रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- जिले की धरती एक बार फिर खनिज संपदा की लूट और माफियाओं के बेलगाम तांडव की गवाह बनी है, लेकिन इस बार प्रशासन की नींद टूटी है और कार्रवाई का डंडा भी चला है। जिले के धनागर क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत के काले कारोबार पर खनिज विभाग ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस ताबड़तोड़ छापेमारी में लाखों रुपये की लागत का अवैध रेत डंप पकड़ा गया है। यह कार्रवाई न केवल रेत माफियाओं के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि अगर प्रशासन अपनी पूरी इच्छाशक्ति पर आ जाए, तो बड़े से बड़े रसूखदार के गिरेबान तक कानून के हाथ पहुंच ही जाते हैं। हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के बाद कई ऐसे ज्वलंत सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब पूरा रायगढ़ जिला मांग रहा है।

भंडाफोड़ और खनिज विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई..

धनागर का वह इलाका, जो पिछले कई महीनों से अवैध रेत की डंपिंग और रातों-रात होने वाली काली कमाई का सुरक्षित पनाहगाह बन चुका था, वहां अचानक खनिज विभाग की टीम ने दबिश दी। इस औचक निरीक्षण और छापेमारी से रेत माफियाओं के गुर्गों में हड़कंप मच गया। मौके पर रेत के विशालकाय पहाड़ लगे हुए थे, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह कोई एक-दो दिन का खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गिरोह का काम है। खनिज विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मौके पर ही भारी भरकम जुर्माना लगाया है।

इस पूरी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि जिले के माइनिंग अधिकारी रमाकांत सोनी ने की है। उनके अनुसार, अवैध डंपिंग के इस सनसनीखेज मामले में सीधे तौर पर 2,75,000 रुपये का जुर्माना ठोका गया है। इसके अलावा अन्य पेनाल्टी और सीलिंग की कार्रवाई को मिलाकर यह आंकड़ा 3 लाख रुपये के पार पहुंच गया है। मौके पर रेत के उत्खनन और परिवहन में लगी भारी-भरकम माउंटेन मशीन और अन्य उपकरणों को विभाग ने तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया है। मशीनों की जब्ती ने माफियाओं की कमर तोड़ने का काम किया है, क्योंकि बिना इन मशीनों के इस काले कारोबार को अंजाम देना असंभव है।

सफेदपोश माफिया चेतक पटेल का काला साम्राज्य..

खनिज विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिस एक नाम ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है, वह नाम है— चेतक पटेल। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो धनागर में अवैध रेत का यह पूरा साम्राज्य चेतक पटेल के इशारों पर ही चल रहा था। चेतक पटेल का नाम सामने आने के बाद से ही इलाके में कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। बताया जा रहा है कि यह तथाकथित सफेदपोश माफिया पिछले एक लंबे अरसे से प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर, या यूं कहें कि किसी अदृश्य सांठगांठ के दम पर, अवैध रेत की डंपिंग और उसकी धड़ल्ले से खरीदी-बिक्री का यह गंदा खेल खेल रहा था।

स्थानीय ग्रामीणों और दबी जुबान में बात करने वाले सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि चेतक पटेल का यह नेटवर्क रातों-रात नहीं पनपा है। इसके पीछे एक लंबा समय, रसूख और कानून को अपनी जेब में रखने का अहंकार शामिल है। नदियों का सीना चीरकर निकाली गई यह रेत धनागर के इस डंपिंग यार्ड में जमा की जाती थी और फिर यहां से ऊंचे दामों पर बाजार में खपा दी जाती थी। चेतक पटेल का नाम सामने आने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस माफिया के पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने की जहमत उठाता है या फिर मामले को यहीं रफा-दफा कर दिया जाएगा।

महज जुर्माना या होगी गिरफ्तारी? उठते गंभीर सवाल..

खनिज विभाग ने कार्रवाई की, जुर्माना लगाया और मशीनें जब्त कीं— यह निश्चित तौर पर एक सराहनीय और साहसिक कदम है। लेकिन, क्या सिर्फ तीन लाख रुपये का जुर्माना उस माफिया के लिए कोई मायने रखता है जो हर महीने अवैध रेत से करोड़ों की काली कमाई कर रहा हो? यह सबसे बड़ा और गंभीर सवाल है जो इस वक्त रायगढ़ के हर प्रबुद्ध नागरिक के जेहन में उठ रहा है।

क्या यह जुर्माना महज एक दिखावटी खानापूर्ति है, जिसे चुकाकर चेतक पटेल जैसे माफिया फिर से अपने पुराने ढर्रे पर लौट आएंगे? जनता अब पूछ रही है कि क्या विभाग चेतन पटेल के ऊपर कड़ी निगरानी बनाए रखेगा? क्या इस मामले में सिर्फ चालान काटकर और जुर्माना वसूलकर फाइल बंद कर दी जाएगी, या फिर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने, खनिज संपदा की चोरी करने और सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगाने के जुर्म में चेतक पटेल की बाकायदा गिरफ्तारी भी होगी? जब तक ऐसे रसूखदार माफियाओं को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक इस तरह की कार्रवाइयों का कोई स्थायी खौफ पैदा नहीं होगा। प्रशासन को यह तय करना होगा कि वह माफियाओं के साथ नरमी बरत रहा है या उनके खिलाफ एक निर्णायक युद्ध लड़ रहा है।

अवैध रेत के पहाड़ों का क्या होगा? जब्ती की प्रक्रिया पर संशय के बादल..

जुर्माने और गिरफ्तारी के सवालों के बीच एक और बेहद तकनीकी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल मुंह बाए खड़ा है। मौके पर जो लाखों रुपये कीमत की हजारों टन अवैध रेत पाई गई है, उस रेत का क्या होगा? क्या विभाग ने उस रेत को विधिवत रूप से सरकारी संपत्ति घोषित कर राजसात (जब्त) कर लिया है?

अक्सर ऐसे मामलों में देखा जाता है कि प्रशासन जुर्माना तो लगा देता है, लेकिन डंप की गई रेत वहीं पड़ी रह जाती है, जिसे बाद में माफिया फिर से सेटिंग करके या रातों-रात चोरी-छिपे बेच देते हैं। अगर धनागर में पकड़ी गई इस लाखों की रेत की पारदर्शी तरीके से जब्ती और सरकारी नीलामी नहीं होती है, तो इस पूरी कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पकड़े गए इस 'अवैध माल' की कस्टडी किसके पास है और इसे माफियाओं की पहुंच से दूर रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि रायगढ़ खनिज विभाग ने धनागर में कार्रवाई करके एक अच्छी शुरुआत जरूर की है, लेकिन यह मंजिल नहीं है। असली जीत तब होगी जब चेतक पटेल जैसे माफियाओं पर आपराधिक मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा और मौके पर पड़ी एक-एक मुट्ठी रेत को सरकारी खजाने में जमा कराया जाएगा। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह इस मामले को एक मिसाल बनाता है या फिर समय के साथ इसे भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल देता है।