीक को उजाड़ा गया है, तब भी किसी के पास गुहार लगाने से कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता। सनी चौहान ने हाथ जोड़कर सीधे शब्दों में कहा कि उन्हें किसी सियासत से मतलब नहीं है; बस छठ पूजा के मद्देनजर उनकी छठ मैया की वेदी को उसी श्रद्धा के साथ पहले जैसा पक्का और व्यवस्थित बनाकर दिया जाए।

कैमरे पर ठेकेदार प्रतिनिधि की बेरुखी: न पार्षद को बताया, न लोगों को, दी सिर्फ तकनीकी दलील..

इधर विरोध और हंगामे के बीच जब निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार पक्ष के प्रतिनिधि शाहनवाज अंसारी से सवाल किए गए, तो उनकी बातों से निर्माण एजेंसी की कार्यशैली की पोल खुल गई। शाहनवाज अंसारी ने ऑन-कैमरा यह साफ स्वीकार किया कि इस वेदी और पचरी को तोड़ने से पहले न तो स्थानीय वार्ड पार्षद को कोई जानकारी दी गई थी और न ही किसी अन्य नागरिक को कोई सूचना दी गई।

अपनी सफाई में उन्होंने तकनीकी दलील देते हुए कहा कि मरीन ड्राइव के तहत नदी किनारे रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) का कार्य चल रहा है। खुदाई और अलाइनमेंट के बिल्कुल बीच में यह पुरानी पचरी आ रही थी, जिसके चलते इसे डिस्मेंटल करना पड़ा। जब उनसे पूछा गया कि बिना किसी को बताए यह कदम क्यों उठाया गया, तो उनका रवैया ऐसा था मानो निर्माण के बीच आने वाली किसी भी चीज को बिना संवाद के तोड़ना ही उनका काम हो। हालांकि, स्थानीय लोगों के कड़े रुख और विरोध के बाद उन्होंने बैकफुट पर आते हुए कहा कि छठ पूजा के लिए दूसरी उपयुक्त जगह पर पूरी सामग्री देकर पक्की वेदी और व्यवस्था तैयार करवा दी जाएगी। अब सवाल यही उठता है कि यदि नई व्यवस्था ही बनानी थी, तो पहले स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाकर यह काम पहले क्यों नहीं किया गया।