रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फर्जी बॉन्ड स्कीम में भारी मुनाफे का सब्जबाग दिखाकर एक सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी से 11 लाख रुपये ऐंठने और कूट रचित बॉन्ड थमाने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा मामले को सामान्य वित्तीय लेन-देन बताकर पल्ला झाड़े जाने के बाद पीड़ित ने अदालत की शरण ली। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी देवाशीष ठाकुर के कड़े निर्देश पर चक्रधरनगर थाना पुलिस ने मृतक आरोपी की पत्नी और भाई के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने व आपराधिक षड्यंत्र की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

घरेलू पहचान का उठाया फायदा, 12 फीसदी ब्याज का दिया झांसा

जानकारी के अनुसार, छोटे अतरमुड़ा निवासी 66 वर्षीय मनोहर लाल नंदे तमनार विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सराईपाली से लेखापाल पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद मिले जीपीएफ और ग्रेच्युटी के पैसों पर उनके परिचित व वित्तीय सलाहकार निशांत कुमार मिश्रा की नजर थी। पीड़ित के आयकर और खातों का काम देखने के कारण दोनों परिवारों में घनिष्ठता थी। जुलाई 2020 में निशांत अपनी पत्नी सौभाग्य लता मिश्रा और भाई नितिन कुमार मिश्रा के साथ मनोहर लाल के घर पहुंचा और उन्हें आरबीआई की 'रेगुलर पेआउट बॉन्ड-2019' में निवेश करने की सलाह दी। आरोपियों ने 5 साल के लिए प्रतिवर्ष 12 फीसदी की दर से पक्का रिटर्न दिलाने का भरोसा दिलाया।

किस्तों में लिए 11 लाख, विश्वास जमाने के लिए कुछ माह दिया ब्याज

आरोपियों के झांसे में आकर पीड़ित ने जुलाई 2020 में 5-5 लाख रुपये के दो चेक (कुल 10 लाख) दिए। इसके एवज में आरोपियों ने घर आकर आरबीआई के नाम का कथित बॉन्ड पेपर सौंप दिया। इसके बाद जून 2021 में पुनः 5 लाख रुपये लिए गए, जिसमें से पीड़ित द्वारा घरेलू जरूरत बताने पर 4 लाख रुपये वापस किए गए और शेष 1 लाख रुपये को निवेश में जोड़ते हुए दूसरा बॉन्ड पेपर थमा दिया गया। निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए मुख्य सूत्रधार निशांत मिश्रा ने अगस्त 2020 से मार्च 2023 तक अलग-अलग किस्तों में कुल 3 लाख 52 हजार रुपये का ब्याज ऑनलाइन खाते में ट्रांसफर भी किया।

मुख्य कर्ताधर्ता की मौत के बाद खुला फर्जीवाड़े का खेल

यह फर्जीवाड़ा तब बेनकाब हुआ जब 6 जून 2023 को निशांत कुमार मिश्रा की मृत्यु हो गई और अप्रैल माह से ब्याज की राशि आनी बंद हो गई। पीड़ित जब दिए गए बॉन्ड पेपर्स को लेकर अन्य आरोपियों सौभाग्य लता और नितिन के पास पहुंचा, तब सितंबर 2023 में यह खुलासा हुआ कि उक्त बॉन्ड पेपर पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत हैं। शुरुआत में आरोपियों ने गंगा नर्सिंग होम के पास अपनी अचल संपत्ति बेचकर 13 लाख 97 हजार रुपये की पूरी देनदारी चुकाने का वादा किया, लेकिन समय बीतने के बाद उन्होंने साफ तौर पर पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।

अदम चेक काटकर पुलिस ने फेरा था मुंह, कोर्ट ने लगाई फटकार

पीड़ित ने फरवरी 2024 में चक्रधरनगर थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे हस्तक्षेप अयोग्य और सामान्य सिविल लेन-देन बताकर अदालत जाने की नसीहत दे दी थी। पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से गुहार लगाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित ने न्यायालय में धारा 175(3) BNSS के तहत परिवाद पेश किया। अदालत ने इसे गंभीर आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचना मानते हुए तत्काल एफआईआर का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने सौभाग्य लता मिश्रा और नितिन कुमार मिश्रा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने इसी तरह कई अन्य शिक्षकों और नागरिकों से भी ठगी की है, जिसकी शिकायतें अन्य थानों में भी दर्ज हैं।