रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- संस्कारधानी रायगढ़ में विजयादशमी का महापर्व अगाध श्रद्धा, जनउत्साह और भक्ति भाव के साथ ऐतिहासिक भव्यता से संपन्न हुआ। बुराई व अनाचार के प्रतीक लंकापति रावण के पुतले का दहन होते ही समूचा शहर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। नगर के तीन प्रमुख केंद्रों—रामलीला मैदान, नटवर स्कूल परिसर, मिनी स्टेडियम और संजय मैदान में आयोजित दशहरा उत्सव में परंपरा, आस्था और आधुनिक प्रबंधन का अनूठा समन्वय देखने को मिला। आयोजन स्थलों पर जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि तिल धरने तक की जगह नहीं बची।
विधायक ओपी चौधरी ने की पूजा-अर्चना, दिया समरसता का संदेश
रायगढ़ के विधायक ओपी चौधरी नगर के तीनों प्रमुख आयोजनों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने प्रभु श्री राम, माता जानकी और संकटमोचन हनुमान के स्वरूपों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चन कर नगरवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री चौधरी ने कहा, "रावण दहन केवल एक पुतले को अग्नि के हवाले करना नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की बुराइयों, ईर्ष्या और अहंकार को त्यागकर सत्य के मार्ग पर चलने का पावन संकल्प है।" उन्होंने समाज में समरसता, विकास और एकजुटता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
सतरंगी आतिशबाजी से जगमगाया आसमान
इस वर्ष आयोजन का मुख्य आकर्षण तीनों मैदानों में की गई भव्य आतिशबाजी रही। पुतला दहन से पहले और दहन के दौरान छोड़े गए रंग-बिरंगे रॉकेटों और हवाई पटाखों ने रात के आकाश को इंद्रधनुषी छटा से सरोबार कर दिया। गगनभेदी धमाकों के बीच दर्शकों ने विहंगम दृश्य का आनंद लिया और प्रत्येक धमाके के साथ परिसर 'जय श्री राम' के नारों से गूंज उठा।
अग्निबाण लगते ही धू-धू कर जला दशानन
घड़ी की सुइयां रात 9:30 पर पहुंचते ही दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। रामलीला मैदान में मंचन के अंतिम प्रसंग में प्रभु श्री राम के स्वरूप ने जैसे ही अग्निबाण का संधान किया, रावण का विशाल पुतला धू-धू कर जल उठा। इसके उपरांत नटवर स्कूल मैदान और मिनी स्टेडियम में भी चरणबद्ध तरीके से रात 10 बजे तक पुतलों का दहन हुआ। शक्तिशाली विस्फोटों और उठती लपटों ने संदेश दिया कि असत्य का आकार चाहे जितना बड़ा हो, सत्य के सम्मुख उसका टिकना असंभव है।
सुरक्षा का चाक-चौबंद घेरा, ड्रोन कैमरों से निगरानी
भीड़ और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों और सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों के माध्यम से असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आयोजन स्थलों पर त्वरित चिकित्सा एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तैनात रहीं।
सुचारू यातायात और मुस्तैद व्यवस्था
ट्रैफिक पुलिस के पूर्व नियोजित रूट डायवर्जन और सुरक्षित दूरी पर बनाए गए पार्किंग स्थलों के चलते शहर में कहीं भी जाम की स्थिति निर्मित नहीं हुई। वहीं, आयोजन समितियों द्वारा त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग कर पटाखों की चिंगारी से दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग दीर्घा की व्यवस्था की गई थी।
देर रात तक गुलजार रहे मेले
पुतला दहन के उपरांत मैदानों के आसपास लगे पारंपरिक मेलों में देर रात तक रौनक बनी रही। खान-पान के स्टॉलों, चाट-चौपाटी और बच्चों के खिलौनों की दुकानों पर परिवारों की भारी भीड़ उमड़ी। बुराई पर अच्छाई की विजय का यह महापर्व सामाजिक सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हुए शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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